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राम वन गमन पथ: करोड़ों खर्च के बाद भी सीतामढ़ी हरचौका में बदहाली और बदइंतजामी

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मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: भगवान श्रीराम के वन गमन पथ को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए बड़े-बड़े दावे किए गए. करोड़ों रुपए खर्च हुए, मंत्रियों ने मंच से इसे आस्था और पर्यटन का संगम बताया, बनास नदी के जल को तीर्थ घोषित कर माथे से लगाया गया. लेकिन आज वही सीतामढ़ी हरचौका राम वन गमन तीर्थ बदहाली, अव्यवस्था और सरकारी उपेक्षा का शिकार है.

कांग्रेस ने की थी शुरुआत, अब रख-रखाव भी नहीं: भरतपुर विकासखंड स्थित हरचौका, जिसे वर्ष 2023 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राम वन गमन पथ के प्रमुख पड़ाव के रूप में विकसित करने की शुरुआत की थी. आज वह खंडहर में तब्दील होता दिखाई दे रहा है. यहां 25 फीट ऊंची प्रभु श्रीराम की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई थी, भव्य लोकार्पण समारोह हुआ था. उस समय इसे क्षेत्रीय पर्यटन को नई पहचान देने वाला ऐतिहासिक कदम बताया गया था.

टाइल्स उखड़ी, अंधेरा छाया, मूलभूत सुविधा भी नहीं: आज स्थल पर न तो समुचित रख-रखाव है, न सुरक्षा व्यवस्था और न ही पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं. करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए ढांचे जर्जर हो चुके हैं, टाइल्स उखड़ चुकी हैं, रास्ते टूटे पड़े हैं और चारों ओर अव्यवस्था पसरी हुई है. लाइटिंग सिस्टम बंद पड़ा है और कई स्थानों पर लोहे के ढांचों में जंग लग चुकी है. जानकारी के मुताबिक हरचौका राम वन गमन तीर्थ को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए करीब 6 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. ऐसे में क्या यही करोड़ों के खर्च का परिणाम है? क्या यही राम वन गमन पथ का भविष्य है?

राम के वनवास में हरचौका का महत्व: स्थानीय लोगों के अनुसार हरचौका वही पवित्र स्थान है जहां भगवान श्रीराम अपने वनवास काल में माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ पहुंचे थे. यहां वे सात दिनों तक रुके थे. मान्यता है कि इसी स्थान पर माता सीता ने अपने हाथों से भोजन बनाया और भगवान राम लक्ष्मण के साथ उसे ग्रहण किया. यही कारण है कि इस स्थान को “सीता की रसोई” भी कहा जाता है. साथ ही मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान विश्वकर्मा ने धनुष-बाण की नोक से कुटिया का निर्माण किया था. यहां 12 शिवलिंगों की स्थापना और 12 कुटियाओं का निर्माण किया गया था.

ये आज अस्तित्व में तो हैं, लेकिन सरकारी उपेक्षा के कारण उनकी हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है. दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल की दुर्दशा देखकर निराश लौट रहे हैं. लोगों का कहना है कि यदि इस स्थल की देखरेख ही नहीं करनी थी तो फिर करोड़ों रुपये खर्च करने का क्या औचित्य था?

यह वही राम वन गमन स्थल है जहां भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल में पहला पड़ाव किया था और सात दिनों तक ठहरे थे. आज यहां रखी सामग्री पर जंग लग रही है. जिस ठेकेदार ने काम लिया था, उसका अब कोई अता-पता नहीं है. सामग्री बिखरी पड़ी है, यह स्थल सनातन धर्म और आस्था का प्रतीक है, लेकिन धूल-मिट्टी खा रहा है– स्थानीय निवासी सुरेंद्र कुमार शर्मा

रखरखाव के लिए पर्यटन विभाग का कोई अधिकारी यहां नहीं आता. पहले यहां रेलिंग लगाई गई थी, लेकिन बाद में उसे खोलकर ले जाया गया और अब कहीं भी रेलिंग नहीं है. इससे बच्चों और श्रद्धालुओं के गिरने का खतरा बना रहता है– अजय कुमार पांडे, मंदिर के पुजारी

व्यापारी संघ ने भी जताई नाराजगी: अध्यक्ष राजेश मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में राम वन गमन पथ को लेकर जो काम हुआ, वह निश्चित रूप से सराहनीय था. आमतौर पर कांग्रेस को हिंदू धर्म और उनसे जुड़े काम का समर्थक नहीं कहा जाता, लेकिन इसके बावजूद राम वन गमन पथ और धार्मिक पर्यटन को लेकर कांग्रेस सरकार ने हरचौका, रमदाहा और बस्तर तक के मार्ग को विकसित करने का अच्छा प्रयास किया. लेकिन कांग्रेस शासन के बाद से इस परियोजना की गति बेहद धीमी हो गई है.

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