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ओवैसी दे रहे जवाब तो थरूर भी कर रहे पाकिस्तान के मंसूबों पर ‘इंटरनेशनल स्ट्राइक’, ऑपरेशन सिंदूर के बाद बने भारत की आवाज

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पहलगाम हमले के बाद से पाकिस्तान के खिलाफ AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सख्त तेवर अपना रखा है, तो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से कांग्रेस सांसद शशि थरूर लगातार पाकिस्तान के नापाक सियासी मंसूबों पर पानी फेरने में जुटे हैं. थरूर लगातार इंटरनेशनल मीडिया को यह बताने में जुटे हैं कि भारत को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ करने की जरूरत क्यों पड़ी. इसके अलावा भारत के सैन्य ठिकानों और आम नागरिकों के निशाने बनाने के एक्शन को भारतीय सेना के द्वारा की गई कार्रवाई को रिएक्शन बताकर दुनिया के सामने पाकिस्तान के आतंकी चेहरे को बेनकाब कर रहे हैं.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है. मोदी सरकार के साथ-साथ थरूर सिर्फ मजबूती से खड़े ही नहीं बल्कि पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए इंटरनेशनल स्ट्राइक’ भी छेड़ रखी है. दुनिया के सामने पाकिस्तान को अलग-थलग करने के मोर्चा पर थरूर जुटे हैं, जिसके लिए कूटनीतिक दांव चल रहे हैं. पाकिस्तान के खिलाफ और भारत के पक्ष में जितने मजबूती और तर्क के साथ बात थरूर रख रहे हैं, उतना तो सत्तापक्ष का भी नेता नहीं रख पा रहा. ऑपरेशन सिंदूर के बाद शशि थरूर भारत की आवाज बनकर उभरे हैं?

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जरूरत क्यों थी?

भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के जरिए स्ट्राइक कर बदला लिया है. देश-दुनिया में भारत के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चर्चा हो रही है. शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपनी बात अलग अंदाज में रखी और बताया कि भारत को जरूरत क्यों पड़ी? थरूर ने कहा कि यह हमारी राष्ट्रीय चेतना में बसी एक नई-नवेली विधवा की छवि को उजागर करता है, जो पहलगाम में अपने पति के बगल में घुटनों के बल बैठी और रो रही है. यही कारण है कि ऑपरेशन सिंदूर जरूरी था. उन्होंने कहा कि तथ्य यह है कि सिंदूर खून से लाल है, यह भी एक संदेश देता है.

शशि थरूर ने कहा कि भारत सरकार की ओर से ऑपरेशन सिंदूर पर की गई प्रेस ब्रीफिंग को पाकिस्तान और दुनिया के लिए संदेश है. विदेश सचिव विक्रांत मिसरी, कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की मौजूदगी ने साबित कर दिया कि यह लड़ाई हिंदू-मुस्लिम नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की एकता है. उन्होंने कहा कि हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर पाकिस्तान उकसाएगा तो भारत तैयार है. भारत ने पहलगाम हमले के 15 दिन बाद मंगलवार आधी रात पाकिस्तान और PoK में एयर स्ट्राइक की. इसमें 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है. भारत ने 26 बेकसूर नागरिकों की मौत का बदला लेने के लिए सटीक कार्रवाई की.

आतंकियों के खिलाफ एक्शन था

थरूर यह भी बताने में जुटे हैं कि भारत की कार्रवाई आतंकियों के खिलाफ थी न की पाकिस्तान के खिलाफ. उन्होंने कहा कि भारत ने पहलगाम हमले का जवाब सोच-समझकर और सीमित तरीके से दिया है, हमने आतंकी ठिकानों को रात में निशाना बनाया ताकि किसी आम नागरिक की जान न जाए. टारगेट सिर्फ आतंकी अड्डे थे, न कि पाक सेना या सरकारी संस्थान. यह एक ‘कैलिब्रेटेड रिस्पॉन्स’ था. ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए गए हैं, वो पूरी तरह से आवश्यक और सटीक थे. इन हमलों में जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित मुख्यालय और लश्कर-ए-तैयबा के मुरिदके स्थित बेस को निशाना बनाया गया.

