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भोपाल में सफाईकर्मियों की हड़ताल का तीसरा दिन, पानी सप्लाई भी ठप होने की चेतावनी— शहर में गहराया कचरे का संकट

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भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेशभर के तमाम नगरीय निकायों के सफाईकर्मी अपने नियमितीकरण, अनुकंपा नियुक्ति, ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने और न्यूनतम वेतन 25 हजार रुपये करने जैसी प्रमुख मांगों को लेकर पिछले दो दिनों से जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं। गुरुवार को इन सफाईकर्मियों की हड़ताल का तीसरा दिन है। अब स्थिति यह हो गई है कि सफाईकर्मियों के इस आंदोलन को नगरीय निकायों के अन्य विभागों में कार्यरत कर्मचारियों का भी खुला समर्थन मिलना शुरू हो गया है। एक तरफ जहाँ सफाईकर्मियों के समर्थन में पहले से ही यांत्रिक वाहन कर्मचारी संघ हड़ताल पर डटा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ अन्य सहयोगी संगठनों ने भी शुक्रवार से काम-बंद हड़ताल पर जाने की कड़ी चेतावनी दे दी है।

जल आपूर्ति भी हो सकती है प्रभावित, वॉटर सप्लाई के कर्मचारियों के समर्थन में उतरने से मंडराया पानी का बड़ा संकट

सफाईकर्मियों के इस आंदोलन के साथ अब नगरीय निकायों के अन्य विभागों में पदस्थ कर्मचारी भी पूरी तरह से जुड़ने लगे हैं। ‘मध्य प्रदेश नगरीय निकाय स्वास्थ्य अधिकारी और स्वच्छता निरीक्षण कर्मचारी कल्याण महासंघ’ ने भी ‘अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस’ ट्रेड यूनियन के बैनर तले चल रहे सफाई कर्मचारियों के इस आंदोलन को अपना समर्थन दे दिया है। इसके साथ ही, जल आपूर्ति (वाटर सप्लाई) से जुड़े कर्मचारियों ने भी गुरुवार से इस आंदोलन के समर्थन में उतरने की घोषणा कर दी है। यदि ऐसा होता है, तो आने वाले समय में राजधानी वासियों को साफ-सफाई के साथ-साथ गंभीर जल संकट का भी सामना करना पड़ सकता है।

मंत्रालय में घंटों चली उच्चस्तरीय बैठक रही बेनतीजा, नियमितीकरण को कैबिनेट का विषय बताकर फाइल वित्त विभाग भेजने पर अड़े अधिकारी

बीते बुधवार की शाम को मंत्रालय के भीतर अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे, नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे और नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के साथ कर्मचारी नेताओं की एक लंबी बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में अधिकारियों ने कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को सीधे तौर पर कैबिनेट से जुड़ा हुआ नीतिगत विषय बताते हुए इसकी संबंधित फाइल वित्त विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग को भेजने की बात कही। हालांकि, उपस्थित कर्मचारी नेताओं को शासन का यह आश्वासन बिल्कुल मंजूर नहीं हुआ।

यूनियन नेताओं का कड़ा सवाल— जब अधिकारियों के पास निर्णय लेने का अधिकार नहीं था, तो वार्ता के लिए क्यों बुलाया गया?

सरकार और प्रशासन के रुख से नाराज यूनियन के नेताओं ने तीखा सवाल उठाया कि जब प्रशासनिक अधिकारियों के पास इन जायज मांगों पर मौके पर ही कोई ठोस निर्णय लेने का अधिकार ही नहीं था, तो फिर उन्हें बातचीत के नाम पर क्यों बुलाया गया था। इस प्रकार की टालमटोल की नीति और वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल को और अधिक आक्रामक तरीके से जारी रखने का खुला ऐलान कर दिया है। अब सभी कर्मचारी यूनियनें सीधे तौर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगों को मजबूती से रखने की तैयारी कर रही हैं।

निगम के लाख प्रयासों के बाद भी नहीं सुधर रही व्यवस्था, पिछले दो दिनों में भोपाल में करीब 2100 टन कचरा हुआ जमा

नगर निगम प्रशासन द्वारा शहर की सफाई व्यवस्था को किसी तरह सुचारू बनाए रखने के लिए गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों और आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से करीब 900 अतिरिक्त कर्मचारियों को मैदान में उतारा गया है, लेकिन इसका कोई खास और सकारात्मक असर धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। शहर के सभी 85 वार्डों में घर-घर से कचरा उठाने वाली गाड़ियां नहीं पहुँच पा रही हैं। सामान्य दिनों में राजधानी भोपाल से प्रतिदिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है, लेकिन दीपावली के इस त्योहारी सीजन के चलते यह मात्रा बढ़कर अब लगभग 1050 टन प्रतिदिन हो चुकी है। ऐसे में पिछले दो दिनों में ही शहर के भीतर करीब 2100 टन कचरा जमा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। गुरुवार को भी कचरा कलेक्शन पूरी तरह बंद रहने पर यह आंकड़ा बढ़कर सीधे 3150 टन तक पहुँच सकता है, जिससे रिहायशी बस्तियों से लेकर प्रमुख बाजारों तक में गंदगी का भारी अंबार लग गया है।

न्यू मार्केट के व्यापारियों ने खुद संभाली अपने बाजार की सफाई की कमान, अटल पथ पर निजी कर्मचारियों से सफाई कराने के दौरान हुआ विरोध

शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराने का सीधा असर अब भोपाल के प्रमुख व्यावसायिक बाजारों पर भी साफ दिखने लगा है। न्यू मार्केट क्षेत्र में जगह-जगह फैले कचरे और भीषण गंदगी से त्रस्त होकर व्यापारियों ने बुधवार को खुद ही अपने हाथों में सफाई की कमान संभाल ली। व्यापारी महासंघ के सचिव अजय अग्रवाल और स्वच्छता एंबेसडर रुचिका सचदेवा ने अन्य व्यापारियों के साथ मिलकर खुद सड़कों पर झाड़ू लगाई। वहीं दूसरी ओर, अटल पथ पर प्रशासन द्वारा निजी कर्मचारियों के माध्यम से सफाई कराने के प्रयासों का आंदोलनकारी कर्मचारियों ने जोरदार विरोध किया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने वहां मौजूद ड्राइवरों के साथ झड़प कर उन्हें खदेड़ दिया और किसी भी स्वीपिंग मशीन को संचालित नहीं होने दिया।

वाल्मीकि समाज ने भी दी आंदोलन में कूदने की चेतावनी, मांगें पूरी न होने पर प्रदेशभर में सफाई कार्य ठप करने का अल्टीमेटम

सफाई कर्मचारियों के चल रहे इस आंदोलन को अब ‘वाल्मीकि समाज’ का भी बड़ा और मजबूत समर्थन मिलने लगा है। बुधवार को सकल वाल्मीकि पंचायत वृत्त भोपाल के रवि चौधरी सीधे धरना स्थल पर पहुँचे और कर्मचारियों के इस संघर्ष को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने सरकार और प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते कर्मचारियों की इन सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो पूरा वाल्मीकि समाज इस आंदोलन में सक्रिय रूप से कूद पड़ेगा, और साथ ही पूरे प्रदेशभर में अनिश्चितकाल के लिए सफाई कार्य पूरी तरह बंद करा दिया जाएगा।

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