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रांची में 77वां वन महोत्सव: CM हेमंत सोरेन का आह्वान— ‘एक फलदार पौधा लगाएं, पर्यावरण संरक्षण को बनाएं जन आंदोलन’

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रांची (झारखंड): झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 77वें वन महोत्सव के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण को एक व्यापक जन आंदोलन बनाने का पुरजोर आह्वान किया है।

खेलगांव स्थित टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित राज्यस्तरीय भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तथा विधायक कल्पना सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।

🌿 तेंदूपत्ता समितियों और ‘हाथी मित्रों’ का सम्मान, CM बोले— “प्रकृति के नुकसान का असर सीधे मानव जीवन पर”

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को 77वें वन महोत्सव का औपचारिक आगाज किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता वन समितियों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMC), ग्राम वन प्रबंधन समितियों के उत्कृष्ट सदस्यों तथा ‘हाथी मित्रों’ को अंगवस्त्र व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं पौधारोपण कर हरियाली संदेश दिया। वन महोत्सव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण को हो रहा क्षरण अब सीधे मानव अस्तित्व को प्रभावित करने लगा है, जिसके स्पष्ट संकेत पूरे झारखंड में दिखाई दे रहे हैं। जंगलों से निकलकर हाथी अब शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि इंसानों ने उनके प्राकृतिक आवासों में अनधिकृत हस्तक्षेप किया है।

🐘 “हाथियों के घर में घुसेंगे तो वे भी हमारे घर आएंगे”: CM ने दी प्रकृति से खिलवाड़ न करने की चेतावनी

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम हाथियों के प्राकृतिक रहवास पर अतिक्रमण करेंगे, तो वे भी स्वभाविक रूप से मानव बस्तियों की ओर आएंगे।

पर्यावरण से खिलवाड़ की भारी कीमत समाज के हर व्यक्ति को चुकानी पड़ेगी। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि धन-दौलत, गाड़ियां या आधुनिक सुविधाएं किसी को भी पर्यावरण संकट से नहीं बचा सकतीं; प्रकृति का प्रकोप सभी पर समान रूप से पड़ता है।

🌳 “घर में लगाएं कम से कम एक फलदार पौधा”: CM सोरेन ने पेड़ पर तारीख अंकित करने की दी अनूठी सलाह

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से भावुक अपील की कि वे अपने आवास या परिसर में कम से कम एक फलदार पौधा अवश्य रोपें और उसके संरक्षण का दृढ संकल्प लें।

उन्होंने कहा कि पौधा रोपने के साथ उस पर आज की तिथि भी अंकित करें, ताकि आने वाले वर्षों में इस ऐतिहासिक संकल्प की स्मृति बनी रहे। मुख्यमंत्री ने चुटीले अंदाज में कहा, “मैं सत्ता में रहूं या न रहूं, किसी दिन आपके द्वारा लगाए गए उस पेड़ को देखने अवश्य आऊंगा कि आपने उसे कितना सहेजकर रखा है।”

🍐 बेकार की प्रजातियों के बजाय महुआ, जामुन और करंज जैसे स्थानीय फलदार पौधे लगाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने अतीत की त्रुटियों को रेखांकित करते हुए कहा कि पूर्व में कई स्थानों पर ऐसी अनुपयोगी प्रजातियों के पेड़ लगा दिए गए, जिनका मनुष्यों, पशुओं या पक्षियों के लिए कोई विशेष लाभ नहीं था।

अब राज्य सरकार ऐसे पौधरोपण को प्रोत्साहित कर रही है, जिसका सीधा लाभ समाज और पर्यावरण दोनों को प्राप्त हो। उन्होंने महुआ, जामुन, करंज सहित अन्य स्थानीय एवं फलदार पेड़ रोपने का सुझाव दिया।

🛑 “केवल सरकारी योजनाओं से नहीं बचेगा पर्यावरण, जनभागीदारी है सबसे महत्वपूर्ण”

सभागार में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक केवल एक-एक फलदार पौधा लगाकर उसे जीवित रखने का संकल्प ले, तो यह संपूर्ण झारखंड में पर्यावरण संरक्षण की एक बहुत बड़ी क्रांति बन सकती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सरकारी योजनाओं, ठेकों और टेंडरों के भरोसे पर्यावरण का संरक्षण संभव नहीं है, इसके लिए व्यापक जनभागीदारी अनिवार्य है।

🏢 कंक्रीट के जंगलों और अंधाधुंध कटाई पर चिंता, विकसित देशों से सीख लेने की सलाह

मुख्यमंत्री ने तीव्र गति से हो रहे अनियंत्रित शहरीकरण और बनते कंक्रीट के जंगलों पर गहरी चिंता प्रकट की।

उन्होंने कहा कि वृक्षों की अंधाधुंध कटाई कर ऊंची इमारतें, अपार्टमेंट्स और शॉपिंग मॉल बनाए जा रहे हैं, जिसका अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव स्थानीय जलवायु और जैव विविधता पर पड़ रहा है। दुनिया के कई विकसित देश भी आज गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रहे हैं, और भारत को समय रहते इससे सबक लेना चाहिए।

💡 मुफ़्त बिजली योजना की असफलता, नकली पनीर और जन आंदोलन का आह्वान

“हाल ही में रांची में भारी मात्रा में पकड़े गए नकली व मिलावटी पनीर का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के विनाश के कारण कृत्रिम और घातक उत्पादों का प्रचलन बढ़ रहा है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार ने शहरों में हरियाली बढ़ाने हेतु ‘1 पेड़ लगाने पर 5 यूनिट मुफ़्त बिजली’ और ‘100 पेड़ लगाने पर 1000 यूनिट मुफ़्त बिजली’ का प्रस्ताव रखा था, लेकिन जनता की ओर से अपेक्षित उत्साह नहीं मिला। मुख्यमंत्री ने वन महोत्सव को केवल एक औपचारिक आयोजन न मानकर इसे हर नागरिक का संकल्प बनाने पर बल दिया।”

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