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आखिर क्या है MSP पर स्वामीनाथन का C2+50% फॉर्मूला? जिसकी मांग के लिए प्रदर्शन कर रहे अन्नदाता

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 नई दिल्ली। पंजाब और हरियाणा के किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली कूच की तैयारी कर रहे हैं। किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च को पंजाब और हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर रोक लिया गया है। किसानों को रोकने और उन्हें तितर-बितर करने के लिए मंगलवार को पुलिस की ओर से आंसू गैस के दागे गए। सिंघु बॉर्डर, टीकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात हैं। इन सीमाओं पर सीमेंट और लोहे की बैरिकेडिंग भी की गई है। इसके अलावा किसानों को रोकने के लिए कटीले तार और कंटेनर भी रखे गए हैं। फिलहाल पुलिस ने प्रदर्शनाकरियों को पंजाब की सीमा में रोका हुआ है लेकिन आज हालात बेकाबू हो सकते हैं। किसान किसी भी कीमत पर दिल्ली पहुंचना चाहते हैं।

बता दें कि सरकार किसान नेताओं से बातचीत जारी रखना चाहती है। सड़क पर उतरे किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। वही कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन जिन्हें हाल में ‘भारत रत्न’ दिए जाने की घोषणा हुई है। उनके C2+50% फॉर्मूले की डिमांड हो रही है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि इस फॉर्मूले में क्या कहा गया है और सरकार के न मानने की सबसे बड़ी वजह क्या है?

यह न्यूनतम समर्थन मूल्य निकालने का स्वामीनाथन फॉर्मूला है जिस पर किसानों की उपज सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदने की बात कही गई है। सी2+50% फसल की औसत लागत से 50 फीसदी ज्यादा पैसे देने का फॉर्मूला है। इसमें सभी खर्चों को जोड़ा गया है जिसमें जमीन का रेंट भी शामिल है। सरल शब्दों में समझें तो स्वामीनाथन आयोग ने फसल लागत का 50 प्रतिशत से ज्यादा देने की सिफारिश की थी। उत्पादन लागत को तीन तरह से निकाला जाता है –

1. A2 में नकदी खर्च जैसे बीज, रसायन, मजदूरी पर खर्च, खाद, ईंधन और सिंचाई आदि शामिल है।
2. A2+FL में फसल पैदा करने में परिवार के सदस्यों की मेहनत की अनुमानित लागत भी जोड़ी जाती है।
3. C2 में व्यापक लागत शामिल होती है, जिसमें जमीन का लीज रेंट और खेती से संबंधित दूसरी चीजों पर लगने वाला ब्याज भी शामिल है।

आयोग ने C2 की लागत में ही 50 फीसदी और जोड़कर फसल पर MSP तय करने की बात कही थी।

संयुक्त किसान मोर्चा सभी फसलों के लिए स्वामीनाथन फॉर्मूले के तहत एमएसपी, फसल की खरीद की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं और स्मार्ट मीटर नहीं होने सहित अपनी कई मांगें उठा रहा है। किसान नेताओं ने खेती, घरेलू उपयोग और दुकानों के लिए मुफ्त 300 यूनिट बिजली, व्यापक फसल बीमा और पेंशन में बढ़ोतरी कर 10,000 रुपये हर महीने करने की मांग की है। ऐसे में यह समझना भी जरूरी है कि अभी एमएसपी कैसे निकाली जाती है।

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