कांग्रेस सांसद शशि ने कहा कि भारत का इरादा इस मामले को युद्ध तक ले जाने का नहीं है, ‘हमने पाकिस्तानी सेना या सरकार के प्रतिष्ठानों पर हमला नहीं किया, जबकि हमें पता है कि इस हमले के पीछे वही हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि हम युद्ध नहीं चाहते.’ थरूर ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर दोनों देशों में युद्ध हुआ तो उनकी सेना चार दिन भी नहीं टिक पाएगी और युद्ध खत्म हो जाएगा. यदि भारत के नागरिकों, सैन्य प्रतिष्ठानों और सरकारी संस्थानों पर हमला होता है, तो देश उसकी कड़ी प्रतिक्रिया देने से पीछे नहीं हटेगा. इस तरह से थरूर दुनिया को ये बताने में जुटे हैं कि भारत ने पाकिस्तान के सैन्य या फिर नागरिकों को निशाना नहीं बनाया बल्कि आतंकी ठिकाने के बनाया है, जहां से भारत के खिलाफ साजिश रची जाती है.

चीन को भी थरूर ने दी नसीहत

पाकिस्तान के हमदर्द चीन को भी शशि थरूर ने सियासी संदेश देते नजर आए हैं. उन्होंने कहा कि चीन ने इस बार पाकिस्तान का खुलकर साथ नहीं दिया. थरूर ने कहा कि आज के समय में भारत का बाजार चीन के लिए ज्यादा जरूरी है खासकर तब, जब दुनिया में अमेरिका जैसे देश ज्यादा टैक्स लगा रहे हैं. थरूर ने चीन के बारे में बात करते हुए कहा कि हैरानी की बात है कि चीन ने पाकिस्तान का उतना साथ नहीं दिया, जितना पहले देता था. चीन इस बात को बखूबी समझ रहा है कि उसे क्या करना चाहिए?

थरूर कहते हैं कि चीन ने जो कहा है, उससे पता चलता है कि वह भारत के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाना चाहता है. चीन को भारत की जरूरत है, जितनी पहले कभी नहीं थी. युद्ध की स्थिति में चीन मेरे विचार में एक रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाएगा. इस तरह से थरूर जो कुछ कह रहे हैं, उससे लग रहा है कि इस बार भारत से पंगा लेकर पाकिस्तान ने अपने एक और भरोसेमंद मित्र से दूरी बढ़ा ली है. चीन का रुख खुलकर सामने नहीं आया है. ऐसे थरूर ने जरूर चीन को संदेश दे दिया है कि उनके लिए भारत और पाकिस्तान में किसका साथ बेहतर रहेगा.

थरूर ने चला कूटनीतिक दांव

शशि थरूर नेता से पहले डिप्लोमेट रह चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. इसके अलावा यूपीए सरकार में विदेश राज्य मंत्री रहे हैं. थरूर को कूटनीतिक दांव बखूबी आता है. पाकिस्तान के खिलाफ शशि थरूर इन दिनों कूटनीतिक दांव चल रहे हैं. यही वजह है कि उन्होंने भारत-चीन तनाव के बीच कहा कि सभी देश संयम बरते. यह सामान्य बात है. थरूर ने कोई भी नहीं चाहता कि दो परमाणु शक्ति वाले देशों के बीच युद्ध हो.

थरूर ने कहा कि रूस, फ्रांस और इजराइल ही ऐसे देश हैं, जिन्होंने खुलकर भारत के आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार को समझा है. अमेरिका को भी कुछ कहना चाहिए था, क्योंकि 9/11 के बाद उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ सबसे कड़ी प्रतिक्रिया दी थी उन्होंने कहा है कि देश पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू करने की मंशा नहीं रखता है, लेकिन पाकिस्तान के हर एग्रेशन का जवाब दिया जाएगा. थरूर ने कहा कि हम जिम्मेदार देश हैं, युद्ध हमारी प्राथमिकता नहीं है, लेकिन आत्मरक्षा में हम कभी पीछे नहीं हटेंगे.

राष्ट्रवादी चेहरा बनकर उभरे ओवैसी

वहीं, मुस्लिम सियासत के चेहरा माने जाने वाले असदुद्दीन ओवैसी सार्वजनिक मंचों पर सिर पर इस्लामिक टोपी पहने नजर आते हैं, लेकिन इन दिनों तिरंगा पगड़ी बांधकर पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, मुस्लिम परस्त दायरे से खुद को बाहर निकलकर ओवैसी एक ‘राष्ट्रवादी नेता’ और देश की मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं. पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ ओवैसी ने केंद्र सरकार के स्टैंड का दिल खोलकर समर्थन किया. उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन करने के लिए लताड़ा और पाकिस्तान से PoK को वापस लेने की अपील भी कर रहे हैं.

