Angiography vs Angioplasty: एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी में क्या है अंतर? कार्डियोलॉजिस्ट से समझें पूरा सच
शहडोल। दिल को सेहतमंद रखने के लिए उसके कामकाज और बीमारियों से जुड़ी सही जानकारी होना बेहद जरूरी है। हृदय रोग एक ऐसी स्थिति है, जिसमें जितनी जल्दी बीमारी का पता चल जाए, मरीज की जान का जोखिम उतना ही कम किया जा सकता है। इसमें की गई थोड़ी सी भी देरी जीवन के लिए बड़ी भूल साबित हो सकती है। दिल की बीमारियों से जुड़े भ्रम और छोटी-बड़ी बारीकियों को लेकर प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर अतुल दुबे ने महत्वपूर्ण चिकित्सीय सलाह साझा की है, जो आपात स्थिति में किसी की जान बचा सकती है।
🩺 एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी में क्या है मुख्य अंतर?: एक जांच है तो दूसरा इलाज
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अतुल दुबे बताते हैं कि एंजियोग्राफी (Angiography) मूल रूप से केवल एक जांच प्रक्रिया (Diagnostic Test) है।
जिन मरीजों को लंबे समय से छाती में दर्द, अत्यधिक सांस फूलने की शिकायत होती है या हाल ही में हार्ट अटैक आया हो, उनमें विशेष डाई (Dye) के माध्यम से हृदय की धमनियों (Coronary Arteries) में ब्लॉकेज का प्रतिशत देखा जाता है। वहीं दूसरी ओर, एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) एक उपचार (Treatment) है। धमनियों के ब्लॉकेज को खोलने के लिए दो मुख्य तरीके होते हैं—पहला एंजियोप्लास्टी (जिसमें स्टेंट/छल्ला डाला जाता है) और दूसरा बाईपास सर्जरी (CABG)।
🔬 क्या एंजियोग्राफी के बाद एंजियोप्लास्टी कराना हमेशा जरूरी है?: 70% ब्लॉकेज का यह है नियम
डॉ. अतुल दुबे के अनुसार, एंजियोग्राफी के बाद हर मरीज को स्टेंट लगाने की आवश्यकता नहीं होती। इसके लिए डॉक्टर 3-4 मुख्य कारकों का आकलन करते हैं:
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लक्षण और दैनिक जीवन: मरीज को सामान्य कामकाज के दौरान छाती में कितना दर्द हो रहा है और हाल ही में हार्ट अटैक आया है या नहीं।
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पंपिंग और वॉल्व की स्थिति: ईसीजी (ECG) और इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography) से यह देखा जाता है कि हार्ट की पंपिंग क्षमता कितनी है और वॉल्व में लीकेज तो नहीं है।
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ब्लॉकेज का प्रतिशत: यदि धमनियों में ब्लॉकेज 70% से कम है, तो दवाइयों (Medicines) से भी बेहतरीन इलाज संभव है। लेकिन यदि ब्लॉकेज 70% से अधिक है, मरीज को गंभीर दर्द है या वह हार्ट अटैक के साथ आया है, तो एंजियोप्लास्टी करके स्टेंट (Stent) डालना और ब्लॉकेज को खोलना आवश्यक हो जाता है।
⚠️ शरीर के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज: जानिए कब तुरंत एंजियोग्राफी कराना है जरूरी
यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से डायबिटीज (Sugar), हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल या परिवार में कार्डियक हिस्ट्री रही हो, तो उसे विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
जब भी छाती में ऐसा दर्द हो जो जबड़े या बाएं हाथ की तरफ फैल रहा हो, साथ में उल्टी/जी मिचलाना, अत्यधिक सांस फूलना, चक्कर आना या अत्यधिक थकावट महसूस हो, तो बिना देर किए नजदीकी डॉक्टर या कैथलैब सुविधा वाले अस्पताल जाना चाहिए। सबसे पहले ईसीजी (ECG) कराना चाहिए ताकि समय रहते हार्ट अटैक की पुष्टि हो सके।
💊 घर पर अचानक हार्ट अटैक आ जाए तो क्या करें?: ‘लोडिंग डोज’ से बचाई जा सकती है मरीज की जान
यदि घर पर या आसपास किसी व्यक्ति को अचानक हार्ट अटैक का दौरा पड़ता है, तो प्राथमिक उपचार (First Aid) के रूप में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र (PHC) या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डॉक्टर के परामर्श से मरीज को ‘लोडिंग डोज’ (Loading Dose) दी जाती है, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित दवाएं शामिल होती हैं:
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एस्पिरिन (Aspirin): 325 mg
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क्लोपिडोग्रेल (Clopidogrel): 300 mg
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एटोरवास्टैटिन (Atorvastatin): 80 mg
यह लोडिंग डोज खून के थक्के (Blood Clots) को जमने से रोकती है और मरीज को इतना समय दे देती है कि उसे सुरक्षित रूप से किसी बड़े कार्डियक अस्पताल (जहाँ एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की सुविधा हो) तक पहुँचाया जा सके।
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