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जब पहली बार मॉरीशस गए थे नरेंद्र मोदी, जानें क्यों याद की जा रही 1998 की वो यात्रा

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पीएम मोदी का 11 मार्च से मॉरीशस दौरा शुरू हो रहा है. भारत और मॉरीशस इतिहास, संस्कृति, भाषा से खास जुड़ाव है. यही वजह है कि मॉरीशस को मिनी इंडिया भी कहा जाता है. मॉरीशस और भारत के इसी खास और गहरे रिश्ते की गवाह प्रधानमंत्री मोदी की कुछ ऐसी तस्वीरें हैं. साल 1998 में नरेंद्र मोदी ने पहली बार मॉरीशस की यात्रा की थी. ‘मोदी आर्काइव’ इस यात्रा की तस्वीरें शेयर की हैं. इस पोस्ट में कहा है, एक शताब्दी से भी पहले हमारे पूर्वज वहां मजदूर के रूप में गए थे. वो अपने साथ तुलसीदास की रामायण, हनुमान चालीसा और हिंदी भाषा ले गए थे. मगर, एक और संबंध है – जो 27 वर्ष पुराना है. 1998 में जब नरेंद्र मोदी पहली बार मॉरीशस गए थे.

प्रधानमंत्री मोदी के मॉरीशस के साथ संबंध उस समय से हैं जब वो किसी सार्वजनिक पद पर नहीं थे और भाजपा के लिए अथक परिश्रम करते थे. 2 से 8 अक्टूबर 1998 के बीच नरेंद्र मोदी मोका में अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन को संबोधित करने के लिए मॉरीशस गए थे. उस समय भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने भगवान राम के मूल्यों के बारे में बात की और बताया कि कैसे रामायण भारत और मॉरीशस को एक शाश्वत सभ्यतागत आलिंगन में जोड़ने वाले सेतु के रूप में कार्य करती है.

1998 की अपनी यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी मॉरीशस के लोगों से जुड़े. उनकी आकांक्षाओं को समझा और ऐसी मित्रता बनाई जो आज भी कायम है. उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति कासम उतीम, प्रधान मंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम और विपक्ष के नेता अनिरुद्ध जगन्नाथ सहित प्रमुख नेताओं के साथ बातचीत की. उन्होंने पॉल रेमंड बेरेन्जर से भी मुलाकात की, जो बाद में मॉरीशस के प्रधानमंत्री बने.

नरेंद्र मोदी ने ये जाना कि किस तरह मॉरीशस का स्वतंत्रता संघर्ष भारत के अपने स्वतंत्रता संग्राम का प्रतिबिम्ब है. इस यात्रा के दौरान उन्होंने सर शिवसागर रामगुलाम वनस्पति उद्यान में राष्ट्रपिता सर शिवसागर रामगुलाम को श्रद्धांजलि अर्पित की. 12 मार्च 2015 को मॉरीशस में विश्व हिंदी सचिवालय भवन में भवन निर्माण आरंभ को संबोधित करते हुए उन्होंने महात्मा गांधी और मॉरीशस के बीच गहरे संबंधों पर बात की.

उन्होंने बताया कि किस प्रकार गांधीजी का प्रभाव भारत से बाहर भी फैला और उन्होंने प्रवासी भारतीयों के विचारों और आकांक्षाओं को आकार दिया.मोदी ने कहा कि इस संबंध का सबसे मजबूत प्रतीक अखबार ‘हिंदुस्तानी’ है, जो मॉरीशस में एकता और भाषाई सद्भाव के लिए एक शक्तिशाली आवाज के रूप में उभरा है. महात्मा गांधी के आदर्शों से प्रेरित होकर अखबार ने एक सदी से भी पहले त्रि-भाषा (गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी) फार्मूला अपनाया था. यह एक एकीकृत शक्ति बन गई, जिसने भाषायी विभाजनों के पार लोगों को एक साथ लाया और उनकी साझा पहचान को मजबूत किया.

गांधीजी के साथ इस जुड़ाव को नरेंद्र मोदी ने 1998 की अपनी यात्रा के दौरान प्रत्यक्ष रूप से देखा था. गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर उन्होंने मॉरीशस में प्रवासी भारतीयों से बातचीत की और महात्मा के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा को महसूस किया. अपने 2015 के भाषण में इस क्षण को याद करते हुए उन्होंने कहा, मॉरीशस में आज भी 2 अक्टूबर मनाया जाता है. वहां जिस तरह का जश्न मनाया जाता है, वैसा हमारे यहां भी नहीं मनाया जाता. मुझे सभी के साथ 2 अक्टूबर मनाने का अवसर मिला. आज भी उनके यहां भी हमारी तरह एक महात्मा मंदिर है, जो ऐसे आयोजनों का केंद्र है. गांधी ऑडिटोरियम विभिन्न गतिविधियों का केंद्र है. यहां अपनेपन की भावना है.

1998 में गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर मोदी ने महात्मा गांधी के बारे में बोलने के लिए उनके भजनों की एक पुस्तक मांगी, जिसमें विशेष रूप से नरसिंह मेहता के “वैष्णव जन तो” और गांधी के आदर्शों को रामायण से जोड़ना शामिल था. हालांकि, यह किताब महात्मा गांधी संस्थान में उपलब्ध नहीं थी और मॉरीशस में इसे ढूंढना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ. काफी प्रयास के बाद यह एक निजी पुस्तकालय में मिली. नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान पुस्तक के कई अंश का जिक्र किया.

1998 की यात्रा केवल आधिकारिक बैठकों तक सीमित नहीं थी. उन्हें उस भूमि उसके इतिहास और उसके लोगों को समझने में समय लगा. उन्होंने पवित्र गंगा तालाब का दौरा किया, जहां उन्होंने देखा कि किस प्रकार हिंदू परंपराएं भारत के बाहर भी फल-फूल रही हैं. प्रवासी भारतीय दिवस 2015 में इस जुड़ाव को याद करते हुए मोदी ने कहा, अगर कोई एक जगह है जो पूरे मॉरीशस को जोड़ती है, तो वो है गंगा सागर.

उन्होंने कहा, इस तालाब का निर्माण मॉरीशस के निवासियों ने किया था, लेकिन उन्होंने गंगा से पानी लाकर तालाब में डाला. पानी की मात्रा भले ही कम हो लेकिन इससे जुड़ी भावनाओं और भक्ति ने इसे एक अलग आयाम दिया है. लोगों के लिए यह गंगा का प्रतिनिधित्व करता है और आज भी इसके तट पर शिवरात्रि मेला आयोजित किया जाता है और भारतीय मूल की पूरी आबादी को एक साथ लाता है. भारत से दूर गंगा के नाम से एक तालाब आज भी मॉरीशस को अपनी सांस्कृतिक विरासत को जगाने के लिए प्रेरित करता है.

अपनी पहली यात्रा के 17 साल बाद मोदी ने 12 मार्च 2015 को एक बार फिर गंगा तालाब पर खड़े होकर मां गंगा को पुष्प अर्पित किए. 2015 में मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस पर वहां के लोगों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा था, भाइयों और बहनों आम की फसल अच्छी है या नहीं, यह जानने के लिए हर एक फल को जांचने की जरूरत नहीं है. सिर्फ एक या दो फलों को चखने से ही पूरी फसल की गुणवत्ता का पता चल जाता है. इसी तरह अगर दुनिया मॉरिशस को देखे तो उसे भारत की एक झलक मिल जाएगी. भारत के लोग कैसे होंगे? अगर नमूना इतना असाधारण है, तो पूरे देश की महानता की कल्पना कीजिए.

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