Kedarnath Route Landslide: चिरबासा के पास फंसे 1,500 तीर्थयात्रियों को SDRF और NDRF की टीमों ने सुरक्षित रेस्क्यू किया
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में मौसम की मार और भारी बर्फबारी के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। लगातार हो रही बारिश, खतरनाक लैंडस्लाइड (भूस्खलन) और भारी बर्फबारी के चलते विभिन्न ट्रेकिंग दलों के कुल 136 ट्रेकर्स अलग-अलग ऊंचाई वाले इलाकों में फंस गए हैं। इन सभी देश-विदेश के ट्रैकर्स और पोर्टर्स को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है और इसके लिए 5 विशेष हेलीकॉप्टरों को उत्तरकाशी में उतार दिया गया है। जिला प्रशासन, वन विभाग, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग की संयुक्त टीमें इस हाई-ऐल्टीट्यूड रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं।
⛺ कालिंदी पास और ऑडेन्स कोल पास बेस कैंप पर अटके हैं पर्वतारोही, प्रशासन कर रहा पुख्ता इंतजाम
बचाव टीमें देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए पर्वतारोहियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में दिन-रात एक कर रही हैं। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से रेस्क्यू किए गए लोगों के ठहरने, खाने-पीने और प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) के लिए उचित इंतजाम किए जा रहे हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कुल 136 पर्वतारोही, ट्रैकर्स और उनका सपोर्ट स्टाफ इस संकट में फंसा हुआ है। इन ऊंचाई वाले ट्रेकिंग अभियानों के तहत मुख्य रूप से कालिंदी पास बेस कैंप में मौजूद 18 सदस्य और ऑडेन्स कोल पास बेस कैंप में फंसे 29 सदस्य शामिल हैं।
🚶♂️ केदारनाथ रूट पर चिरबासा के पास फंसे 1,500 तीर्थयात्रियों को SDRF और NDRF ने सुरक्षित निकाला
दूसरी तरफ, अन्य पर्वतारोही और पर्यटक भी पूरी तरह सुरक्षित स्थानों पर रुके हुए हैं, जिन्हें आगे के ट्रेकिंग रूट पर जाने से रोक दिया गया है। जिला मजिस्ट्रेट इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं और लगातार कंट्रोल रूम से पल-पल का अपडेट ले रहे हैं। केदारनाथ पैदल मार्ग पर भी रविवार देर रात अचानक हुए भारी भूस्खलन के कारण चिरबासा के समीप लगभग 1,500 तीर्थयात्री फंस गए थे। सूचना मिलते ही SDRF, NDRF और DDRF की संयुक्त टीमों ने तत्परता दिखाते हुए एक बड़ा बचाव अभियान चलाया और सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित रेस्क्यू कर गौरीकुंड तक सकुशल पहुंचा दिया।
⛰️ गिरते पत्थरों और मलबे के बीच जान जोखिम में डालकर टीमों ने पूरा किया रेस्क्यू ऑपरेशन
बीती 27 सितंबर की देर रात रुद्रप्रयाग जिला कंट्रोल रूम (DCR) से सोनप्रयाग पुलिस को यह सूचना मिली थी कि गौरीकुंड से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित चिरबासा के पास पहाड़ी दरकने से रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है और कई तीर्थयात्री उस पार फंस गए हैं। इस सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए सब-इंस्पेक्टर आशीष डिमरी के नेतृत्व में SDRF की टीम फौरन घटनास्थल पर पहुंची। मौके पर पहुंचने पर टीम ने देखा कि चिरबासा हेलीपैड के पास भारी मलबा रास्ता रोके हुए था और पहाड़ी से लगातार बड़े-बड़े पत्थर नीचे गिर रहे थे, जिससे वहां एक कदम भी चलना मौत को दावत देने जैसा खतरनाक था।
🤝 आपसी तालमेल और बहादुरी से पूरा हुआ अभियान, सभी यात्री पहुंचे सुरक्षित स्थान
हालात की गंभीरता को देखते हुए SDRF, NDRF और DDRF के जवानों ने बिना एक पल गंवाए संयुक्त रूप से बचाव कार्य शुरू कर दिया। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाते हुए बचाव कर्मियों ने सभी लोगों को बेहद सावधानी के साथ उस भूस्खलन वाले खतरनाक जोन से पार निकाला। लगातार गिरते पत्थरों और जानलेवा भूस्खलन के खतरे के बावजूद जांबाज टीमों ने आपसी बेहतरीन तालमेल और साहस का परिचय देते हुए इस कठिन अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया और करीब 1,500 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित बचाकर गौरीकुंड की ओर पहुंचा दिया।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.