असदु्द्दीन ओवैसी ने कहा, ‘अब पाकिस्तान को समझाने का समय नहीं है,अब उसे करारा जवाब देने का वक्त आ गया है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद उन्होंने देश की आर्मी को सेल्यूट करते हुए कहा कि मैं हमारी रक्षा सेनाओं द्वारा पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर किए गए लक्षित हमलों का स्वागत करता हूं.पाकिस्तानी डीप स्टेट को ऐसी सख्त सीख दी जानी चाहिए कि फिर कभी दूसरा पहलगाम न हो.पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर देना चाहिए. जय हिंदू. ऑपरेशन सिंदूर के दिन ओवैसी कश्मीर में थे और उन्होंने वहीं से पाकिस्तान मुर्दाबाद और हिंदुस्तान जिंदाबाद का नारा बुलंद करते नजर आए. इस तरह ओवैसी पाकिस्तानियों को उन्हीं के भाषा में करारा जवाब दे रहे हैं.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जरूरत क्यों थी?

भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के जरिए स्ट्राइक कर बदला लिया है. देश-दुनिया में भारत के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चर्चा हो रही है. शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपनी बात अलग अंदाज में रखी और बताया कि भारत को जरूरत क्यों पड़ी? थरूर ने कहा कि यह हमारी राष्ट्रीय चेतना में बसी एक नई-नवेली विधवा की छवि को उजागर करता है, जो पहलगाम में अपने पति के बगल में घुटनों के बल बैठी और रो रही है. यही कारण है कि ऑपरेशन सिंदूर जरूरी था. उन्होंने कहा कि तथ्य यह है कि सिंदूर खून से लाल है, यह भी एक संदेश देता है.

शशि थरूर ने कहा कि भारत सरकार की ओर से ऑपरेशन सिंदूर पर की गई प्रेस ब्रीफिंग को पाकिस्तान और दुनिया के लिए संदेश है. विदेश सचिव विक्रांत मिसरी, कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की मौजूदगी ने साबित कर दिया कि यह लड़ाई हिंदू-मुस्लिम नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की एकता है. उन्होंने कहा कि हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर पाकिस्तान उकसाएगा तो भारत तैयार है. भारत ने पहलगाम हमले के 15 दिन बाद मंगलवार आधी रात पाकिस्तान और PoK में एयर स्ट्राइक की. इसमें 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है. भारत ने 26 बेकसूर नागरिकों की मौत का बदला लेने के लिए सटीक कार्रवाई की.

आतंकियों के खिलाफ एक्शन था

थरूर यह भी बताने में जुटे हैं कि भारत की कार्रवाई आतंकियों के खिलाफ थी न की पाकिस्तान के खिलाफ. उन्होंने कहा कि भारत ने पहलगाम हमले का जवाब सोच-समझकर और सीमित तरीके से दिया है, हमने आतंकी ठिकानों को रात में निशाना बनाया ताकि किसी आम नागरिक की जान न जाए. टारगेट सिर्फ आतंकी अड्डे थे, न कि पाक सेना या सरकारी संस्थान. यह एक ‘कैलिब्रेटेड रिस्पॉन्स’ था. ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए गए हैं, वो पूरी तरह से आवश्यक और सटीक थे. इन हमलों में जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित मुख्यालय और लश्कर-ए-तैयबा के मुरिदके स्थित बेस को निशाना बनाया गया.

कांग्रेस सांसद शशि ने कहा कि भारत का इरादा इस मामले को युद्ध तक ले जाने का नहीं है, ‘हमने पाकिस्तानी सेना या सरकार के प्रतिष्ठानों पर हमला नहीं किया, जबकि हमें पता है कि इस हमले के पीछे वही हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि हम युद्ध नहीं चाहते.’ थरूर ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर दोनों देशों में युद्ध हुआ तो उनकी सेना चार दिन भी नहीं टिक पाएगी और युद्ध खत्म हो जाएगा. यदि भारत के नागरिकों, सैन्य प्रतिष्ठानों और सरकारी संस्थानों पर हमला होता है, तो देश उसकी कड़ी प्रतिक्रिया देने से पीछे नहीं हटेगा. इस तरह से थरूर दुनिया को ये बताने में जुटे हैं कि भारत ने पाकिस्तान के सैन्य या फिर नागरिकों को निशाना नहीं बनाया बल्कि आतंकी ठिकाने के बनाया है, जहां से भारत के खिलाफ साजिश रची जाती है.

