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बीजेपी को जहां कभी नहीं मिली सत्ता, वहां के लिए संघ बनाएगा फुलप्रूफ प्लान, कर्नाटक में तय होगा 100 साल का एजेंडा

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बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार चुनाव की सियासी तपिश के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कर्नाटक के बेंगलुरु में बड़ी बैठक होली के बाद होने जा रही है. संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख की बैठक तीन दिनों तक चलेगी, जिसमें आरएसएस के 100 साल के कार्य विस्तार की समीक्षा के साथ-साथ आगामी 100 सालों के लिए विभिन्न कार्यक्रमों, आयोजन और अभियानों की रूपरेखा तैयार की जाएगी. यही नहीं संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आगामी राज्यों के चुनाव का फुलप्रूफ प्लान तैयार किया जा सकता है.

आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि संघ के अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक बेंगलुरु में 21, 22 और 23 मार्च को होगी. संघ की कार्य पद्धति में यह निर्णय करने वाली सर्वोच्च इकाई है और साल में एक बार इसकी बैठक होती है. इस बार बैठक बैंगलुरु के चन्नेनहल्ली में स्थित जनसेवा विद्या केंद्र परिसर में होगी. संघ के सौ साल 2025 में पूरे हो रहे हैं. ऐसे में आरएसएस की बेंगलुरु में होने वाली प्रतिनिधि सभा की बैठक काफी अहम मानी जा रही है.

संघ की बैठक में कौन-कौन होगा शामिल

सुनील आंबेकर के मुताबिक, बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित सभी सह सरकार्यवाह और अन्य पदाधिकारियों सहित कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित रहेंगे. संघ के 45 प्रांत के साथ-साथ सभी क्षेत्र के क्षेत्र प्रमुख, प्रांत प्रमुख मौजूद रहते हैं. इसके अतिरिक्त संघ के सभी 32 सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे, जिसमें बीजेपी से लेकर विश्व हिंदू परिषद, भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, राष्ट्र सेविका समिति जैसे सभी संगठन के पदाधिकारी शिरकत करेंगे. मुख्य रूप से निर्वाचित प्रतिनिधि, प्रांत व क्षेत्र स्तर के 1480 कार्यकर्ता अपेक्षित हैं. बैठक में संघ प्रेरित विविध संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, महामंत्री एवं संगठन मंत्री भी शामिल होंगे.

बीजेपी की बंजर जमीन पर खिलेगा कमल

आरएसएस की प्रतिनिधि सभा की बैठक में देश के ज्वलंत मुद्दों के साथ बिहार, पश्चिम बंगाल , तमिलनाडू और केरल जैसे राज्य के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के जीत की रणनीति बनाई जाएगी. पश्चिम बंगाल और केरल की सियासी जमीन बीजेपी के लिए अभी भी पथरीली बनी हुई है तो बिहार में जेडीयू के सहारे की सत्ता का स्वाद चखती रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी जहां पर कभी भी सत्ता में नहीं आ सकी है, उन राज्यों में बीजेपी के जीत की इबारत कर्नाटक की बेंगलुरु में लिखी जाएगी.

साल 2025 के आखिर में बिहार विधानसभा चुनाव होने हैं जबकि 2026 में पश्चिम बंगाल असम, केरल, तमिलनाडू और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं. बीजेपी असम छोड़कर किसी भी राज्य में अभी तक अपने दम पर सत्ता में नहीं आ सकी है. बंगाल, केरल और तमिलनाडु की सियासी जमीन बीजेपी के लिए बंजर ही रही है, लेकिन संघ उसे उपजाऊ बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रहा है. RSS की प्रतिनिधि सभा की बैठक से पहले मोहन भागवत बिहार, केरल और पश्चिम बंगाल का दौरा कर सियासी नब्ज की थाह ले चुके हैं.

