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कोल्ड्रिफ सीरप कांड की जांच में रोड़ा! तमिलनाडु सरकार के असहयोग पर SIT ने उठाए सवाल, जांच की रफ्तार हुई धीमी

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छिंदवाड़ा। जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सीरप के सेवन से 24 बच्चों की मौत के मामले में 10 अक्टूबर को गठित विशेष एसआईटी टीम लगातार जांच कर रही है। लेकिन जांच की रफ्तार धीमी है। इस जांच में दवा निर्माता कंपनी की फैक्ट्री वाले राज्य तमिलनाडु की सरकार के असहयोग पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। छिंदवाड़ा के सांसद बंटी विवेक साहू ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि तमिलनाडु सरकार जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रही है।

जानकारी के अनुसार, इस असहयोग के चलते एसआईटी द्वारा तमिलनाडु के फूड सेफ्टी एंड ड्रग डिपार्टमेंट को नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस में श्रीसन फार्मा (दवा निर्माता कंपनी) के रिकॉर्ड, ऑडिट और कॉम्प्लायंस की जानकारी मांगी गई है। एसआईटी यह पता लगाना चाहती है कि बच्चों की मौत का मामला सामने आने से पहले तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोल अधिकारियों ने कब और किस तरह के निरीक्षण किए थे। हालांकि अधिकारियों ने नोटिस जारी करने की पुष्टि नहीं की है।

दूषित बैच बाजार में आने से पहले पता लगा लेना चाहिए था

मध्य प्रदेश पुलिस और सरकार का मानना है कि यह त्रासदी तमिलनाडु स्थित दवा फैक्ट्री हुई लापरवाही के कारण हुई है और वहां के अधिकारियों को दवा दूषित बैच बाजार में आने से पहले ही इसका पता लगा लेना चाहिए था।

मध्य प्रदेश पुलिस की एसआईटी टीम ने तमिलनाडु से श्रीसन फार्मा के मालिक जी. रंगनाथन और महिला लैब तकनीशियन के. महेश्वरी को गिरफ्तार किया है। जांच दल अब नियामक ढांचे के भीतर व्यक्तिगत जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, खासकर इस बात की जांच कर रहा है कि क्या तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोल अधिकारियों ने केवल कागजी कार्रवाई पर निरीक्षण किया था, न कि भौतिक सत्यापन पर।

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