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दिग्विजय सिंह निकालेंगे ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’: उज्जैन से शुरू होकर ओरछा होते हुए अयोध्या पहुंचेगी पदयात्रा

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भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह अब एक बड़ी धार्मिक-सामाजिक पदयात्रा ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू करने जा रहे हैं।

यह यात्रा 20 अक्टूबर यानी विजयादशमी (दशहरा) के पावन पर्व से विधिवत प्रारंभ होगी। यात्रा का आरंभ बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन से होगा, जिसके बाद यह भगवान रामराजा सरकार की नगरी ओरछा होते हुए प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या धाम पहुंचकर संपन्न होगी। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया है कि यह आयोजन किसी भी प्रकार से दलगत राजनीति से प्रेरित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म के सत्य और श्रद्धा की रक्षा करना तथा समाज में आपसी सद्भाव और समरसता को सुदृढ़ बनाना है। यात्रा के विधिवत शुभारंभ से पूर्व उन्होंने एक डिजिटल गूगल फॉर्म जारी कर आम नागरिकों और श्रद्धालुओं से इस अभियान से जुड़ने की अपील की है।

🚩 900 किलोमीटर लंबा सफर और पंचरंगी ध्वज: ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ होगा यात्रा का मूल वाक्य

यात्रा का स्वरूप और ऐतिहासिक संदर्भ:

  • 900 किमी की दूरी: पूर्व मुख्यमंत्री की यह पदयात्रा लगभग 900 किलोमीटर की दूरी तय करेगी, जिसमें वे विभिन्न कस्बों और धार्मिक स्थलों से होकर गुजरेंगे।

  • पूर्व में की थी नर्मदा परिक्रमा: दिग्विजय सिंह के लिए यह पहला अवसर नहीं है जब वे इतनी लंबी पैदल यात्रा पर निकल रहे हैं। इससे पूर्व 30 सितंबर 2017 को उन्होंने लगभग 3,300 किलोमीटर की अत्यंत कठिन ‘नर्मदा परिक्रमा पदयात्रा’ सफलतापूर्वक पूरी की थी।

  • पंचरंगी धर्म ध्वजा: यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह अपने हाथों में पांच रंगों का पवित्र धर्म ध्वज थामकर चलेंगे।

  • ध्येय वाक्य: इस यात्रा का आधिकारिक सूत्र वाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ (अर्थात जहाँ धर्म है, वहीं विजय है) निर्धारित किया गया है।

📹 वीडियो जारी कर उठाए राम मंदिर चंदे पर सवाल: ट्रस्ट और पदाधिकारियों पर लगाए आरोप

आरोपों और आंदोलन की पृष्ठभूमि:

  • शिला पूजन में दान का उल्लेख: यात्रा की घोषणा के साथ दिग्विजय सिंह ने एक वीडियो संदेश भी जारी किया है, जिसमें उन्होंने 1990 के दशक के राम जन्मभूमि आंदोलन का स्मरण कराया।

  • चंदे के दुरुपयोग का आरोप: उन्होंने कहा कि उस दौरान उन्होंने स्वयं भी राम शिला पूजन अभियान में श्रद्धापूर्वक आर्थिक योगदान दिया था, परंतु कालांतर में श्रद्धालुओं के चंदे और चढ़ावे की पवित्र राशि का भारी दुरुपयोग किया गया।

  • निजी संपत्ति खरीद का दावा: उन्होंने आरोप लगाया कि आस्था के नाम पर एकत्रित धन से निजी संपत्तियां खरीदी गईं और करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले किए गए, जिसे एक सच्चा सनातनी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं कर सकता।

📝 यात्रा से जुड़ने के लिए जारी हुआ गूगल फॉर्म: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू

जनसहभागिता और संगठन की रूपरेखा:

  • डिजिटल पंजीकरण: उज्जैन से अयोध्या तक की इस पदयात्रा में आम जनमानस की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दिग्विजय सिंह की टीम ने एक गूगल फॉर्म लिंक सार्वजनिक किया है।

  • नागरिकों से आह्वान: उन्होंने आह्वान किया कि धर्म और सत्य में निष्ठा रखने वाले सभी लोग धार्मिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध जनचेतना जाग्रत करने के लिए इस पदयात्रा का हिस्सा बन सकते हैं।

  • तीखे राजनीतिक सवाल: दिग्विजय सिंह ने सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े संगठन दान की जवाबदेही से बचते रहे हैं और सत्तापक्ष के दबाव में प्रमुख पदाधिकारियों को संरक्षण दिया जाता रहा है, जिसके विरुद्ध जनजागरण आवश्यक है।

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