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बुरहानपुर में लावारिस शवों के वारिश बने पूर्व पार्षद, सैकड़ों शवों का कर चुके हैं अंतिम संस्कार

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बुरहानपुर: इंसानियत ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है, इस वाक्य को बुरहानपुर के अमर यादव ने चरितार्थ कर दिखाया है. आमतौर पर लावारिस और असहाय लोगों की मदद हर कोई करना नहीं चाहता है. कई लोग चाहते हैं तो उनके भाग्य में नहीं होता है, लेकिन चिंचाला वार्ड के पूर्व पार्षद अमर यादव करीब डेढ़ दशक से लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं.

सैकड़ों लोगों का कर चुके हैं अंतिम संस्कार

बुरहानपुर के लालबाग स्थित रेलवे स्टेशन के आसपास ट्रेन से गिरकर या कटकर अकसर लोगों की मौत हो जाती है. ऐसे लावारिस शवों को उठाने वाला और उन्हें अंतिम संस्कार देने वाला कोई नहीं होता है. ऐसे लावारिस शवों का अमर यादव अंतिम संस्कार करते हैं. पुलिस भी लावारिस शव इन्हें अंतिम संस्कार के लिए दे जाती है. अमर यादव अब तक 150 लावारिस शवों का विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार कर चुके हैं.

पुलिस भी अंतिम संस्कार के लिए देती है शव

उनकी एक छोटी टीम है, जिसमें में गणेश दुनगे, अजय सिंह वर्मा, संजय जैन और रूपचंद वाधवानी शामिल हैं, जो आपस में मिलकर नेक कार्य को कर रहे हैं. पूर्व पार्षद ने एक ऐसा काम अपने हाथों में थामा है, जिसे समाज के किसी भी तबके के लिए गौरवान्वित करने वाला है. लालबाग स्थित रेलवे स्टेशन के आसपास एक दर्दनाक सच्चाई छिपी है, यहां कई बार ट्रेन से गिरकर या कटकर कई लावारिस और असहाय लोगों की मौत हो जाती है.

शवों को कुत्ते जमीन से निकाल लेते थे

इन बेनाम शवों के पास न कोई रिश्तेदार, न ही कोई उन्हें अंतिम सम्मान देने को तैयार रहता है, ऐसे में अमर यादव इस काम को पूरा करते हैं. चिंचाला वार्ड के पूर्व पार्षद अमर यादव बताते हैं कि “वह बचपन में गाय और भैंस चराया करते थे. इस दौरान कई बार लोगों को लावारिस शवों को दफनाते हुए देखा है. दफनाए गए शवों कुत्ते निकाल लेते थे. यह दृश्य मन को काफी विचलित करता था. जिसके बाद बेनाम शवों के लिए कुछ करने की तमन्ना जागी थी. ईश्वर ने इस काबिल बना दिया, अब तक लावारिस और असहाय 150 से ज्यादा लोगों का अंतिम संस्कार कर चुका हूं.”

पेश की मानवता की मिसाल

खास बात यह है कि यह सब कुछ उन्होंने अपनी निजी आय से किया है, वह बिना किसी सरकारी मदद या सामाजिक संगठन की सहायता के इस काम को निभाने में जुटे हैं. अमर यादव यह सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि एक मिशन है. चाहे किसी का कोई न हो, कोई हो या बिल्कुल अकेला, वह सुनिश्चित करते हैं कि हर शव को सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाए. निस्वार्थ कार्य ने बुरहानपुर शहर में एक नई मिसाल स्थापित की है.उनकी टीम का यह काम साबित करता है कि धर्म सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि कर्मों में निहित होता है, अमर यादव की नजर में हर शव एक इंसान है और हर इंसान सम्मान का हकदार, वह न सिर्फ अंतिम संस्कार कराते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि समाज के इस भूले-बिसरे तबके को कम से कम मरने के बाद तो किसी की दया न देखना पड़े. ऐसे समय में जब समाज में असमानता और भेदभाव का जहर फैल रहा है, अमर यादव जैसे लोग वह रोशनी हैं जो दिखाती है कि इंसानियत अभी भी जीवित है.

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