चीन को भी थरूर ने दी नसीहत

पाकिस्तान के हमदर्द चीन को भी शशि थरूर ने सियासी संदेश देते नजर आए हैं. उन्होंने कहा कि चीन ने इस बार पाकिस्तान का खुलकर साथ नहीं दिया. थरूर ने कहा कि आज के समय में भारत का बाजार चीन के लिए ज्यादा जरूरी है खासकर तब, जब दुनिया में अमेरिका जैसे देश ज्यादा टैक्स लगा रहे हैं. थरूर ने चीन के बारे में बात करते हुए कहा कि हैरानी की बात है कि चीन ने पाकिस्तान का उतना साथ नहीं दिया, जितना पहले देता था. चीन इस बात को बखूबी समझ रहा है कि उसे क्या करना चाहिए?

थरूर कहते हैं कि चीन ने जो कहा है, उससे पता चलता है कि वह भारत के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाना चाहता है. चीन को भारत की जरूरत है, जितनी पहले कभी नहीं थी. युद्ध की स्थिति में चीन मेरे विचार में एक रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाएगा. इस तरह से थरूर जो कुछ कह रहे हैं, उससे लग रहा है कि इस बार भारत से पंगा लेकर पाकिस्तान ने अपने एक और भरोसेमंद मित्र से दूरी बढ़ा ली है. चीन का रुख खुलकर सामने नहीं आया है. ऐसे थरूर ने जरूर चीन को संदेश दे दिया है कि उनके लिए भारत और पाकिस्तान में किसका साथ बेहतर रहेगा.

थरूर ने चला कूटनीतिक दांव

शशि थरूर नेता से पहले डिप्लोमेट रह चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. इसके अलावा यूपीए सरकार में विदेश राज्य मंत्री रहे हैं. थरूर को कूटनीतिक दांव बखूबी आता है. पाकिस्तान के खिलाफ शशि थरूर इन दिनों कूटनीतिक दांव चल रहे हैं. यही वजह है कि उन्होंने भारत-चीन तनाव के बीच कहा कि सभी देश संयम बरते. यह सामान्य बात है. थरूर ने कोई भी नहीं चाहता कि दो परमाणु शक्ति वाले देशों के बीच युद्ध हो.

थरूर ने कहा कि रूस, फ्रांस और इजराइल ही ऐसे देश हैं, जिन्होंने खुलकर भारत के आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार को समझा है. अमेरिका को भी कुछ कहना चाहिए था, क्योंकि 9/11 के बाद उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ सबसे कड़ी प्रतिक्रिया दी थी उन्होंने कहा है कि देश पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू करने की मंशा नहीं रखता है, लेकिन पाकिस्तान के हर एग्रेशन का जवाब दिया जाएगा. थरूर ने कहा कि हम जिम्मेदार देश हैं, युद्ध हमारी प्राथमिकता नहीं है, लेकिन आत्मरक्षा में हम कभी पीछे नहीं हटेंगे.

राष्ट्रवादी चेहरा बनकर उभरे ओवैसी

वहीं, मुस्लिम सियासत के चेहरा माने जाने वाले असदुद्दीन ओवैसी सार्वजनिक मंचों पर सिर पर इस्लामिक टोपी पहने नजर आते हैं, लेकिन इन दिनों तिरंगा पगड़ी बांधकर पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, मुस्लिम परस्त दायरे से खुद को बाहर निकलकर ओवैसी एक ‘राष्ट्रवादी नेता’ और देश की मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं. पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ ओवैसी ने केंद्र सरकार के स्टैंड का दिल खोलकर समर्थन किया. उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन करने के लिए लताड़ा और पाकिस्तान से PoK को वापस लेने की अपील भी कर रहे हैं.

