Delhi High Court Notice: करोल बाग में मेट्रो निर्माण के लिए पेड़ काटने पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, DDA और DMRC को नोटिस जारी
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के करोल बाग इलाके में मेट्रो निर्माण कार्य के दौरान कथित तौर पर बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाने और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
अदालत ने इस गंभीर विषय पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को आधिकारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
यह कार्रवाई मेट्रो निर्माण कार्यों की वजह से हो रहे पर्यावरणीय नुकसान से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई है। अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है।
🏛️ याचिकाकर्ता की दलील: आंखें बंद नहीं कर सकते, केवल जरूरत भर के पेड़ ही हटाए जाएं
न्यायालय में हुई सुनवाई और तर्कों के मुख्य बिंदु:
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याचिकाकर्ता का पक्ष: दिल्ली हाईकोर्ट में यह याचिका अधिवक्ता अर्पित भार्गव द्वारा दाखिल की गई थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की अदालत में हुई।
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अदालत की नाराजगी: सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने पेड़ों को नुकसान पहुँचाए जाने और पर्यावरण की अनदेखी पर गहरी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए साफ कहा कि वह इस मामले में अपनी आँखें बंद नहीं कर सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मेट्रो निर्माण के लिए केवल उतने ही पेड़ों को हटाया जाना चाहिए, जितना बेहद जरूरी हो।
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धूल और प्रदूषण की समस्या: याचिकाकर्ता ने दलील दी कि करोल बाग के देशबंधु गुप्ता मार्ग स्थित उनके आवास के पीछे DDA की खाली जमीन पर DMRC द्वारा बड़े स्तर पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इस जमीन पर कई पुराने और विशाल पेड़ मौजूद हैं, जिन्हें निर्माण गतिविधियों के कारण गंभीर क्षति पहुँच रही है। साथ ही, भारी मशीनों और उपकरणों के कारण उड़ने वाली धूल से आसपास का पर्यावरण भी दूषित हो रहा है।
📅 भूमिगत निर्माण के दौरान कटे पुराने पीपल के पेड़: दो दिन बाद अगली सुनवाई
मामले की अग्रिम स्थिति और विवरण:
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निर्माण कार्य का असर: याचिका में बताया गया कि भूमिगत (Underground) निर्माण के लिए बनाई जा रही दीवारों के चक्कर में कई पेड़ों को काट दिया गया है और अन्यों को नुकसान पहुँचाया गया है। इसमें कई दशक पुराने पीपल के पेड़ भी शामिल हैं।
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पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता: कोर्ट ने कड़े शब्दों में दोहराया है कि विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण का भारी नुकसान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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सुनवाई की तारीख: अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है, जिसमें सभी पक्षों को अपना जवाब पेश करना होगा।
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