रांचीः शारदीय नवरात्रि की महासप्तमी पर शुक्रवार को रांची के डोरंडा स्थित झारखंड सशस्त्र पुलिस-1 (जैप-1) परिसर में ऐतिहासिक फूलपाती शोभायात्रा निकाली गई। करीब 146 साल पुरानी इस परंपरा में गोरखा जवानों के परिवार बड़ी संख्या में शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएं, पुरुष और बच्चे नाचते-गाते शोभायात्रा में हिस्सा लिया।
पारंपरिक लोकगीतों और नृत्य के बीच निकाली गई इस शोभायात्रा में गोरखा समुदाय की समृद्ध संस्कृति और धार्मिक आस्था की झलक देखने को मिली। इस दौरान विधि-विधान से प्रकृति की पूजा की गई और परंपरा के अनुसार गोरखा जवानों ने फायरिंग कर मां दुर्गा को सलामी दी।
जैप-1 परिसर स्थित दुर्गा मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम में सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। फूलपाती शोभायात्रा गोरखा समुदाय की धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर साल महासप्तमी के अवसर पर इस परंपरा का निर्वहन किया जाता है। खास बात यह है कि यहां दुर्गा पूजा में मां की प्रतिमा की बजाय कलश को देवी का स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना की जाती है।
💃 नाचते-गाते शोभायात्रा में शामिल हुए गोरखा परिवार, जीवंत हुई सांस्कृतिक विरासत
फूलपाती शोभायात्रा में गोरखा जवानों के परिवारों की भागीदारी ने आयोजन को खास बना दिया। महिलाएं और पुरुष पारंपरिक परिधानों में नजर आए, जबकि बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। पारंपरिक गीत-संगीत और लोकनृत्य के बीच लोगों ने अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत किया। रांची में शोभायात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गोरखा समुदाय के लोगों के एकजुट होने और अपनी विरासत को संजोने का अवसर भी है।
🌿 1880 से निभाई जा रही है फूलपाती की परंपरा और नौ प्रकार की वनस्पतियों की पूजा
जैप-1 परिसर में दुर्गा पूजा की शुरुआत वर्ष 1880 में हुई थी। तभी से यहां गोरखा समुदाय की परंपरा के अनुसार शक्ति पूजा और फूलपाती शोभायात्रा निकाली जाती है। महासप्तमी के दिन फूलपाती के तहत नौ प्रकार की पवित्र वनस्पतियों की पूजा की जाती है। इनमें केला, गन्ना, बेलपत्र और हल्दी सहित अन्य पौधों की पत्तियां और टहनियां शामिल होती हैं। इन्हें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। विधि-विधान से पूजा के बाद फूलपाती को मंदिर के पूजा स्थल तक लाया जाता है।
🔫 फायरिंग कर मां दुर्गा को दी गई सलामी, प्रतिमा की बजाय होती है कलश की पूजा
जैप-1 की फूलपाती परंपरा की एक प्रमुख विशेषता गोरखा जवानों की ओर से दी जाने वाली सैन्य सलामी है। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान जवानों ने परंपरा के अनुसार फायरिंग कर मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। इस आयोजन में शक्ति पूजा के साथ गोरखा जवानों की सैन्य परंपरा और अनुशासन की झलक भी देखने को मिलती है। गोरखा समुदाय में मां दुर्गा को शक्ति की देवी के रूप में पूजा जाता है। जवान मां से अपनी, अपने परिवार और देश की रक्षा की कामना करते हैं। शस्त्रों की पूजा भी इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आमतौर पर दुर्गा पूजा के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है, लेकिन जैप-1 परिसर में परंपरा कुछ अलग है। यहां मां दुर्गा को कलश के स्वरूप में स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के दौरान पूरे विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
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