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आज है धनतेरस, शाम के इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा— घर आएगी बरकत

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नई दिल्ली: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी धनतेरस का पावन पर्व आज 6 नवंबर 2026 को पूरे देश में अटूट श्रद्धा, उल्लास और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इस अत्यंत खास और पवित्र दिन पर आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, धन की देवी माता लक्ष्मी और धन के संरक्षक भगवान कुबेर की विधि-विधान से पूजा करने का बहुत बड़ा विधान माना गया है। ऐसी गहरी मान्यता है कि इस विशेष अवसर पर यदि पूरी सच्ची निष्ठा से पूजा-अर्चना की जाए, तो घर-परिवार में सुख-समृद्धि और बरकत हमेशा के लिए बनी रहती है। हर गृहस्थ की इच्छा होती है कि उसके घर में कभी भी धन-धान्य और अन्न का अभाव न हो, और इसके लिए लोग कई दिन पहले से तैयारियां शुरू कर देते हैं। आइए जानते हैं कि इस पावन अवसर पर आपको पूजा की तैयारी किस प्रकार करनी चाहिए और इसका सही व सटीक तरीका क्या है।

धनतेरस 2026 का शुभ मुहूर्त और पूजा का समय— जानिए प्रदोष काल और वृषभ काल की सही अवधि

पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार धनतेरस के दिन पूजा के लिए मिलने वाला शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:

  • धनतेरस पूजा तिथि: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

  • धनतेरस पूजा का मुख्य मुहूर्त: शाम 06:02 बजे से लेकर 07:57 बजे तक

  • कुल पूजा अवधि: 01 घंटा 56 मिनट

  • प्रदोष काल का समय: शाम 05:32 बजे से 08:09 बजे तक

  • वृषभ काल का समय: शाम 06:02 बजे से 07:57 बजे तक

भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर जी का पूजन विधान— नकारात्मक ऊर्जा होती है दूर और पवित्र बनता है घर का वातावरण

संध्या के समय मुख्य दीपक प्रज्वलित करने के बाद आपको प्रथम पूज्य भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, स्वास्थ्य के प्रणेता धन्वंतरि जी और धन के देवता कुबेर जी का पूजन पूरे मन से आरंभ करना चाहिए। इन सभी प्रमुख देवी-देवताओं का स्मरण करने से घर की सारी नकारात्मक और दूषित ऊर्जा स्वतः दूर हो जाती है और आसपास का पूरा वातावरण अत्यधिक पवित्र व सकारात्मक बन जाता है। इसके पश्चात आपको पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान को ताजे फूल, मीठी मिठाई और मौसमी फल अर्पित करने चाहिए, जो किसी भी अनुष्ठान का सबसे अहम हिस्सा माने जाते हैं। जब आप अपनी पूर्ण आस्था के साथ इन सभी पवित्र वस्तुओं को अर्पित करते हैं, तो ईश्वर आपकी हर मनोकामना को बहुत शीघ्र पूर्ण करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को बिना किसी जल्दबाजी के शांत भाव से संपन्न करना चाहिए।

पूजा के लिए जरूरी सामग्री और सही तैयारी— बिना किसी बाधा के ऐसे करें अनुष्ठान की संपूर्ण व्यवस्था

  • सामग्री का संकलन: इस खास दिन पर पूजा में काम आने वाली सभी आवश्यक सामग्री पहले से ही एकत्र करके व्यवस्थित रखनी चाहिए ताकि विधि-विधान के दौरान किसी भी प्रकार की रुकावट न आए।

  • पवित्र वस्तुओं का संयोजन: पूजन के लिए शुद्ध घी का दीपक, ताजे फूल, रोली, अक्षत (चावल), मिष्ठान, फल और धूप-बत्ती जैसी सभी पवित्र चीजों को एक जगह सजाकर रखें।

  • स्थान की स्वच्छता: सबसे पहले अपने घर के मुख्य पूजा स्थल की अच्छी तरह से साफ-सफाई करें और वहां पर पवित्र जल का छिड़काव करने के बाद सुंदर घी का दीपक प्रज्वलित करें।

धनतेरस की सरल और संपूर्ण पूजा विधि— चरणबद्ध तरीके से ऐसे करें देवताओं का आह्वान और आरती

  • दीपक जलाना और शुद्धि: सबसे पहले पूजा स्थल को स्वच्छ करें और वहां पर घी या तेल का दीपक जलाकर प्रकाश करें।

  • देवताओं का आह्वान: भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, धन्वंतरि जी और कुबेर जी का मन में ध्यान करते हुए उनका सादर आह्वान करें।

  • तिलक और वस्त्र अर्पण: सभी देवी-देवताओं को शुद्ध जल छिड़कने के बाद रोली और अक्षत से तिलक करें तथा वस्त्र के रूप में कलावा या मौली अर्पित करें।

  • पुष्प और भोग का अर्पण: भगवान को ताजे सुगंधित फूल, धूप, फल और अपनी सामर्थ्य अनुसार मिठाई का भोग पूरी श्रद्धा से लगाएं।

  • कथा और आरती: पूजा के दौरान धनतेरस की पौराणिक कथा का पाठ या श्रवण करें और अंत में सभी देवी-देवताओं की कपूर या घी के दीपक से आरती उतारकर पूजा संपन्न करें।

  • मुख्य द्वार पर दीपक रखना: रात्रि के समय अपने घर के मुख्य द्वार पर यमराज के निमित्त एक मुखी या चार मुखी दीपक जलाकर अवश्य रखना चाहिए।

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