असदु्द्दीन ओवैसी ने कहा, ‘अब पाकिस्तान को समझाने का समय नहीं है,अब उसे करारा जवाब देने का वक्त आ गया है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद उन्होंने देश की आर्मी को सेल्यूट करते हुए कहा कि मैं हमारी रक्षा सेनाओं द्वारा पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर किए गए लक्षित हमलों का स्वागत करता हूं.पाकिस्तानी डीप स्टेट को ऐसी सख्त सीख दी जानी चाहिए कि फिर कभी दूसरा पहलगाम न हो.पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर देना चाहिए. जय हिंदू. ऑपरेशन सिंदूर के दिन ओवैसी कश्मीर में थे और उन्होंने वहीं से पाकिस्तान मुर्दाबाद और हिंदुस्तान जिंदाबाद का नारा बुलंद करते नजर आए. इस तरह ओवैसी पाकिस्तानियों को उन्हीं के भाषा में करारा जवाब दे रहे हैं.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जरूरत क्यों थी?

भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के जरिए स्ट्राइक कर बदला लिया है. देश-दुनिया में भारत के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चर्चा हो रही है. शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपनी बात अलग अंदाज में रखी और बताया कि भारत को जरूरत क्यों पड़ी? थरूर ने कहा कि यह हमारी राष्ट्रीय चेतना में बसी एक नई-नवेली विधवा की छवि को उजागर करता है, जो पहलगाम में अपने पति के बगल में घुटनों के बल बैठी और रो रही है. यही कारण है कि ऑपरेशन सिंदूर जरूरी था. उन्होंने कहा कि तथ्य यह है कि सिंदूर खून से लाल है, यह भी एक संदेश देता है.

शशि थरूर ने कहा कि भारत सरकार की ओर से ऑपरेशन सिंदूर पर की गई प्रेस ब्रीफिंग को पाकिस्तान और दुनिया के लिए संदेश है. विदेश सचिव विक्रांत मिसरी, कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की मौजूदगी ने साबित कर दिया कि यह लड़ाई हिंदू-मुस्लिम नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की एकता है. उन्होंने कहा कि हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर पाकिस्तान उकसाएगा तो भारत तैयार है. भारत ने पहलगाम हमले के 15 दिन बाद मंगलवार आधी रात पाकिस्तान और PoK में एयर स्ट्राइक की. इसमें 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है. भारत ने 26 बेकसूर नागरिकों की मौत का बदला लेने के लिए सटीक कार्रवाई की.

आतंकियों के खिलाफ एक्शन था

थरूर यह भी बताने में जुटे हैं कि भारत की कार्रवाई आतंकियों के खिलाफ थी न की पाकिस्तान के खिलाफ. उन्होंने कहा कि भारत ने पहलगाम हमले का जवाब सोच-समझकर और सीमित तरीके से दिया है, हमने आतंकी ठिकानों को रात में निशाना बनाया ताकि किसी आम नागरिक की जान न जाए. टारगेट सिर्फ आतंकी अड्डे थे, न कि पाक सेना या सरकारी संस्थान. यह एक ‘कैलिब्रेटेड रिस्पॉन्स’ था. ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए गए हैं, वो पूरी तरह से आवश्यक और सटीक थे. इन हमलों में जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित मुख्यालय और लश्कर-ए-तैयबा के मुरिदके स्थित बेस को निशाना बनाया गया.

कांग्रेस सांसद शशि ने कहा कि भारत का इरादा इस मामले को युद्ध तक ले जाने का नहीं है, ‘हमने पाकिस्तानी सेना या सरकार के प्रतिष्ठानों पर हमला नहीं किया, जबकि हमें पता है कि इस हमले के पीछे वही हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि हम युद्ध नहीं चाहते.’ थरूर ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर दोनों देशों में युद्ध हुआ तो उनकी सेना चार दिन भी नहीं टिक पाएगी और युद्ध खत्म हो जाएगा. यदि भारत के नागरिकों, सैन्य प्रतिष्ठानों और सरकारी संस्थानों पर हमला होता है, तो देश उसकी कड़ी प्रतिक्रिया देने से पीछे नहीं हटेगा. इस तरह से थरूर दुनिया को ये बताने में जुटे हैं कि भारत ने पाकिस्तान के सैन्य या फिर नागरिकों को निशाना नहीं बनाया बल्कि आतंकी ठिकाने के बनाया है, जहां से भारत के खिलाफ साजिश रची जाती है.

