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बीजापुर चलित थाना: 100 से ज्यादा गांवों में पहुंची पुलिस, ग्रामीण विश्वास, सुरक्षा और विकास की दिशा में बड़ा कदम

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बीजापुर: छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर लगातार बड़ी कामयाबी मिल रही है. इस साल बड़े नक्सली नेताओं को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया है. वहीं अब नक्सली बड़ी संख्या में सरेंडर कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ सरकार लगातार नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील कर रही है. वहीं बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित जिलों में पुलिस जन संवाद अभियान भी चला रही है. बीजापुर के अंदरूनी क्षेत्रों के गांवों में पहुंच कर पुलिस, ग्रामीणों से बात कर रही और उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी दे रही है.

बीजापुर के 22 थाना के 100 से ज्यादा गांवों में पुलिस का चलित थाना

बीजापुर एससपी जितेन्द्र यादव ने बताया कि चलित थाना के जरिए ग्रामीणों से सीधे सम्पर्क कर उनकी समस्याओं को सुन रहे हैं. जिससे सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सतत जन-संवाद अभियान से ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर विश्वास मजबूत हो रहा है. समाज में शांति एवं विकास का वातावरण और ज्यादा प्रबल हो रहा है. पुलिस अधीक्षक ने बताया कि बीजापुर में अब तक 100 से ज्यादा गांवों में पुलिस ने जनसंवाद अभियान चलाया है.

भैरमगढ़ में जन-संवाद कार्यक्रम

29 नवंबर को बीजापुर पुलिस और सुरक्षा बलों ने थाना भैरमगढ़ के ग्राम मरकापाल, इलमिडी के जिनिप्पा, फरसेगढ़ के चटपल्ली, मिरतुर के पाटलीगुड़ा व फुलगट्टा, आवाल्ली के चेरकडोडी, बासागुड़ा के तिमापुर कुनबीपारा, तारलागुड़ा के अन्नाराम, भोपालपटनम के गंगाराम एवं तर्रेम के भट्टीगुड़ा में जनसंवाद आयोजित किया.

उसूर में जन-संवाद कार्यक्रम

29 नवंबर को बीजापुर पुलिस और सुरक्षा बलों ने उसूर थाना के नड़पल्लि, नैमेड़ के कडेर, भद्राकाली के रामपेंटा में संवाद कार्यक्रम किया. कार्यक्रम के दौरान जवानों ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं विस्तार से सुनीं और तत्काल समाधान योग्य मामलों पर मौके पर ही कार्रवाई की.

नक्सल संगठन में सक्रिय सदस्यों को सरेंडर के लिए प्रेरित करने की अपील

आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति की जानकारी देते हुए सुरक्षा बलों ने परिवार एवं रिश्तेदारों में सक्रिय माओवादी सदस्यों को हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया. साथ ही ग्रामीणों को बताया गया कि योजनाबद्ध पुनर्वास और रोजगार सुविधाओं के माध्यम से समर्पित सदस्यों को सुरक्षित जीवन, शिक्षा व आजीविका का अवसर मिल रहा है.सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे इस सतत जन-संवाद अभियान से ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर विश्वास मजबूत हो रहा है. समाज में शांति एवं विकास का वातावरण और अधिक प्रबल होता दिख रहा है. जन-सुरक्षा के दृष्टिकोण से जंगलों और रास्तों पर संदिग्ध वस्तु, व्यक्ति या गतिविधि दिखने पर तत्काल सूचना देने की अपील की गई.

सायबर अपराधों को लेकर भी किया जागरूक

चलित थाना के माध्यम से ग्रामीणों की शिकायतें दर्ज कर त्वरित निराकरण के प्रयास किए गए. इसके अलावा साइबर अपराधों पर भी विशेष जागरूकता दी गई, जिसमें एटीएम व यूपीआई धोखाधड़ी, ऑनलाइन ठगी एवं पहचान दुरुपयोग से बचने के तरीके समझाए गए।.महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा से संबंधित नए कानूनों के प्रावधानों पर भी ग्रामीणों को सूचना दी गई.

आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति क्या है

छत्तीसगढ़ में 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा के बाद विष्णुदेव साय सरकार ने मार्च 2025 में नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति की घोषणा की थी. इस नीति के तहत नियद नेल्लानार योजना (आपका अच्छा गांव) और पूना मारगेम (पुनर्वास से पुनर्जीवन) योजनाएं शुरू की गई. इसके तहत सरेंडर नक्सलियों को जमीन, आवास, नौकरी और कई सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है. इसके साथ साथ बस्तर के अंदरूनी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाओं का भी विस्तार हो रहा है.

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