Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Lok Sabha Update: भारी हंगामे के कारण पीएम मोदी का संबोधन रद्द, 8 सांसदों के निलंबन और नरवणे की किता... MP Politics: 'ब्राह्मण समाज सबकी आंखों में खटक रहा है...', बीजेपी विधायक गोपाल भार्गव के बयान से मध्... Rajya Sabha Update: लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में टकराव के आसार! PM मोदी के भाषण से पहले कांग्रेस ने... Pune-Mumbai Expressway: पुणे एक्सप्रेस-वे पर 24 घंटे से लगा महाजाम, हजारों गाड़ियां फंसी; सीएम फडणवी... Delhi Pollution: प्रदूषण के खिलाफ जंग में दिल्ली मेट्रो का कमाल, सीएम रेखा ने की तारीफ; कहा- 'राजधान... Muktinath Yatra: भारत-नेपाल के बीच शुरू हुई सीधी बस सेवा; जानें मुक्तिनाथ यात्रा का रूट, किराया और स... Ranchi Crime News: रांची के पुंदाग में नाबालिग लड़के की हत्या, निर्माणाधीन अपार्टमेंट में मिला लहूलु... Viksit Bharat Mission: साइकिल पर राष्ट्र निर्माण का संदेश, 'नशा-मुक्त भारत' के संकल्प के साथ देश भ्र... Dhanbad Election: संजीव सिंह और भाजपा समर्थित मेयर प्रत्याशी का नामांकन, प्रदेश अध्यक्ष बोले- अनुशास... Ranchi Khadgarha Bus Stand: खादगढ़ा बस स्टैंड में आगजनी की घटनाओं का बड़ा खुलासा, CCTV की मदद से एक ...

Parenting Tips: ज्यादा लाड-प्यार से बिगड़ सकता है बच्चा, जानें पेरेंट्स की वो 5 गलतियां जो बच्चों को बना रही हैं जिद्दी और कमजोर

5

पेरेंटिंग किस तरह की होनी चाहिए आजकल ये बहुत कम लोग जानते हैं. बच्चा 6 महीने का है तो उसे भी खाना खिलाने के लिए पेरेंट्स फोन में वीडियो दिखाते हैं. जब वो बड़ा होने लगता है तो रील्स का आदी बन जाता है. माता-पिता का ये तरीका बैड पेरेंटिंग की तरफ इशारा करता है. वैसे ऐसी कई आदतें हैं जो पेरेंट्स अपनाते हैं और अपने ही बच्चे के फ्यूचर को खतरे में डाल रहे हैं. फोन भले ही अधिकतर बच्चों का दुश्मन है लेकिन असल मायने में उनके सबसे बड़े दुश्मन खुद माता-पिता ही हैं. इसके अलावा बच्चों को हर समय बाहर की चीजें देना भी अब नॉर्मल है. कहीं आप भी तो अपने बच्चे को इसी तरीक से पाल नहीं रहे हैं.

इस आर्टिकल में हम आपको पेरेंट्स की कई ऐसी आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं जो उनके लाड-प्यार पर ही सवाल उठा रही हैं. छोटी उम्र से ही बच्चे का स्वभाव जिद्दी हो जाता है. इतना ही नहीं वो कई दूसरे तरीकों से अपना नुकसान करता है. यहां हम ओवर पेरेंटिंग की बात कर रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं इस पेरेंटिंग से जुड़ी कुछ कॉमन हैबिट्स के बारे में.

क्या है ओवर पेरेंटिंग । What is Over Parenting?

आजकल के माता-पिता ओवर पेरेंटिंग के व्यवहार को ज्यादा फॉलो करने लगते हैं. हर छोटी से छोटी बात पर बच्चे की जिद्द पूरी करना. उनके हर मामले में दखलअंदाज करना. ऐसी कई आदते हैं जो पेरेंट्स को अपने बच्चे का ही दुश्मन बना देती हैं. माता-पिता भले ही अपने बच्चे का भला चाहे लेकिन इससे उसको कई नुकसान होते हैं. ऐसे में बच्चे के कॉन्फिडेंस, फैसले लेने की पावर और इमोशनल अटैचमेंट पर नेगेटिव इफेक्ट पड़ता है.

