Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Parliament Question Hour Analysis: संसद के लाखों सवालों में आम जनता के मुद्दे कहां? जानिए गरीबी और ज... Maharashtra Voter List SIR 2026: वोटर लिस्ट से नाम हटाने से पहले BLA को देनी होगी सूची, चुनाव आयोग क... RSS Chief Mohan Bhagwat: अतिवाद से परेशान है दुनिया, भारत के पास है ज्ञान का खजाना; अखिल भारतीय विहा... Tamil Nadu Language Dispute: सथानकुलम में दिशा-निर्देश बोर्ड से मिटाए गए हिंदी शब्द, भारी विरोध के ब... Ozone Urbana Scam: बेंगलुरु में होम बायर्स से 927 करोड़ की ठगी, ओजोन ग्रुप के CMD एस. वासुदेवन गिरफ्... Manori Beach News: स्पीडबोट से विदेशी जहाज में चोरी करने घुसे थे बदमाश, गैस रिसाव से 4 की मौत; हेलीक... यूपी की 11 MLC सीटों पर भाजपा का चुनावी चक्रव्यूह: 23 अक्टूबर को मतदान, सामाजिक समीकरणों पर जोर Ramnagar Road Accident: नैनीताल घूमने निकले नेशनल बास्केटबॉल प्लेयर यतीश यादव की सड़क हादसे में मौत,... दिल्ली के 736 पार्कों का सुरक्षा ऑडिट पूरा: उपराज्यपाल के निर्देश पर DDA ने 3 श्रेणियों में बांटे पा... वृंदावन आश्रम पर गहराया विवाद: शिष्य की संदिग्ध मौत के बीच हाथरस का युवक 3 महीने से लापता

Puri Gundicha Temple News: जगन्नाथ जी की मौसी का घर खुला, श्रद्धालुओं के लिए ₹10 का टिकट; बुजुर्गों-बच्चों को मुफ्त प्रवेश

3

ओडिशा के पुरी में स्थित सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक गुंडिचा मंदिर मंगलवार को छह साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर आम श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों के लिए खोल दिया गया है।

मंदिर के कपाट खुलते ही देश-विदेश से पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने चतुर्धा मूर्ति की पवित्र जन्मवेदी यानी आडप मंडप के साक्षात दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) की प्रबंध समिति द्वारा लिए गए आधिकारिक निर्णय के अनुसार, मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए प्रत्येक सामान्य श्रद्धालु को 10 रुपये का मामूली प्रवेश शुल्क देना होगा।

श्रद्धालुओं की सुख-सुविधा को ध्यान में रखते हुए जूते-चप्पल और मोबाइल फोन सुरक्षित रखने के लिए निशुल्क क्लॉक रूम की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही दिव्यांगजनों, छोटे बच्चों और 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए दर्शन पूरी तरह निशुल्क रहेंगे।

🚪 सिंहद्वार से प्रवेश और निकासी की व्यवस्था: प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद

मंदिर में दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम:

  • सिंहद्वार से आवागमन: मंदिर दोबारा खुलने के प्रथम दिन श्रद्धालुओं, तीर्थयात्रियों और विदेशी पर्यटकों के प्रवेश तथा दर्शनोपरांत सुरक्षित निकासी के लिए मुख्य ‘सिंहद्वार’ का ही उपयोग किया गया।

  • सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त: दर्शनार्थियों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने और सुगम दर्शन सुनिश्चित करने के लिए मंदिर परिसर और बाहरी क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

  • अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति: कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद पाढ़ी, पुलिस अधीक्षक (SP) प्रतीक सिंह, मंदिर प्रबंध समिति के वरिष्ठ सदस्य, सेवायत और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

👻 ‘बाबेना भूत’ से जुड़ी लोकमान्यता फिर चर्चा में: स्थानीय जनविश्वास का हिस्सा

गुंडिचा मंदिर से जुड़ी रहस्यमयी किंवदंतियां:

  • रहस्यमयी लोककथाएं: गुंडिचा मंदिर अपने अद्वितीय धार्मिक इतिहास के साथ-साथ कुछ स्थानीय लोकमान्यताओं को लेकर भी जनमानस में कौतूहल का विषय बना रहता है।

  • बाबेना भूत की चर्चा: स्थानीय निवासियों के बीच वर्षों से यह धारणा प्रचलित है कि मंदिर परिसर में ‘बाबेना भूत’ का वास है।

  • वैज्ञानिक आधार नहीं: 6 साल बाद मंदिर के कपाट आम जनता के लिए खुलने पर स्थानीय स्तर पर इस लोकविश्वास की चर्चाएं एक बार फिर शुरू हो गई हैं। हालांकि, मंदिर प्रशासन और जानकारों का कहना है कि यह केवल एक स्थानीय लोकमान्यता है, जिसका कोई ऐतिहासिक या वैज्ञानिक आधार नहीं है।

🚩 रथ यात्रा से जुड़ा है पावन धार्मिक महत्व: भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर

धार्मिक मान्यताएं और कलिंग वास्तुकला की भव्यता:

  • मौसी बाड़ी के रूप में ख्याति: गुंडिचा मंदिर मुख्य श्री जगन्नाथ मंदिर से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसे भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की मौसी का घर माना जाता है।

  • रथ यात्रा का मुख्य पड़ाव: विश्व प्रसिद्ध आषाढ़ रथ यात्रा के दौरान महाप्रभु जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ विशाल रथों पर सवार होकर मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं और यहां आडप मंडप में सात दिनों तक विश्राम करते हैं।

  • जन्मवेदी का पावन स्थल: स्कंद पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में इस पवित्र स्थान को भगवान जगन्नाथ की मूल जन्मवेदी के रूप में विशेष मान्यता प्राप्त है।

  • भव्य कलिंग शैली: यह मंदिर पारंपरिक कलिंग वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है, जो चारों ओर से ऊंचे प्राचीरों और हरे-भरे सुंदर बगीचों से घिरा हुआ है। छह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कपाट खुलने से जगन्नाथ भक्तों में भारी उत्साह और उल्लास का माहौल है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.