Divyanshi Yadav Case KGMU: डेंगू इलाज में लापरवाही और छात्राओं से जबरन ड्यूटी कराने के आरोपों पर घिरी यूनिवर्सिटी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में नर्सिंग स्टूडेंट्स का आक्रोश एक बार फिर भड़क उठा है और छात्र दोबारा धरने पर बैठ गए हैं। छात्रा दिव्यांशी यादव की संदेहास्पद मौत के बाद शुरू हुआ यह विवाद विश्वविद्यालय की कुलपति के आश्वासन के बाद कुछ समय के लिए शांत हुआ था, लेकिन अब स्टूडेंट्स का आरोप है कि इतने दिन बीत जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस और संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है। नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल के पहले ही इस्तीफा देने के बाद अब आंदोलनरत छात्र-छात्राओं ने कॉलेज के डीन के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई और इस्तीफे की हुंकार भर दी है।
📝 सिर्फ मौखिक आश्वासन नहीं, जिम्मेदार अधिकारियों से लिखित इस्तीफे की मांग पर अड़े छात्र
नुकसान और गुस्से से भरे स्टूडेंट्स का कहना है कि प्रशासन की तरफ से सिर्फ कोरे मौखिक आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं दिख रही है। इसलिए अब छात्र-छात्राएं केवल जुबानी वादों से संतुष्ट होने के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों से लिखित तौर पर इस्तीफा और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। दिव्यांशी यादव की अकाल मौत के बाद नर्सिंग स्टूडेंट्स ने कई दिनों तक लगातार उग्र प्रदर्शन किया था। करीब दो दिन चले उस लंबे आंदोलन के बाद केजीएमयू की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने खुद स्टूडेंट्स से सीधी बातचीत की थी और उनकी सभी जायज मांगों पर निष्पक्ष कार्रवाई करने का ठोस भरोसा दिलाया था, जिसके बाद छात्रों ने अपना धरना कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था।
🚨 प्रिंसिपल के बाद अब नर्सिंग डीन डॉ. अमिता पांडेय मिश्रा के खिलाफ भी खुला मोर्चा
दोबारा से धरना शुरू करने वाले छात्रों का कहना है कि उच्चाधिकारियों के वादों के विपरीत अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिसके कारण उन्हें फिर से मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। दिव्यांशी यादव की मौत के बाद हुए शुरुआती विरोध प्रदर्शन के दौरान नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल सूचना राय भौमिक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन छात्रों का साफ कहना है कि केवल प्रिंसिपल के इस्तीफे से इस गंभीर मामले की इतिश्री नहीं हो सकती। अब छात्र-छात्राएं कॉलेज की डीन डॉ. अमिता पांडेय मिश्रा के खिलाफ भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।
🌡️ क्या था पूरा मामला? बीएससी नर्सिंग छात्रा दिव्यांशी की इलाज के दौरान हुई थी मौत
छात्रों की मुख्य मांग है कि इस्तीफे की औपचारिकताएं केवल मौखिक रूप से स्वीकार करने के बजाय लिखित दस्तावेजों के रूप में पूरी की जाएं। यह पूरा विवाद बीएससी नर्सिंग द्वितीय वर्ष की मेधावी छात्रा दिव्यांशी यादव की बेहद दर्दनाक मौत के बाद शुरू हुआ था। साथी स्टूडेंट्स के अनुसार, दिव्यांशी को 11 सितंबर को तेज बुखार आया था, जिसके बाद उसे केजीएमयू की मेडिसिन ओपीडी में दिखाया गया था। छात्रों का गंभीर दावा है कि 16 सितंबर को उसकी डेंगू की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन की तरफ से उसे समय पर अस्पताल से छुट्टी नहीं दी गई और न ही उचित देखभाल की गई।
🏥 वाराणसी में इलाज के दौरान तोड़ा दम, केजीएमयू प्रशासन ने रखा अपना अलग पक्ष
इसके बाद 17 सितंबर को दिव्यांशी के माता-पिता उसे अपने साथ बेहतर इलाज के लिए वाराणसी लेकर चले गए, जहां उपचार के दौरान 19 सितंबर को दिव्यांशी की सांसें थम गईं और उसकी मौत हो गई। हालांकि, इस पूरे मामले में केजीएमयू विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्टूडेंट्स के सभी आरोपों पर अपना अलग पक्ष रखा गया है। विश्वविद्यालय के आधिकारिक प्रवक्ता का कहना है कि दिव्यांशी की बीमारी के दौरान उसकी तमाम जरूरी जांचें कराई गई थीं और उसका समुचित इलाज किया गया था। प्रशासन का दावा है कि इस पूरे प्रकरण की आंतरिक जांच अभी भी की जा रही है।
⚠️ अस्पताल में बीमार स्टूडेंट्स से भी जबरन वार्ड की ड्यूटी कराने के लगे गंभीर आरोप
दिव्यांशी की मौत के बाद छात्रों ने केवल एक छात्रा की मौत का मामला नहीं उठाया, बल्कि पूरे नर्सिंग हॉस्टल और वहां रहने वाले छात्र-छात्राओं की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था तथा सुरक्षा को लेकर भी विश्वविद्यालय प्रबंधन के सामने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स ने आरोप लगाया है कि हॉस्टल में रहने वाले कई बच्चे खुद गंभीर रूप से बीमार हैं, और इसके बावजूद उनसे जबरन वार्डों में लंबी और कठिन ड्यूटी कराई जा रही है। छात्रों का कहना है कि उनकी इन बुनियादी शिकायतों और समस्याओं को पहले भी कभी गंभीरता से नहीं सुना गया। इन्ही तमाम गंभीर आरोपों और लापरवाह कार्यशैली के खिलाफ अब छात्र न्याय मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
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