Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
ट्रेन से बांधा पूरा पेड़! होलिका दहन के लिए ऐसा पागलपन देख हैरान रह गई पुलिस, गिरफ्तार हुए सभी आरोपी Himachal Weather Update: हिमाचल में बदलेगा मौसम, अगले 3 दिन भारी बारिश और बर्फबारी का अलर्ट बरेली में 'इश्क' का दर्दनाक अंत: प्रेमिका की मौत की खबर सुनते ही प्रेमी भी फंदे पर झूला, एक साथ खत्म... Bhagalpur News: भागलपुर में दुकान में घुसी मुखिया की अनियंत्रित कार, एक की मौत और 8 घायल सावधान! होली पर बदलने वाला है मौसम: इन राज्यों में बारिश की चेतावनी, दिल्ली-NCR में चलेंगी तेज हवाएं नोएडा में दबंगई की हद! महिलाओं ने विरोध किया तो तान दी पिस्टल, फिर पीछे छोड़ दिया पालतू कुत्ता; वीडि... एमपी में भीषण सड़क हादसा, कार-बाइक की भिड़ंत में दो सगे भाइयों की मौत होली पर बदमाशों का तांडव! मुफ्त शराब के लिए मांगी रंगदारी, मना करने पर बरसाईं गोलियां, देखें वीडियो Tonk News: टोंक में दो समुदायों के बीच झड़प, तनाव के बाद भारी पुलिस बल तैनात कैसा होगा 'नया आगरा'? 15 लाख लोगों के लिए तैयार हुआ मास्टर प्लान, नोएडा की तर्ज पर बसेंगे 58 गांव!

Janakpur News: गांव को महामारी से बचाने के लिए अनोखी रस्म, जानें होली से पहले क्यों छोड़ी जाती है मुर्गी

4

मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: जिले के भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पहले सदियों पुरानी ‘निकारि’ प्रथा आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है. यह इलाका आदिवासी बहुल है, जहां बैगा समाज की परंपराएं आज भी जीवंत हैं. ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान से गांव को आपदा और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है.

होली से पहले होता है विशेष अनुष्ठान

जनकपुर के पुजारी गरीबा मौर्य ने बताया कि गांव बसने के समय से ही यह परंपरा चली आ रही है. होली से पहले ‘डांग न गढ़ने’ की परंपरा से पूर्व निकारि की जाती है. पहले गांव के बैगा इस प्रथा को निभाते थे, वहीं वर्ष 2006 से गरीबा मौर्य ठाकुर बाबा से जुड़कर इस अनुष्ठान को आगे बढ़ा रहे हैं.

बीमारियों से बचाव की मान्यता

ग्रामीणों के अनुसार, निकारि प्रथा का मुख्य उद्देश्य गांव को हैजा, कॉलरा जैसी गंभीर बीमारियों और अन्य आपदाओं से बचाना है. इस अनुष्ठान के दौरान बैगा द्वारा मुर्गी चराई जाती है. गांव के हर चौक-चौराहे पर यह प्रक्रिया पूरी की जाती है, ताकि नकारात्मक शक्तियां गांव में प्रवेश न कर सकें.

गांव की सीमा के बाहर छोड़ी जाती है मुर्गी

मान्यता है कि अनुष्ठान के बाद मुर्गी को गांव की सीमा पार, नदी के उस पार छोड़ दिया जाता है. इससे किसी भी प्रकार की विपत्ति गांव में प्रवेश नहीं कर पाती. इस मौके पर गांव के सभी टोला-मोहल्लों के लोग मिलकर बैगा को अखत, झाड़ू और पूजन सामग्री देते हैं.

एकजुटता और आस्था का प्रतीक

गरीबा मौर्य का कहना है कि यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि गांव की एकता और सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक है. ग्रामीणों का विश्वास है कि निकारि प्रथा से गांव में शांति, सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन बना रहता है. जनकपुर क्षेत्र में आज भी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन देखने को मिलता है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Please Pay your remaining balance to remove this banner !
इस बैनर को हटाने के लिए कृपया अपनी बकाया राशि का भुगतान करें !