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“साहब! 10 रुपये के जहर ने मेरा बुढ़ापा उजाड़ दिया”: जबलपुर में अपनों को खोने वाली मां की रुला देने वाली दास्तां।

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मध्य प्रदेश में जबलपुर के बाबा टोला और सिंधी कैंप इलाके में शराब ने ऐसा कहर बरपाया कि छह माह के अंदर शराब पीने से 19 लोगों की मौत हो गई. इसे लेकर हाथों में तख्ती और मृतकों के पोस्टर लेकर क्षेत्रीय महिलाएं पुलिस अधीक्षक और कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचीं और शराब बंद करने की मांग की. 19 लोगों की मौत के आरोपों ने प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इन मौतों के खिलाफ स्थानीय लोगों ने मोर्चा खोल दिया है, जिससे प्रशासन सकते में आ गया है और घर-घर जाकर परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में 10, 20 और 50 रुपये में पाउचों में अवैध शराब धड़ल्ले से बिक रही है. सरकारी शराब दुकान के अलावा घर-घर में अवैध शराब उपलब्ध है. शराब दुकान में जो शराब 100 रुपये में मिलती है, वही शराब बाहर 50 रुपये में मिल रही है, जिसने क्षेत्र के पुरुषों को बुरी तरह अपनी गिरफ्त में ले लिया है. मजदूरी और अन्य छोटे-मोटे काम से होने वाली आय का पैसा शराब पर खर्च किया जा रहा है, जिसका खामियाजा पूरे परिवार को भुगतना पड़ रहा है.

19 मौतों के बाद फूट पड़ा लोगों का गुस्सा

19 मौतों के बाद लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा. मृतकों की तस्वीरें बैनर पर लगाकर क्षेत्रीय लोगों ने रैली निकाली और शराब दुकान हटाने तथा अवैध शराब की बिक्री पर सख्त रोक लगाने की मांग की. आंदोलन में स्थानीय लोगों के साथ-साथ राजनीतिक दल भी शामिल हो गए हैं. क्षेत्र की महिलाओं ने शराब पीकर मारपीट करने के गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि शराब ने न सिर्फ उनके पति और बेटों की जान ली, बल्कि कई परिवारों का वंश ही खत्म कर दिया है. अब आगे-पीछे कमाने वाला भी कोई नहीं बचा है.

लोगों के आक्रोश को देख प्रशासन आया हरकत में

आक्रोश को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया है. पुलिस और प्रशासन के अधिकारी इलाके में डेरा डाले हुए हैं और घर-घर जाकर मृतकों के परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि मौतों के पीछे अत्यधिक शराब सेवन एक बड़ा कारण है, हालांकि अवैध शराब की बिक्री की भी जांच की जा रही है. प्रशासन ने इलाके की सख्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने का भरोसा दिलाया है. लोगों की मांग पर पुलिस चौकी खोलने पर भी पुलिस अधिकारियों ने सहमति जताई है.

न पति रहा, न ही दोनों बेटे… शराब से मौत

इस पूरे मामले का सबसे मार्मिक पहलू उन परिवारों की कहानी है, जो पूरी तरह उजड़ चुके हैं. बुजुर्ग माया बाई की आंखों में आज भी आंसू सूखे नहीं हैं. माया बाई के दो बेटे थे, दोनों शराब के आदी थे. पहले पति की मौत हुई और फिर एक-एक कर दोनों बेटों की भी शराब ने जान ले ली. अब माया बाई के पास न पति है, न बेटे. वह अपनी बेटी और बहू के सहारे जीवन काट रही हैं. माया बाई का कहना है कि उन्होंने बेटों को बहुत समझाया, लेकिन सस्ती और आसानी से मिलने वाली शराब ने उन्हें नहीं छोड़ा. उनका दर्द छलक पड़ता है- अगर यहां शराब बंद नहीं हुई, तो इस मोहल्ले के सारे लड़के खत्म हो जाएंगे.

आखिर इन मौतों की सही वजह क्या है?

एडिशनल एसपी आयुष गुप्ता का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और अवैध शराब के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे. पुलिस चौकी खोलकर निगरानी बढ़ाने का दावा भी किया जा रहा है. बाबा टोला और सिंधी कैंप, जहां बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी निवास करती है, आज शराब के जहर से कराह रहा है. फिलहाल पुलिस प्रशासन की टीम घर-घर जाकर परिजनों के बयान दर्ज कर रही है. इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि आखिर मौतों की सही वजह क्या है.

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