अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में सियासी हलचल तेज, कोर कमेटी की बैठक में पार्थ पवार के फैसलों पर जताई गई नाराजगी
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पार्टी को भविष्य में किस दिशा में आगे ले जाना है, सांगठनिक और नीतिगत स्तर पर बड़े फैसले कौन लेगा तथा शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ पार्टी का भविष्य में क्या संबंध रहेगा, इन तमाम मुद्दों को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच बैठकों और चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। इसी राजनीतिक सरगर्मी के बीच देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ एनसीपी के शीर्ष नेताओं की हालिया मुलाकात और उसके ठीक बाद मुंबई में हुई कोर कमेटी की एक अहम बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोर कमेटी की बैठक में पार्थ पवार के कार्यप्रणाली पर वरिष्ठ नेताओं ने जताई नाराजगी, बिना सलाह-मशविरा लिए गए फैसलों पर उठा सवाल
राजधानी मुंबई में आयोजित एनसीपी की कोर कमेटी की इस बैठक के दौरान पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्थ पवार के काम करने के तरीके और लिए गए फैसलों पर अपनी खुलकर नाराजगी जाहिर की। नेताओं का कहना था कि मुंबई महानगर अध्यक्ष पद पर जीशान सिद्दीकी और राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में उमेश पाटील की नियुक्ति करने से पहले पार्टी के तमाम कोर कमेटी सदस्यों के साथ आवश्यक चर्चा की जानी चाहिए थी, लेकिन ये दोनों महत्वपूर्ण नियुक्तियां बिना किसी परामर्श के अचानक कर दी गईं।
भविष्य में सभी वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद ही लिए जाएंगे बड़े फैसले, पार्थ पवार और जय पवार ने दिया आश्वसन
बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने इस बात पर पूरी सख्ती से जोर दिया कि भविष्य में पार्टी का कोई भी बड़ा या नीतिगत फैसला केवल और केवल सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाना चाहिए। इस आपत्ति और सुझाव पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्थ पवार और जय पवार ने नेताओं को पूरा भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में पार्टी के हर कदम पर सभी को साथ लेकर और आम सहमति बनाकर ही फैसले किए जाएंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष रखा गया वित्त मंत्रालय का अहम मुद्दा, दोनों एनसीपी के विलय के पक्ष में नहीं है पार्टी का एक धड़ा
राजनीतिक सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में एनसीपी नेताओं ने राज्य सरकार में जल्द से जल्द वित्त मंत्रालय पार्टी को दिए जाने की पुरजोर मांग रखी। इसके साथ ही, बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पार्टी का एक बड़ा धड़ा दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टियों (शरद पवार और अजित पवार गुट) के विलय के पक्ष में फिलहाल नहीं है। अजित पवार के निधन के बाद पार्टी अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को बनाए रखना चाहती है और सत्ता में अपनी हिस्सेदारी तथा प्रभाव को और अधिक मजबूत करना चाहती है।
दोनों एनसीपी के विलय की चर्चा पर नेताओं के बीच अलग-अलग राय, प्रफुल्ल पटेल और सुनेत्रा पवार का रुख है अलग
पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह और असंतोष की एक बड़ी वजह दोनों धड़ों के आपसी विलय को लेकर चल रही सुगबुगाहट भी है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल चाहते हैं कि दोनों अलग हुए गुटों का फिर से एकीकरण हो जाए, जबकि दूसरी ओर सुनेत्रा पवार इसके बिल्कुल पक्ष में नहीं हैं। वह अपनी पार्टी को स्वतंत्र इकाई के रूप में रखकर अपने नेतृत्व में आगे बढ़ाने की इच्छुक हैं। गौरतलब है कि अजित पवार के निधन से पहले दोनों गुटों के शीर्ष नेताओं के बीच विलय के मुद्दे पर कुल चार दौर की बैठकें हो चुकी थीं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उन पुरानी बैठकों में हुई बातचीत को आगे बढ़ाया जाएगा या दोनों पार्टियां पूरी तरह अलग-अलग स्वतंत्र रूप से काम करती रहेंगी।
विलय की स्थिति में पार्टी की कमान और सुप्रिया सुले की भूमिका को लेकर अटकलें, बीजेपी के रुख पर भी टिकी हैं सबकी नजरें
यदि भविष्य में दोनों धड़े एक मंच पर आते हैं और उनका विलय होता है, तो पार्टी की कमान अंततः किसके हाथों में होगी, क्या सांसद सुप्रिया सुले को संगठन में कोई बड़ी और मुख्य जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, और क्या इससे सुनेत्रा पवार तथा उनके परिवार की राजनीतिक भूमिका में कोई बदलाव आएगा—इन तमाम सवालों को लेकर पार्टी के भीतर और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं गर्म हैं। इसके साथ ही, दोनों गुटों के एक साथ आने में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का रुख भी निर्णायक माना जा रहा है। यदि विलय होता है, तो क्या शरद पवार एनडीए (NDA) का हिस्सा बनेंगे और क्या इसके लिए बीजेपी अपनी सहमति देगी, अमित शाह के साथ हुई बैठक के बाद इन बिंदुओं पर भी चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं।
पार्टी के सभी विधायकों की बुलाई गई संयुक्त संयुक्त बैठक, सूखा प्रभावित इलाकों के दौरे का भी हुआ बड़ा फैसला
कोर कमेटी की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य के सभी पार्टी विधायकों की एक संयुक्त बैठक बुलाई जाए, ताकि पिछले कुछ समय से नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी संवाद में आई कमी के सिलसिले को फिर से मजबूती से शुरू किया जा सके। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न हिस्सों में पड़े सूखे के गंभीर हालातों को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों और विधायकों को फौरन प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर भेजने का महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया गया है।
शिवसेना (UBT) नेता संजय राऊत का सोशल मीडिया पर तीखा हमला, एनसीपी के घटनाक्रम पर कसा तंज
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच शिवसेना (UBT) के प्रमुख नेता संजय राऊत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक तीखा पोस्ट शेयर करते हुए एनसीपी की मौजूदा स्थिति पर कड़ा तंज कसा है। उन्होंने अपने बयान में लिखा कि यह महाराष्ट्र के स्वाभिमान की कब्र है, जहाँ एक कद्दावर मराठी नेता द्वारा बनाई गई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को आखिरकार गुजरात के व्यापारियों के चरणों में समर्पित कर दिया गया है, और पार्टी के सभी नेता पूरी तरह लाचार व गुलाम बन चुके हैं।
निष्कर्ष— अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी के सामने खड़ी हैं कई बड़ी राजनीतिक चुनौतियां
कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के समक्ष इस समय अनगिनत और जटिल चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। पार्टी के भीतर असंतुष्ट वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी दूर करना, दोनों गुटों के संभावित विलय पर अंतिम मुहर लगाना और बीजेपी के साथ अपने राजनीतिक संबंधों को स्पष्ट करना पार्टी के लिए आने वाले समय में सबसे अहम रहने वाला है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अमित शाह के साथ हुई इस मुलाकात और कोर कमेटी की बैठकों के बाद पार्टी नेतृत्व अगला क्या रणनीतिक कदम उठाता है।
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