मैहर: ताला थाना क्षेत्र अंतर्गत कोतर गांव से झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. यहां मात्र 11 वर्षीय नाबालिग छात्र ने आत्महत्या कर ली. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्र अपनी मां की डांट से आहत था और इसी मानसिक तनाव में उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया. मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच पड़ताल शुरु कर दी है.
छठवीं कक्षा में पढ़ता था मासूम
मृतक आकाश (परिवर्तित नाम) कक्षा छठवीं का छात्र था. पिता चूडामन द्विवेदी ने बताया कि, ” आकाश घटना वाले दिन स्कूल नहीं जाना चाहता था. उसने घर में पढ़ाई भी नहीं की, इसी बात को लेकर उसकी मां ने उसे पढ़ाई पर ध्यान देने की समझाइश देते हुए डांट दिया. मां की डांट से वह काफी नाराज और भावनात्मक रूप से आहत हो गया था.
डांट लगने के बाद आकाश घर के एक कमरे में चला गया और अपनी जान दे दी. परिजन को लगा कि वह कुछ देर में बाहर आ जाएगा. लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो घरवालों को अनहोनी की आशंका हुई. जब दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर का दृश्य देख सभी स्तब्ध रह गए. आकाश अचेत हालात में पड़ा हुआ था.
अस्पताल ले जाने से पहले ही हो चुकी थी मौत
परिजन तुरंत उसे अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. घटना की जानकारी मिलते ही पूरे परिवार में कोहराम मच गया. माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है. ग्रामीणों का कहना है कि आकाश शांत स्वभाव का बच्चा था. किसी को अंदाजा भी नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा सकता है. हर कोई इस घटना से स्तब्ध है.
पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलते ही ताला थाना पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मर्ग कायम किया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई.
थाना प्रभारी महेंद्र मिश्रा का कहना है कि, ”मामला बेहद संवेदनशील है और सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है. परिजन के बयान दर्ज किए जा रहे हैं. प्रारंभिक जांच में घरेलू डांट को कारण माना जा रहा है. पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि छात्र मां की डांट से मानसिक रूप से आहत था. हालांकि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना के पीछे कोई अन्य कारण या दबाव तो नहीं था.”
बच्चों की मानसिक स्थिति को समझने की जरूरत
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि, बच्चों की मानसिक स्थिति बेहद नाजुक होती है. छोटी-छोटी बातों पर की गई डांट या दबाव उनके मन पर गहरा असर डाल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों से संवाद बनाए रखना और उनकी भावनाओं को समझना बेहद आवश्यक है.
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