Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
जबलपुर में महिला आरक्षक से पहचान छिपाकर दुष्कर्म और धर्मांतरण का दबाव, एसपी दफ्तर पहुंची पीड़िता नेपाल में कांवड़ यात्रा से पहले झंडे को लेकर भड़की हिंसा: भारत सीमा से लगे 5 जिलों में कर्फ्यू, सरका... अर्ली मेनोपॉज और हाई ब्लड प्रेशर का क्या है कनेक्शन? एक्सपर्ट से जानें एस्ट्रोजन हार्मोन का असर और ब... IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, जानें किन पुख्ता सबूतों पर कोर्ट ने सु... पूर्णिया में बदल रही गांवों की तस्वीर: PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से 281 परिवारों का बिजली बिल हु... हरिद्वार कांवड़ यात्रा में बड़ा हादसा: जटवाड़ा पुल के पास गंगनहर में डूबने से चंडीगढ़ के 4 कांवड़ियो... संत रविदास के 650वें जयंती वर्ष पर भदोही बना 'संत रविदास नगर', सीएम योगी ने की सांस्कृतिक पुनर्स्थाप... बिहार विधान परिषद में बड़ा उलटफेर: बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार ने दिया इस्तीफा, मंत्री दीपक प्रकाश के ... असम के शिलचर में बड़ा हादसा: पानी की टंकी की सफाई के दौरान दम घुटने से 4 लोगों की मौत; इलाके में शोक कटनी में 11 साल पुरानी जर्जर सड़क का केक काटकर मनाया जन्मदिन! कांग्रेस का प्रशासन के खिलाफ अनोखा विर...

पंजाब के पूर्व मंत्री की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, नोटिस जारी

31

चंडीगढ़: पंजाब की सियासत में एक बार फिर हलचल देखने को मिली है। दरअसल, राज्य सरकार ने पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की याचिका पर आशू को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस कदम से एक बार फिर आशू के खिलाफ चर्चाएं तेज हो गई हैं क्योंकि हाईकोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में उनके खिलाफ दर्ज की गई एफ.आई.आर. को रद्द कर दिया था। इस एफ.आई.आर. में 2 जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक अधिकारी और एक ठेकेदार भी सह-आरोपी बनाए गए थे। सरकार का दावा है कि 2020-21 की पंजाब फूडग्रेन लेबर एंड कार्टेज पॉलिसी में मनमाने तरीके से संशोधन कर पसंदीदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया और रिश्वत लेकर टेंडर बांटे गए।

वहीं, हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि नीति संशोधन को पहले ही डिवीजन बेंच द्वारा सही माना जा चुका है और ठेकों को कैबिनेट और वित्त विभाग की मंज़ूरी भी प्राप्त थी। इसलिए केवल मंत्री को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले के नए पहलू सामने आने की उम्मीद है, जो न सिर्फ़ आशू की राजनीतिक साख बल्कि सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी दावेदारी के लिए भी बड़ी कसौटी साबित हो सकता है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.