Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Naghah Loh Dor Tradition: हाईवे के किनारे बिना कैमरे और कैशियर के बिकता है सामान, क्यूआर कोड से होता... Himachal Horticulture News: मौसम की मार से बागवान परेशान, बाजार में पहुंचे सिर्फ 1.15 करोड़ सेब के ब... Patna MLC Election News: मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ खोला मोर्चा, अनुज सिंह... UP News Today: बिजनौर के अमीखानपुर में 26 बीघा कृषि भूमि हथकंडे का मामला, एसपी केके बिश्नोई ने दी जा... Mumbai Manori Beach Accident: फंसे हुए विदेशी जहाज में गैस कटर से चोरी के दौरान चार की मौत, सनसनी Voter List Revision Maharashtra: बीएलओ के लिए नए नियम जारी, व्हाट्सऐप और घर-घर जाकर दस्तावेज स्वीकार... Amravati Road Accident News: शेगांव से दुर्गा मूर्ति लेकर वर्धा जा रही पिकअप गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त, व... Ramanujnagar Police Station: आरोपी दामाद भजन सिंह गिरफ्तार, पारिवारिक विवाद में की थी खौफनाक वारदात Gandhi Jayanti Special: रायपुर के शुक्ला भवन और जैतूसाव मठ में रुके थे महात्मा गांधी, अस्पृश्यता निव... SECR GM Tarun Prakash Visit: चांपा और नैला रेलवे स्टेशन पर सुपरफास्ट ट्रेनों के ठहराव की उठी मांग, म...

भारी विरोध के बाद झुकी बार काउंसिल ऑफ इंडिया: NALSAR छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक का आदेश BCI ने लिया वापस

12

नई दिल्ली/हैदराबाद: कानूनी शिक्षा और छात्र अधिकारों के संघर्ष में युवाओं को एक और बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा हैदराबाद स्थित प्रतिष्ठित ‘नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च’ (NALSAR) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों के वकालत (एडवोकेट) एनरोलमेंट पर रोक लगाने के फरमान के खिलाफ सोशल मीडिया पर व्यापक जन-आंदोलन छिड़ गया। छात्रों, वकीलों और राजनीतिक दलों के भारी आक्रोश को देखते हुए शीर्ष विनियामक संस्था BCI को चंद घंटों के भीतर अपना विवादास्पद आदेश वापस लेने के लिए विवश होना पड़ा।

⚖️ दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि को लेकर भड़का था विवाद, CJI की टिप्पणी के बाद छात्रों ने शुरू किया था अभियान

विदित हो कि यह संपूर्ण विवाद NALSAR के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के आमंत्रण को लेकर उत्पन्न हुआ था।

संस्थान के लगभग 450 छात्रों ने एक कैंपेन चलाकर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सीजेआई सूर्य कांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया था। छात्रों की यह नाराजगी पिछले दिनों दिल्ली में नीट (NEET) विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित बर्बरता पर सुनवाई के समय सीजेआई द्वारा की गई मौखिक टिप्पणी—“कृपया हमारा समय व्यर्थ न करें, हमारे पास ये वीडियो देखने का समय नहीं है”—के पश्चात प्रारंभ हुई थी। इसके प्रतिशोध स्वरूप BCI ने NALSAR के पासआउट छात्रों के रजिस्ट्रेशन पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया था।

🎙️ “यह युवाओं को खुलेआम डराने-धमकाने जैसा है”— असदुद्दीन ओवैसी ने BCI के कदम को बताया निंदनीय

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के इस कठोर निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह कदम पूरी तरह से असंवैधानिक और निंदनीय है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक समाज में अपने विचार रखने वाले युवाओं और भावी अधिवक्ताओं को इस प्रकार से धमकाना और उनके करियर पर प्रहार करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। विपक्षी दलों ने भी इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा आघात करार दिया।

📊 “एक साल में 14 करोड़ की मीटिंग और 12 करोड़ का ट्रेवल खर्च”— CJP प्रवक्ता सौरव दास ने BCI चेयरमैन पर दागे तीखे सवाल

आदेश वापस लिए जाने के बावजूद BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा युवाओं और कानूनी जानकारों के निशाने पर बने हुए हैं।

कॉपरेटिव जस्टिस पार्टी (CJP) के सह-संयोजक एवं मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने मनन मिश्रा के कार्यकाल और BCI के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए। दास ने आरोप लगाते हुए कहा, “BCI ने मात्र एक वर्ष के भीतर मीटिंगों और सम्मेलनों पर 14 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, जबकि यात्रा और ठहरने पर 12 करोड़ रुपये व्यय किए गए। जनता और वकीलों को यह जानने का अधिकार है कि यह भारी-भरकम राशि कहाँ और कैसे खर्च हुई?”

📜 2012 से पद पर बने रहने और स्टेट बार काउंसिलों में हस्तक्षेप पर भी मांगी जवाबदेही

सौरव दास ने BCI चेयरमैन से सार्वजनिक जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि स्टेट बार काउंसिलों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप तक उन्हें कैसे कार्य करने दिया गया।

उन्होंने छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए पूछा कि नियमों को ताक पर रखकर लिए गए इन निर्णयों से किन लोगों को लाभ पहुँचाया गया? सौरव दास ने कहा कि आदेश का वापस होना युवाओं की बड़ी जीत है, किंतु BCI के भीतर पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधारों की यह कानूनी लड़ाई निरंतर जारी रहेगी।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.