Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal Politics: टीएमसी छोड़ने के बाद कोयल मल्लिक को मिला बड़ा राजनीतिक तोहफा, बीजेपी ने दिया राज... दिल्ली में वायु प्रदूषण के खिलाफ सख्ती: ‘ऑपरेशन क्लीन एयर’ के तहत CAQM ने रिंग रोड पर चलाया विशेष नि... मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली में घमासान: इंडिया गेट पर AAP का विरोध मार्च, सौरभ भ... Amritsar Border Security: अमृतसर में पाकिस्तान के आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, एके-47 और हैंड ग्रेनेड ... Delhi VIP Theft News: राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल के सरकारी आवास में चोरी, गटर का ढक्कन... मुजफ्फरपुर में पुलिस की शर्मनाक करतूत: अंतरजातीय विवाह से जुड़ी समस्या को लेकर पहुंची महिला को बाल प... Delhi High Court Notice: करोल बाग में मेट्रो निर्माण के लिए पेड़ काटने पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, DDA ... पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) का ऐलान: सीएम शुभेंदु अधिकारी ने मांगे 6 महीने, 'लव जिहाद'... Seoni Murder Case: मध्य प्रदेश के सिवनी में सनसनीखेज हत्याकांड, मां और मामा ने मिलकर की 22 वर्षीय यु... विपक्ष की रैली पर आशीष शेलार का तीखा हमला: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन को बताया ‘लोमड़ियों ...

महाराष्ट्र कार्य संचालन नियम 2026 संशोधित: CM किसी भी विभाग से मंगा सकेंगे फाइलें, मुख्य सचिव को भी मिले अधिकार

14

मुंबई (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र सरकार ने शासन के कामकाज और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े नियमों में बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा ‘महाराष्ट्र शासन कार्य संचालन नियम, 2026’ में संशोधन की अधिसूचना जारी की गई है। नए नियमों के तहत अब व्यापक जनहित और सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में मुख्यमंत्री किसी भी मंत्री के फैसले को संशोधित या पूर्णतः रद्द कर सकते हैं। हालांकि, अर्ध-न्यायिक (Quasi-Judicial) प्रकृति के मामलों में मुख्यमंत्री को यह अधिकार प्राप्त नहीं होगा। इसके साथ ही, यदि मुख्यमंत्री किसी मंत्री के फैसले में कोई फेरबदल करते हैं, तो उन्हें उसका ठोस कारण अनिवार्य रूप से लिखित में दर्ज करना होगा।

📁 CM किसी भी विभाग से मंगा सकेंगे फाइलें, मुख्य सचिव को भी मिले नए प्रशासनिक अधिकार

प्रशासनिक नियंत्रण और पारदर्शिता को सुदृढ़ करने के लिए नए दिशा-निर्देश तय किए गए हैं:

  • फाइलें तलब करने का अधिकार: नए प्रावधानों के अनुसार, मुख्यमंत्री राज्य के किसी भी विभाग से संबंधित फाइल, प्रस्ताव या जरूरी दस्तावेज सीधे तलब कर सकते हैं।

  • अधिकारियों की जवाबदेही: संबंधित विभाग के मंत्री और सचिव को मुख्यमंत्री द्वारा मांगी गई फाइलें व दस्तावेज अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने होंगे।

  • मुख्य सचिव की शक्तियां: इसी तर्ज पर मुख्य सचिव को भी विभागों के प्रशासनिक सचिवों से आवश्यक जानकारी व रिकॉर्ड मांगने का अधिकार दिया गया है।

  • नियमों पर भ्रम की स्थिति: किसी भी सरकारी नियम या आदेश की व्याख्या को लेकर गतिरोध अथवा असमंजस की स्थिति उत्पन्न होने पर अंतिम निर्णय हेतु मामला मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

💰 वित्तीय और नीतिगत निर्णयों पर नई व्यवस्था, वित्त व विधि विभाग की मंजूरी अनिवार्य

वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और नीतिगत विसंगतियों को रोकने के लिए कई शर्तें लागू की गई हैं:

  • वित्त विभाग की पूर्व अनुमति: सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक दायित्व डालने वाले या राज्य के राजस्व में किसी भी प्रकार की छूट देने वाले निर्णयों के लिए वित्त विभाग की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी।

  • संसाधनों का आवंटन: भूमि, राजस्व, खनिज और वन अधिकारों से जुड़े मामलों में छूट, लीज (Lease) या लाइसेंस जारी करते समय तय प्रशासनिक प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करना होगा।

  • कानूनी समीक्षा: कोई नया कानून बनाने, मौजूदा अधिनियम में संशोधन करने अथवा नई नियमावली लागू करने से पूर्व उसका पूरा ड्राफ्ट (मसौदा) जांच हेतु विधि एवं न्याय विभाग को भेजना होगा।

⚠️ केंद्र अथवा अंतरराज्यीय विवाद की आशंका पर तुरंत देनी होगी जानकारी

प्रशासनिक समन्वय और अंतरराज्यीय संबंधों के मद्देनजर विशेष सुरक्षा उपाय किए गए हैं:

  • राज्यपाल व मुख्यमंत्री को सूचना: ऐसे किसी भी नीतिगत फैसले से, जिससे केंद्र सरकार या किसी अन्य राज्य सरकार के साथ विवाद की स्थिति बनने की आशंका हो, उसकी जानकारी मुख्यमंत्री और राज्यपाल को अविलंब देनी होगी।

  • अधिकार प्राप्त समितियां: नीतिगत व त्वरित फैसलों के क्रियान्वयन के लिए सरकार आवश्यकतानुसार मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव की अध्यक्षता में विशेष अधिकार प्राप्त उच्चस्तरीय समितियां भी गठित कर सकेगी।

⚖️ 2022 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद नियमों को किया गया स्पष्ट

मुख्यमंत्री और मंत्रियों के अधिकार क्षेत्र को लेकर पूर्व में उत्पन्न हुए कानूनी विवाद के समाधान के रूप में यह संशोधन देखा जा रहा है:

  • नागपुर पीठ का फैसला: वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा चंद्रपुर जिला मध्यवर्ती बैंक की भर्ती से जुड़े निर्णय में हस्तक्षेप पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने आपत्ति जताई थी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि प्रचलित नियमों के तहत मुख्यमंत्री को विभागीय मंत्री के फैसले को सीधे बदलने का अधिकार नहीं है।

  • कानूनी स्पष्टता: उक्त अदालती टिप्पणी के बाद नियमों में विधिक संशोधन कर मुख्यमंत्री के अधिकारों के दायरे को पूरी तरह स्पष्ट और संहिताबद्ध कर दिया गया है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.