ICRA Report On OMCs: सरकारी तेल कंपनियों को रोज ₹530 करोड़ का नुकसान; इक्रा की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी के बीच घरेलू ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की खुदरा कीमतों में बदलाव न होने के कारण सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लगातार घाटा हो रहा है। कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग ₹8 प्रति लीटर और डीजल पर ₹9 प्रति लीटर का नुकसान झेलना पड़ रहा है। वर्तमान स्तरों पर इन तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन करीब ₹530 करोड़ का कुल घाटा होने का अनुमान है।
🛢️ पश्चिम एशिया तनाव से क्रूड ऑयल के दाम उछले: भारतीय क्रूड बास्केट $117 के पार पहुँची
इक्रा में कॉरपोरेट सेक्टर रेटिंग्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं को-ग्रुप हेड प्रशांत वशिष्ठ ने रिपोर्ट में बताया कि पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्ष और प्रमुख तेल आपूर्ति मार्गों में व्यवधान के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में भारी उछाल आया है।
भारत द्वारा आयात किए जाने वाले क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत 21 सितंबर 2026 को बढ़कर 117.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई। तुलनात्मक रूप से, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय क्रूड बास्केट का औसत मूल्य लगभग 66 डॉलर प्रति बैरल ही था।
📊 रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत, फिर भी कैश फ्लो और प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ रहा बुरा असर
रिपोर्ट के अनुसार, रिफाइनिंग मार्जिन में मजबूती के बावजूद कंपनियों की ओवरऑल वित्तीय स्थिति पर अत्यधिक दबाव बना हुआ है।
सिंगापुर का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) 10 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है, जिसे रिफाइनरी शटडाउन और सप्लाई रुकावटों से समर्थन मिला है। हालाँकि, कच्चे तेल और पेट्रो उत्पादों की ऊँची कीमतों के कारण ओएमसी की लाभप्रदता (Profitability) और नकदी प्रवाह (Cash Flow) प्रभावित होने की आशंका है। वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनियों को अल्पकालिक कर्ज (Short-term Debt) पर निर्भरता बढ़ानी पड़ सकती है।
🔥 घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर भी घाटा जारी: प्रति सिलेंडर ₹300 की अंडर-रिकवरी
पेट्रोल और डीजल के अलावा रसोई गैस (LPG) भी तेल कंपनियों के लिए चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें बढ़ने से 30 जून तक कुल नेगेटिव एलपीजी बफर ₹61,940 करोड़ तक पहुँच गया। इक्रा के आकलन के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में हर घरेलू सिलेंडर पर लगभग ₹500 का नुकसान हो रहा था, जो सितंबर महीने में घटकर करीब ₹300 प्रति सिलेंडर रह गया है। इसके अलावा, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर निर्यात शुल्क (Export Duty/SAED) भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं।
📈 सरकार से मिलने वाली राहत और रिटेल दामों पर निर्भर करेगी कंपनियों की आगे की कमाई
इक्रा के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति और कमाई मुख्यतः चार प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी:
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की भावी कीमतें।
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रिफाइनिंग और प्रोडक्ट क्रैक मार्जिन।
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घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की रिटेल कीमतों में संभावित संशोधन।
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एलपीजी अंडर-रिकवरी के एवज में केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता या सब्सिडी।
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