मोहन भागवत ने 10 दिनों तक पश्चिम बंगाल में रहकर सियासी जायजा लिया था. इस दौरान उन्होंने पश्चिम मेदिनीपुर, हावड़ा, कोलकाता और उत्तर-दक्षिण 24 परगना जिले के आरएसएस कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थी. फरवरी में ही मोहन भागवत ने केरल का चार दिवसीय दौरा किया था. भागवत अब पांच दिन के बिहार दौरे पर हैं. इस तरह समझा जा सकता है कि संघ के लिए बंगाल असम, केरल, तमिलनाडू और पुडुचेरी कितना अहम है. संघ ने जिस तरह लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी के लिए सियासी बूस्टर का काम किया है, उसके चलते माना जा रहा है कि संघ आगामी राज्यों के लिए जीत का मंत्र तैयार करेगा.

बीजेपी के नए अध्यक्ष का चुनाव

हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में जीत के बाद बीजेपी में इन दिनों अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की खोजबीन में है. कई नाम दक्षिण से भी चर्चा में हैं. माना जा रहा है कि 20 मार्च तक नए अध्यक्ष का ऐलान हो जाएगा. बीजेपी के नए अध्यक्ष के नाम पर मुहर लग जाती है तो संघ के प्रतिनिधि सभा की बैठक में वो शामिल हो सकते हैं. जेपी नड्डा के अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है और अब उनकी जगह नए चेहरे की तलाश है. बीजेपी के अध्यक्ष के नाम को फाइनल करने में संघ का अहम रोल होता है. संघ की पसंद का ख्याल भी रखा जाता है.

संघ बनाएगा अगले 100 साल का प्लान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि आगामी विजयादशमी (दशहरा) 2025 को संघ के सौ साल पूरे हो रहे हैं. इस निमित्त विजयादशमी (दशहरा) 2025 से 2026, यह संघ शताब्दी वर्ष माना जाएगा. बैठक में शताब्दी वर्ष के कार्य विस्तार की समीक्षा के साथ-साथ आगामी शताब्दी वर्ष के विभिन्न कार्यक्रमों एवं आयोजन तथा अभियानों की रूपरेखा तैयार की जाएगी. इस तरह संघ अगले 100 साल का प्लान तैयार करेगा कि वो किस दिशा में आगे बढ़ेगा और किन एजेंडों पर काम करेगा.

संघ की इस बैठक में राष्ट्रीय विषयों पर दो प्रस्तावों पर विचार होगा. साथ ही संघ शाखाओं द्वारा अपेक्षित सामाजिक परिवर्तन के कार्यों सहित विशेष रूप से पंच परिवर्तन के प्रयासों की चर्चा अपेक्षित है. हिंदुत्व जागरण सहित देश के वर्तमान परिदृश्य के विश्लेषण और करणीय कार्यों की चर्चा भी बैठक की विषय सूची में शामिल है.

संघ की इस बैठक में भारत में एनआरसी के कार्यान्वयन के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है. संघ इस पर विचार-विमर्श कर सकता है कि इसे कुछ राज्यों में कैसे किया जाना चाहिए. देश में अवैध घुसपैठ का मुद्दा है, जिसे संघ से लेकर बीजेपी तक उठाती रही है. किसी मुद्दे पर प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए या नहीं, यह बैठक के दौरान तय किया जाता है. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वरिष्ठ नेता इस मुद्दे को आगे कैसे उठाते हैं, वे इस पर क्या निर्णय लेते हैं.

आरएसएस के प्रतिनिधि मंडल की बैठक में मुद्दों पर चर्चा किए जाने के बाद निर्णय न केवल संघ को अगले वर्ष के लिए दिशा देते हैं, बल्कि सरकार को यह संकेत भी देते हैं कि वह नीतिगत स्तर पर क्या लागू करना चाहती है. झारखंड विधानसभा चुनाव के बीच केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि सरकार राज्य में एनआरसी लागू करना सुनिश्चित करेगी. इसके अलावा यूसीसी को लागू करने की दिशा में भी संघ अहम फैसला ले सकता है. संघ हमेशा देश में एनआरसी लागू होने और एक देश एक कानून की बात करता रहा है.

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