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दिल्ली में दिवाली से पहले ही हवा हुई बेहद जहरीली, कई इलाकों में एक्यूआई 450 के पार— गंभीर श्रेणी में पहुंचा प्रदूषण

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नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में जैसे-जैसे मौसम में हल्की ठंड ने अपनी दस्तक देनी शुरू की है, वैसे-वैसे यहाँ के लोगों की सांसों पर प्रदूषण का बड़ा संकट गहराने लगा है। इस बार दीपावली का त्योहार आने से पहले ही दिल्ली की हवा में जहर इस कदर घुल चुका है कि यहाँ सांस लेना भी दूभर हो गया है। आज सुबह जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी के पंजाबी बाग इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) रिकॉर्ड 466 दर्ज किया गया है। इसके अलावा पड़पड़गंज में एक्यूआई 423 और पूसा अनुसंधान केंद्र में 420 के स्तर पर बना हुआ है, जो सीधे तौर पर ‘गंभीर’ श्रेणी को दर्शाता है।

समीर ऐप के विभिन्न आंकड़ों के अनुसार रोहिणी, आरके पुरम और आईआईटी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर पहुंचा चरम पर

सरकारी समीर ऐप से प्राप्त विस्तृत आंकड़ों के अनुसार, राजधानी के तमाम हिस्सों में प्रदूषण ने खतरनाक रूप ले लिया है। रोहिणी में एक्यूआई बढ़कर 476, आईआईटी दिल्ली में 473, जहांगीरपुरी में 460, आरके पुरम में 446, मुद्रिका में 441, विवेक विहार में 439, नरेला और सोनिया विहार में 438, ओखला फेज-2 व सिरीफोर्ट में 431, बवाना में 430 तथा नॉर्थ कैंपस (DU) में 429 एक्यूआई दर्ज किया गया है। इसके अलावा मंदिर मार्ग, पटपड़गंज, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम और आईटीओ जैसे प्रमुख स्थानों पर भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है।

राजधानी के अन्य क्षेत्रों में भी हालात बेहद चिंताजनक, नांगलोई, द्वारका और नजफगढ़ में भी छाई जहरीली धुंध की मोटी चादर

केवल मुख्य इलाके ही नहीं, बल्कि दिल्ली के अन्य हिस्सों में भी प्रदूषण का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। नांगलोई में 360, नजफगढ़ में 417, नेहरू नगर में 361, द्वारका सेक्टर-8 में 418, अलीपुर में 438, बुराड़ी में 376, आया नगर में 395, चांदनी चौक में 394 और आईजीआई एयरपोर्ट इलाके में एक्यूआई 386 दर्ज किया गया है। शहर के लगभग अधिकांश हिस्सों में एक्यूआई का स्तर 350 से 450 के खतरनाक दायरे के भीतर घूम रहा है, जिसके कारण सुबह और शाम के वक्त आसमान में स्मॉग (धुंध) की एक मोटी चादर साफ तौर पर देखी जा सकती है।

तमाम प्रशासनिक पाबंदियों के बावजूद हवा की गुणवत्ता में नहीं आ रहा कोई सुधार, दीपावली तक ऐसे ही हालात रहने की आशंका

राजधानी में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए वर्तमान में ‘ग्रेप-2’ (GRAP-2) की सख्त पाबंदियां लागू की जा चुकी हैं, इसके बावजूद तमाम प्रशासनिक प्रयासों का जमीनी स्तर पर कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है। पर्यावरणविदों और मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में दीपावली के पर्व तक दिल्ली की आबोहवा कमोबेश ऐसी ही जहरीली बनी रह सकती है। बीते गुरुवार को भी दिल्ली का पूरा इलाका भारी प्रदूषण की चपेट में रहा था और हवा की गुणवत्ता बेहद दयनीय स्थिति में दर्ज की गई थी।

5 नवंबर से 20 नवंबर तक निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर पूरी तरह रोक, शहर में विकास परियोजनाओं की रफ्तार हुई धीमी

बिगड़ते पर्यावरण और हवा के खतरनाक स्तर को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार और संबंधित प्राधिकरणों ने गत 5 नवंबर से लेकर आगामी 20 नवंबर तक सभी प्रकार के निर्माण और तोड़फोड़ (Construction & Demolition) कार्यों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। इस कड़े प्रतिबंध के चलते आने वाले दिनों में राजधानी के बुनियादी ढांचे और विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों की रफ्तार पर अस्थायी असर पड़ना तय माना जा रहा है। हालांकि, मौजूदा समय में दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस प्रकार की सख्त पाबंदियां लागू करना बेहद अनिवार्य हो गया है।

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