हजारीबाग (झारखंड): हजारीबाग की ऐतिहासिक झील संपूर्ण राज्य भर में अपनी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता के लिए विख्यात है। एक ही परिसर में अवस्थित पांच-पांच झीलें पर्यटकों को अपनी ओर सहज ही आकर्षित करती हैं। इस क्षेत्र को एक सर्वसुविधायुक्त पर्यटन हब (Tourist Hub) के रूप में विकसित करने हेतु झारखंड सरकार द्वारा ₹14 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी। हालांकि, प्रारंभ से ही झील के सौंदर्यीकरण कार्य में भारी अनियमितता, घटिया निर्माण सामग्री और लापरवाही के संगीन आरोप लगते रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग के नगर प्रमुख (मेयर) ने जारी निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
🏛️ “विकास के नाम पर हावी है भ्रष्टाचार, बनेगी जांच कमेटी”: मेयर अरविंद राणा का बड़ा बयान
झारखंड में अनेक ऐसे नैसर्गिक क्षेत्र हैं जिन्हें विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में उभारा जा सकता है, परंतु प्रशासनिक उदासीनता और कथित भ्रष्टाचार के कारण कई महत्वाकांक्षी योजनाएं अधर में लटक जाती हैं।
हजारीबाग झील को पर्यटन हब बनाने के लिए नगर विकास विभाग की ओर से आवंटित ₹14 करोड़ के संदर्भ में मेयर अरविंद राणा ने भी स्वीकार किया है कि विकास कार्य के नाम पर व्यापक अनियमितता बरती गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना उनके वर्तमान कार्यकाल से पूर्व की है। संवेदकों (ठेकेदारों) द्वारा गुणवत्ता से खिलवाड़ किया गया है। मेयर ने घोषणा की है कि आगामी बोर्ड बैठक में एक निष्पक्ष जांच कमेटी गठित करने की सिफारिश की जाएगी।
🔍 “पूरे प्रोजेक्ट की हो वित्तीय व तकनीकी जांच”: कांग्रेस प्रदेश महासचिव सुरजीत नागवाला ने उठाई मांग
झील सौंदर्यीकरण प्रकरण में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुरजीत नागवाला ने ₹13 करोड़ 97 लाख की लागत से बन रही इस योजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने मांग की है कि इस पूरे प्रोजेक्ट का किसी स्वतंत्र एजेंसी से तकनीकी (Technical) एवं वित्तीय (Financial) ऑडिट कराया जाए, दोषियों को चिह्नित कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए तथा जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
💔 शहर की हृदयस्थली पर मंडराया संकट, घटिया निर्माण सामग्री को लेकर स्थानीय नागरिकों में रोष
हजारीबाग की यह झील पूरे शहर की हृदयस्थली मानी जाती है।
जिस स्थान को शासन-प्रशासन द्वारा अंतराष्ट्रीय स्तर का टूरिज्म हब बनाया जाना था, वहां व्याप्त वित्तीय गड़बड़ियों से विकास की मंशा पर ही प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। ऐतिहासिक धरोहर के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को लेकर स्थानीय नागरिकों व पर्यावरणविदों में भी भारी आक्रोश एवं निराशा का वातावरण है।
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