Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Namo Bharat Train: अब दिल्ली से मेरठ सिर्फ 55 मिनट में, सराय काले खां से मोदीपुरम तक दौड़ने को तैयार... Anant Bhaskar Murder Case: आंध्र प्रदेश के पूर्व MLC अनंत भास्कर पर हत्या का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने... सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: बंगाल में न्यायिक नियुक्तियों पर जारी खींचतान पर SC का बड़ा फैसला, अधिकारिय... बड़ी खबर: क्या बाबरी के नाम पर बन सकती है नई मस्जिद? सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिया झटका, सुनव... Greater Noida News: रयान इंटरनेशनल स्कूल में एक घंटे तक बाथरूम में बंद रही मासूम छात्रा, परिजनों ने ... भगवान को लिखा 'जॉब लेटर': छात्र ने मांगी 20 लाख के पैकेज वाली नौकरी, बदले में भगवान को दिया ये अनोखा... चुगली की तो कटेगी जेब! अब इधर-उधर की बातें की तो देना होगा भारी जुर्माना, जानें इस अनोखे फैसले के पी... Bihar Assembly News: 'ब्राह्मण' शब्द पर बिहार विधानसभा में हंगामा, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा बोले- "मै... Rahul Gandhi Sultanpur Visit: सुल्तानपुर में फिर मोची रामचेत की दुकान पर रुके राहुल गांधी, बेटी के इ... AAP Attacks Opponents: महिलाओं को 2500 रुपये, प्रदूषण और युवा; आप ने 15 सवालों के जरिए सरकार को घेरा

“हिमाचल का ‘सीक्रेट’ गांव: जहां रहते हैं सिर्फ दो भाई, पर सुविधाएं ऐसी कि शहर भी फेल!”

2

हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में काजा से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर बसा एक गांव इन दिनों चर्चा में है. यह गांव एक ऊंचे पहाड़ी टीले पर स्थित है. इस गांव का नाम काकती है, जिसमें सिर्फ 6 लोग रहते हैं. गांव अब डिजिटल इंडिया से जुड़ गया है. पिछले साल नवंबर महीने में बीएसएनएल ने इस गांव में 4जी टावर लगाया, जिससे गांव के लोगों के चेहरे खुशी से खिल गए. गांव सिर्फ दो भाइयों का परिवार रहता है. छोटे भाई का नाम कलजंग टाकपा है, जबकि बड़े भाई का नाम छेरिंग नामगयल है जो अपनी पत्नी रिंगजिन यूडन के साथ काकती गांव में रहते हैं.

दो भाइयों के इस गांव में 6 लोग रहते हैं. इनमें एक का बेटा सोनम छोपेल लामा, नवांग ज्ञालसन विशेष बच्चा है व नवांग कुंगा जोकि टैक्सी चलाते है. जानकारों के मुताबिक, यह परिवार अपने वंश की पांचवीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहा है. काकती गांव राजस्व रिकॉर्ड में भी दर्ज है. एडीसी काजा शिखा सिमटिया ने बताया कि काकती गांव राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है. यह देश का पहला ऐसा गांव है, जहां केवल एक ही घर है और एक ही परिवार के लोग वर्षों से रह रहे हैं.

सरकार रिकॉर्ड में 15 बीघा जमीन

सरकारी रिकॉर्ड में काकती गांव में कुल 15 बीघा जमीन है. गांव 300 साल पुराने मिट्टी और पत्थरों से बने एक मड हाउस में सिमटा हुआ है. यही घर इस गांव की पहचान भी है और इसकी आबादी भी. मिट्टी और पत्थरों से बना यह पारंपरिक मड हाउस हिमालयी वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण भी है. यहां रहने वाले दो भाई अपने पूर्वजों की धरोहर के समेटे हुए हैं.

300 साल पुराना है घर

वहीं पत्थर और मिट्टी से बना मड हाउस गर्मियों में प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है, जबकि सर्दियों में गर्म रखता है. जब बाहर का तापमान शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है, तब भी यह घर परिवार को सुरक्षित बना रखता है. छेरिंग ने मीडिया से बातचीत करने के दौरान बताया कि पहले उन्हें देश दुनिया की खबरें हफ्तों बाद मिलती थीं लेकिन अब मोबाइल के जरिए वह पल-पल की खबर से अपडेट रहते हैं. हालांकि, इन दिनों छेरिंग के सभी बेटे बाहर हैं, पति पत्नी घर में अकेले ही रहते है.

‘शहर बिल्कुल भी पसंद नहीं’

उन्होंने कहा कि हमें शहर बिल्कुल भी पसंद नहीं न ही वहां चकाचौंध पसंद है. जब कभी जाना होता है तो रिवालसर व नैनीताल चले जाते हैं लेकिन वहां भी अधिक दिन नहीं रुकते. अब तो बिजली आ गई है. सड़क घर तक पहुंच गई है लेकिन फिर भी सर्दियों में कठिन दिनों का सामना करना पड़ता है. छह महीने के लिए राशन पानी जमा करते है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.