नई दिल्ली: पंचांग के अनुसार इस वर्ष दीपावली का पावन त्योहार 8 नवंबर 2026, रविवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। सनातन धर्म में दीपोत्सव का यह पर्व बेहद खास और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों की विशेष रूप से साफ-सफाई करते हैं, दीप जलाते हैं और चारों तरफ रंग-बिरंगी रोशनी से अपने आशियानों को सजाते हैं। दिवाली की शाम प्रदोष काल के दौरान धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी तथा विघ्नहर्ता भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से घर-परिवार में माता लक्ष्मी का वास होता है और जीवन भर सुख-समृद्धि व खुशहाली बनी रहती है।
बाजार से मूर्ति खरीदने से पहले रखें कुछ खास बातों का ध्यान, शास्त्रों में बताए गए हैं लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा से जुड़े कई नियम
दीपावली के इस पावन पर्व पर लोग बाजार से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्तियां खरीदकर अपने घर लाते हैं। यदि आप भी इस दीपोत्सव पर नई प्रतिमा खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति के चयन से लेकर उसकी स्थापना तक के कुछ निश्चित नियम तय किए गए हैं। आइए जानते हैं कि दिवाली के मौके पर कैसी मूर्ति खरीदना सबसे अधिक शुभ माना जाता है और किन गलतियों से बचना चाहिए।
कैसी होनी चाहिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति? जानिए चयन से जुड़े 6 मुख्य नियम
बाजार से मूर्ति खरीदते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके:
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अलग-अलग मूर्तियां खरीदें: मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं कभी भी आपस में जुड़ी हुई नहीं होनी चाहिए। इन्हें हमेशा अलग-अलग ही खरीदना शुभ माना जाता है।
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बैठी हुई मुद्रा हो: दोनों की प्रतिमाएं हमेशा शांत और बैठी हुई मुद्रा में होनी चाहिए। कभी भी खड़े हुए स्वरूप की मूर्तियां खरीदकर घर न लाएं।
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मिट्टी या धातु की मूर्ति चुनें: पूजा के लिए शुद्ध मिट्टी या फिर धातु (जैसे सोना, चांदी या पीतल) से बनी मूर्ति लाना सबसे उत्तम होता है। प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) या सीमेंट की बनी मूर्तियों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
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गणेश जी का स्वरूप: भगवान गणेश की सूंड हमेशा बाईं तरफ मुड़ी हुई होनी चाहिए। उनके हाथ में मोदक और उनके पास उनका वाहन मूषक (चूहा) अवश्य होना चाहिए।
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मां लक्ष्मी का स्वरूप: माता लक्ष्मी कमल के आसन पर विराजमान होनी चाहिए और उनके हाथों से धन की वर्षा या आशीर्वाद देने की मुद्रा प्रदर्शित होनी चाहिए। उन्हें कभी भी उल्लू पर सवार अवस्था में नहीं खरीदना चाहिए।
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खंडित मूर्ति न लाएं: घर के मंदिर के लिए लाई जाने वाली मूर्ति कहीं से भी टूटी या खंडित नहीं होनी चाहिए। हमेशा पूर्ण, साफ-सुथरी और अखंडित प्रतिमा का ही चयन करें।
घर के मंदिर में लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति की स्थापना के सही नियम और दिशा
दिवाली पर केवल सही मूर्ति खरीदना ही काफी नहीं है, बल्कि उसकी उचित स्थान पर स्थापना करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए कुछ खास दिशा-निर्देश तय किए गए हैं:
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सही स्थान: माता लक्ष्मी को हमेशा भगवान गणेश के दाहिने हाथ की तरफ यानी सामने से देखने पर आपके बाएं हाथ की तरफ स्थापित करना चाहिए।
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सही दिशा: पूजा के दौरान मूर्ति का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा की ओर होना चाहिए।
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वाहन की उपस्थिति: गणेश जी के साथ उनका वाहन मूषक और मां लक्ष्मी के साथ उल्लू या हाथी का होना बेहद शुभ माना जाता है।
घर में पहले से रखी पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का क्या करें? जानें निस्तारण का सही तरीका
यदि आप इस दीपावली पर नई मूर्तियां खरीद रहे हैं और आपके घर में पहले से ही पुरानी मूर्तियां रखी हैं, तो उनके विसर्जन या उपयोग को लेकर भी नियमों का पालन करना चाहिए:
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अगर आपके पास मिट्टी की पुरानी मूर्ति है, तो उसे किसी भी पवित्र नदी या साफ जल स्रोत में ससम्मान विसर्जन कर दें।
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यदि आसपास कोई नदी उपलब्ध न हो, तो घर में ही किसी बड़े बर्तन या बाल्टी के शुद्ध पानी में उस मूर्ति को गला दें और उस पवित्र जल को अपने घर के किसी पौधे या गमले में डाल दें।
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यदि पुरानी मूर्तियां धातु (जैसे चांदी या पीतल) की बनी हुई हैं, तो उन्हें अच्छी तरह से गंगाजल से साफ करके दोबारा आगामी पूजा-पाठ में उपयोग किया जा सकता है।
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