ओवर पेरेंटिंग की बुरी आदतें । Bad habits of over parenting

हर समय फोन देना- खाने से पहले, सोने से पहले या फिर कोई भी काम करने से पहले बच्चे फोन मांगते हैं. माता-पिता बिना सोचे उन्हें घंटों फोन पकड़ा देते हैं. इससे न सिर्फ उनका मेंटल लेवल बिगड़ता है बल्कि बच्चा अजीबो-गरीब व्यवहार भी करने लगता है. हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के अधिकतर बच्चे बिना फोन देखें खाना नहीं खाते हैं. खाते वक्त ऐसा करने से खाना ठीक से चबाते नहीं है जिस वजह से पाचन तंत्र भी बिगड़ता है. भले ही आपको अपने बच्चे की मासूमियत पर प्यार आए लेकिन उसे हर समय वीडियो देखने के लिए फोन देना एक दिन बड़े नुकसान का कारण बन सकता है.

अरारोट से बनने वाली चीजें देना

पेरेंट्स खानपान में भी कई गलतियां कर रहे हैं वो लाड-प्यार में बच्चे को पास्ता, नूडल्स या मैक्रोनी खिलाते हैं. इनका स्वाद उन्हें शानदार लगता है लेकिन लगातार सेवन एक समय पर गट हेल्थ को पूरी तरह बिगाड़ देता है. न्यूट्रिएंट्स ठीक से न मिलने की वजह से बच्चा ठीक से विकास नहीं कर पाता है. हाइट और वेट न बढ़ने की वजह से पर्सनालिटी भी डाउन हो जाती है. दरअसल, बच्चे अरारोट से बनी चीजों को सीधे निगल जाते हैं क्योंकि उनका पूरा फोकस फोन या दूसरी चीजों पर होता है. इसके अलावा हर समय चॉकलेट-चिप्स देना भी बड़ा खतरा है. इन चीजों की लत लगना नॉर्मल है पर कंट्रोल करना पेरेंट्स के हाथ में ही होता है.

एंटीबायोटिक देना

आजकल के पेरेंट्स जुकाम होने पर भी बच्चे को एंटीबायोटिक देते हैं. क्या आप जानते हैं कि ज्यादा एंटीबायोटिक देने के कारण एक समय पर ये काम करना बंद कर देती हैं. इस सिचुएशन को सुपरबग पुकारा जाता है. बच्चे को तकलीफ में न देखना पड़े इसलिए उन्हें तुरंत एंटीबायोटिक्स दे दी जाती है. ये दवाएं उनके लिवर और किडनी जैसे बड़े ऑर्गन्स को धीरे-धीरे डैमेज करती हैं.

बच्चों के हर फैसले को खुद लेना

प्यार और लाड के नाम पर पेरेंट्स बच्चों के हर फैसले को खुद लेते हैं. ये न सिर्फ उनके आत्मविश्वास को डाउन करता है बल्कि वो हर सिचुएशन में पेरेंट्स के भरोसे ही रहता है. जब तक उसे खुद से फैसले लेने का स्पेस नहीं देंगे तब तक बच्चा खुद को फ्यूचर के लिए ठीक से तैयार नहीं कर पाएगा.

बच्चे के काम खुद करना

पेरेंट्स की एक कमी ये भी है कि वे बच्चे के हर काम को खुद करते हैं. ऐसे में वो न सिर्फ आलसी होता है बल्कि परिवार के किसी भी सदस्य को कुछ न समझने की गलती करता है. पेरेंट्स इसे प्यार समझते हैं लेकिन ऐसा करना उसे अभी नहीं बल्कि भविष्य में नुकसान पहुंचाता है. इसके अलावा कई पेरेंट्स अपने बच्चे को कभी न नहीं कहते हैं. जबकि भारत में एक समय पर बच्चे माता-पिता की हां को बहुत बड़ी चीज मानते थे. ओवर पेरेंटिंग के जरिए कुछ पेरेंट्स अपने ही बच्चे के दुश्मन बन बैठते हैं.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.