Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
गुजारा भत्ता नहीं देने पर बार-बार जेल भेजना कानूनी रूप से सही नहीं, हाईकोर्ट का फैसला देवघर में सप्तमी पर खुले पूजा पंडालों के पट, सुरक्षा को लेकर पुलिस अलर्ट Ramgarh Durga Puja 2026: रामगढ़ के बरकाकाना में खुले मां दुर्गा के पट, सीसीएल महाप्रबंधक ने किया भव्... जमशेदपुर के इस पंडाल में जीवंत है बंगाल की पुरानी परंपरा, महिलाओं ने किया अद्भुत धुनुची नृत्य हजारीबाग में दुर्गा पूजा पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 100 से अधिक गुप्तचर तैनात; एसपी ने दी चेतावनी झारखंड के इन गांवों में शराब और गांजा पीने पर लगेगा 10,000 का जुर्माना, बेचने पर 50 हजार का प्रावधान बोकारो में विस्थापितों का उग्र प्रदर्शन, आठवें दिन सभी गेट जाम; विधायक श्वेता सिंह भी भूख हड़ताल पर रांची के जैप-1 परिसर में निकली 146 साल पुरानी ऐतिहासिक फूलपाती शोभायात्रा, गोरखा जवानों ने दी सलामी Katras Durga Puja 2026: धनबाद के कतरास में थाईलैंड के अरुण मंदिर जैसा भव्य पंडाल, शंख और सीप से की ग... पैतृक गांव नेमरा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूरे विधि-विधान से संपन्न किए मां के दशकर्म की रस्मे...

जमशेदपुर के इस पंडाल में जीवंत है बंगाल की पुरानी परंपरा, महिलाओं ने किया अद्भुत धुनुची नृत्य

1

जमशेदपुर: पश्चिम बंगाल का मां दुर्गा पूजा देश भर में प्रचलित है। जहां पुरानी परंपरा के अनुसार आज भी पूजा का आयोजन होता है। इस पूजा में धुनुची नृत्य का खास महत्व होता है। यह नृत्य ढाकी की धुन पर होता है। बंगाल के अलावा अन्य प्रदेश में भी इस अनोखी कला को महिला-पुरुष प्रस्तुत करते हैं। हालांकि वर्तमान समय में धुनुची नृत्य कम देखने को मिलता है।

जमशेदपुर में भी आज कई ऐसी पूजा कमिटी है, जिनके द्वारा आयोजित पूजा में महिलाएं इस पुरानी कला को बखूबी निभा रही हैं। बांग्ला समुदाय के लोग आज भी धुनुची नृत्य कर मां की आराधना करते हैं। जमशेदपुर के मिलानी दुर्गा पूजा कमिटी में महिलाएं बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं। पंडाल में मां की मूर्ति स्थापित होने बाद प्रतिदिन संध्या आरती के बाद महिलाएं धुनुची नृत्य करती हैं।

🔥 मिट्टी के धूपदान और कपूर के साथ होती है आराधना, मुंह में दबाकर भी करती हैं नृत्य

मिट्टी से बने धूपदान में नारियल के छिलके के साथ कपूर जलाया जाता है। इसके बाद महिलाएं धूपदान को हाथ में लेकर मां के समक्ष आरती करती हैं। इस दौरान धूपदान से धुआं निकलता है और उस धुएं से एक अलग अनुभूति का अहसास होता है। इस दौरान कई महिलाएं धूपदान को अपने मुंह में दबाकर भी नृत्य करती हैं। नंगे पैर और साधारण कपड़ों में महिलाओं की यह प्रस्तुति अद्भुत है। महिलाएं सामूहिक रूप से इस धुनुची नृत्य में शामिल होती हैं।

🌺 नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास, महिलाओं ने बताई अपने मन की भावनाएं

पूजा कमिटी के अध्यक्ष का कहना है कि यह कला पश्चिम बंगाल से शुरू हुई है और बंगाल में यह काफी प्रचलित है, लेकिन झारखंड में बांग्ला समुदाय इस कला को निभाने में पीछे नहीं है। हमारा प्रयास रहता है कि यह पुरानी अनोखी कला आने वाली पीढ़ी भी सीखे और समझे कि इसका महत्व क्या है। उनका कहना है कि आज भी कुछ पूजा पंडाल में धुनुची नृत्य की परंपरा निभाई जा रही है।

वहीं, महिलाओं का कहना है कि धुनुची नृत्य मां की आराधना का एक हिस्सा है। प्रीति लेखा बताती हैं कि आरती के बाद धुनुची नृत्य के जरिए हम मां की आराधना करते हैं और उनके प्रति अपने आपको समर्पित करते हैं। धुनुची नृत्य करते समय ऐसा लगता है कि हम मां के करीब हैं और मन को शांति मिलती है। महिलाओं द्वारा किया जाने वाला धुनुची नृत्य एक प्राचीन, सदियों पुरानी परंपरा है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.