झारखंड के इन गांवों में शराब और गांजा पीने पर लगेगा 10,000 का जुर्माना, बेचने पर 50 हजार का प्रावधान
रांची/चाईबासाः झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में नशामुक्त समाज बनाने की दिशा में ग्रामीणों ने सख्त पहल की है। ‘हो’ आदिवासी बहुल दो गांवों की ग्राम सभाओं ने शराब और गांजा के सेवन, बिक्री और देर शाम तक अड्डेबाजी पर भारी जुर्माना लगाने का फैसला किया है। कुछ दिन पूर्व दोनों ग्राम सभाओं द्वारा लिए गये इस निर्णय का असर अब दिखने लगा है। ग्रामीणों का मकसद युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना, अनावश्यक जमावड़े पर रोक लगाना और गांव में स्वस्थ व सुरक्षित माहौल तैयार करना है।
💰 सेवन करने से ज्यादा बेचने वाले पर भारी जुर्माना, बाईहातू गांव में दिखा असर
इसकी शुरुआत चाईबासा सदर प्रखंड के नरसंडा पंचायत के बाईहातू गांव में हुई थी। 29 सितंबर, 2026 को यहां की ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से फैसला लिया था कि शराब और गांजा का सेवन करने वालों पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, इन नशीले पदार्थों की बिक्री करते पकड़े जाने पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना देना होगा। इसके अलावा, समूह में बैठकर अड्डेबाजी करने वालों के लिए भी 10 हजार रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है। ग्रामीणों का मानना है कि आर्थिक दंड के जरिए नशे की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सकता है।
बाईहातू गांव के सामू पूर्ति ने ईटीवी भारत को बताया कि जुर्माने का फैसला असर दिखाने लगा है। गांव में चोरी-छुपे होने वाली शराब की बिक्री बंद हो गई है क्योंकि गांव में युवाओं की एक टीम इस पर नजर रखती है। उन्होंने बताया कि 29 सितंबर को फैसले के दिन से 17 अक्टूबर के बीच सिर्फ एक युवक को नशे की हालत में पकड़ा गया है, जिसे ग्रामसभा में 10 हजार का जुर्माना जमा करना पड़ा।
👶 बच्चों और युवाओं को नशे से बचाने के लिए बनाए गए कड़े नियम
बाईहातू गांव के निवासी और बड़ा गुंटिया पंचायत के मुखिया हरिचरण हेंब्रम ने ईटीवी भारत को बताया कि उनके गांव की पहल से प्रभावित होकर खूंटपानी प्रखंड के बानाबिज की ग्राम सभा ने भी नशामुक्ति के खिलाफ कदम उठाया। बानाबिज गांव में 13 अक्टूबर को जुर्माने के नियम को लागू करने का फैसला लिया गया। उनका कहना है कि नशे की वजह से घरों में होने वाले विवाद और आर्थिक परेशानियां ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय हैं।
खास बात है कि इन गांवों की ग्राम सभाओं ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी नियम तय किए हैं। रात सात बजे के बाद बच्चों के अनावश्यक रूप से बाहर घूमते पाए जाने पर उनके अभिभावकों के खिलाफ जुर्माने का प्रावधान किया गया है। गांवों में इन नियमों की जानकारी देने के लिए प्रवेश मार्गों पर सूचना बोर्ड भी लगाए गए हैं।
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