चीन को भी थरूर ने दी नसीहत

पाकिस्तान के हमदर्द चीन को भी शशि थरूर ने सियासी संदेश देते नजर आए हैं. उन्होंने कहा कि चीन ने इस बार पाकिस्तान का खुलकर साथ नहीं दिया. थरूर ने कहा कि आज के समय में भारत का बाजार चीन के लिए ज्यादा जरूरी है खासकर तब, जब दुनिया में अमेरिका जैसे देश ज्यादा टैक्स लगा रहे हैं. थरूर ने चीन के बारे में बात करते हुए कहा कि हैरानी की बात है कि चीन ने पाकिस्तान का उतना साथ नहीं दिया, जितना पहले देता था. चीन इस बात को बखूबी समझ रहा है कि उसे क्या करना चाहिए?

थरूर कहते हैं कि चीन ने जो कहा है, उससे पता चलता है कि वह भारत के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाना चाहता है. चीन को भारत की जरूरत है, जितनी पहले कभी नहीं थी. युद्ध की स्थिति में चीन मेरे विचार में एक रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाएगा. इस तरह से थरूर जो कुछ कह रहे हैं, उससे लग रहा है कि इस बार भारत से पंगा लेकर पाकिस्तान ने अपने एक और भरोसेमंद मित्र से दूरी बढ़ा ली है. चीन का रुख खुलकर सामने नहीं आया है. ऐसे थरूर ने जरूर चीन को संदेश दे दिया है कि उनके लिए भारत और पाकिस्तान में किसका साथ बेहतर रहेगा.

थरूर ने चला कूटनीतिक दांव

शशि थरूर नेता से पहले डिप्लोमेट रह चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. इसके अलावा यूपीए सरकार में विदेश राज्य मंत्री रहे हैं. थरूर को कूटनीतिक दांव बखूबी आता है. पाकिस्तान के खिलाफ शशि थरूर इन दिनों कूटनीतिक दांव चल रहे हैं. यही वजह है कि उन्होंने भारत-चीन तनाव के बीच कहा कि सभी देश संयम बरते. यह सामान्य बात है. थरूर ने कोई भी नहीं चाहता कि दो परमाणु शक्ति वाले देशों के बीच युद्ध हो.

थरूर ने कहा कि रूस, फ्रांस और इजराइल ही ऐसे देश हैं, जिन्होंने खुलकर भारत के आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार को समझा है. अमेरिका को भी कुछ कहना चाहिए था, क्योंकि 9/11 के बाद उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ सबसे कड़ी प्रतिक्रिया दी थी उन्होंने कहा है कि देश पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू करने की मंशा नहीं रखता है, लेकिन पाकिस्तान के हर एग्रेशन का जवाब दिया जाएगा. थरूर ने कहा कि हम जिम्मेदार देश हैं, युद्ध हमारी प्राथमिकता नहीं है, लेकिन आत्मरक्षा में हम कभी पीछे नहीं हटेंगे.

राष्ट्रवादी चेहरा बनकर उभरे ओवैसी

वहीं, मुस्लिम सियासत के चेहरा माने जाने वाले असदुद्दीन ओवैसी सार्वजनिक मंचों पर सिर पर इस्लामिक टोपी पहने नजर आते हैं, लेकिन इन दिनों तिरंगा पगड़ी बांधकर पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, मुस्लिम परस्त दायरे से खुद को बाहर निकलकर ओवैसी एक ‘राष्ट्रवादी नेता’ और देश की मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं. पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ ओवैसी ने केंद्र सरकार के स्टैंड का दिल खोलकर समर्थन किया. उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन करने के लिए लताड़ा और पाकिस्तान से PoK को वापस लेने की अपील भी कर रहे हैं.

असदु्द्दीन ओवैसी ने कहा, ‘अब पाकिस्तान को समझाने का समय नहीं है,अब उसे करारा जवाब देने का वक्त आ गया है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद उन्होंने देश की आर्मी को सेल्यूट करते हुए कहा कि मैं हमारी रक्षा सेनाओं द्वारा पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर किए गए लक्षित हमलों का स्वागत करता हूं.पाकिस्तानी डीप स्टेट को ऐसी सख्त सीख दी जानी चाहिए कि फिर कभी दूसरा पहलगाम न हो.पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर देना चाहिए. जय हिंदू. ऑपरेशन सिंदूर के दिन ओवैसी कश्मीर में थे और उन्होंने वहीं से पाकिस्तान मुर्दाबाद और हिंदुस्तान जिंदाबाद का नारा बुलंद करते नजर आए. इस तरह ओवैसी पाकिस्तानियों को उन्हीं के भाषा में करारा जवाब दे रहे हैं.

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