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ऐसा अद्भुत मंदिर जहां विराजमान 1008 भगवान, हाथी-घोड़े और रथ पर आते हैं श्रद्धालु

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टीकमगढ़: टीकमगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर स्थित बड़ागांव धसान में जैन समाज ने अद्भुत और विशाल मंदिर बनवाया है. बुंदेलखंड ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने से भक्त यहां पहुंचते हैं. ये जैन समाज का प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ स्थल हरेक धर्म के लोगों की आस्था का केंद्र बन गया है.

दिव्य मंदिर में 1008 प्रतिमाएं विराजमान

बड़ागांव धसान में जैन धर्मावलंबियों द्वारा बनवाए इस भव्य और दिव्य मंदिर में 1008 प्रतिमाएं विराजमान हैं. यहां 21 फीट ऊंची पद्मासन अरिष्ट निवारक मुनिसुब्रतनाथ भगवान और 24 तीर्थंकर भगवान आदि जिनबिंबो की प्राणप्रतिष्ठा का आयोजन संपन्न हुआ. फिलहाल यहां गजरथ महोत्सव सहित विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन हो रहा है. इस आयोजन में देश के हर हिस्से से भक्त पहुंचे हैं.

हाथी-घोड़े और रथ से पहुंचे श्रद्धालु

आचार्य उदार सागर के ससंघ सानिध्य में चल रहे पंचकल्याणक महामहोत्सव में प्रतिदिन दूरदराज से जैन- जैनेत्तर लोग हजारों की संख्या में एकत्रित हो रहे हैं और भगवान की प्राण प्रतिष्ठा में सम्मिलित होकर भावविभोर हो रहे हैं. यहां प्रतिदिन सुबह 6 बजे से ही बाहर से आये हुए जैन विद्वान द्वारा भगवान का गाजे बाजे के साथ अभिषेक, पूजन- विधान महाराज श्री के प्रवचन कर रहे हैं.

रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी धूम

पंचकल्याणक महोत्सव में सुबह से ही धार्मिक क्रियाओं के साथ दिनभर भक्तिभाव से भगवान की लीलाओं का मंचन किया जाता है और रात्रि में भगवान की आरती के बाद विद्वानों द्वारा धर्मोपदेश के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं. यहां विल्सन जादूगर केरला का मायाजाल, भजन संध्या, कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रम का आयोजन हुआ.

महामहोत्सव में पाषाण से बनेंगे भगवान

श्रीमज्जिनेन्द्र जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रत्येक प्रतिमा में संस्कार विधि के माध्यम से प्राणप्रतिष्ठा की जाती है. इसमें सौंदर्य इंद्र, इंद्र-इंद्राणी, अष्ट कुमारी, 56 कुमारियां, यज्ञनायक, महायज्ञनायक, कुबेर द्वारा संस्कार किये जाते हैं. पंचकल्याणक महोत्सव में पात्रों द्वारा मंचन किया जाता है. इस मंचन द्वारा पाषाण की प्रतिमा में पाषाण से भगवान बनाने के लिए गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष का मंत्र और यंत्र के द्वारा संस्कारों का रोपण किया जाता है.

मंत्रों से देते हैं विशेष संस्कार

यंत्रों के द्वारा ऊर्जा प्रवाहित की जाती है मंत्रों के द्वारा संस्कार दिए जाते हैं और तंत्रों के द्वारा संस्कारों का बीजारोपण किया जाता है, जो अरिहंत भगवान 46 गुणों से युक्त होते हैं. मुनि महाराजों द्वारा सूर्यमंत्र दिया जाता है, जो बहुत खास होता है. भगवान की प्राणप्रतिष्ठा ही मुख्य आधार होती है. ख्यातिप्राप्त प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी पं जय कुमार निशांत ने बताया “बड़ागांव का यह मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है. बुंदेलखंड में अनेक तीर्थ स्थलों में जैन तीर्थ स्थल पपौरा जी, अहार जी है, जो देश दुनिया में प्रसिद्ध हैं.”

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