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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में 11,320 फीट की ऊंचाई पर बसा है बेहद खूबसूरत और शांत गांव चित्रकुल, भारत-तिब्बत सीमा का है आखिरी पड़ाव

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चित्रकुल: हिमाचल प्रदेश के सुदूर किन्नौर जिले में समुद्र तल से लगभग 11,320 फीट की ऊंचाई पर स्थित चित्रकुल को देश के सबसे शांत, सुकून भरे और खूबसूरत पहाड़ी इलाकों में शुमार किया जाता है। बास्पा घाटी की गोद में बसा यह गांव भारत और तिब्बत की सीमा पर स्थित देश का आखिरी छोर माना जाता है। यहाँ से कलकल बहती बास्पा नदी और चारों तरफ फैली हिमालय की बर्फीली व मनमोहक वादियां पर्यटकों का मन मोह लेती हैं। यात्रा प्रेमी देवांश शर्मा ने सोशल मीडिया पर इस जगह की खूबसूरती का जिक्र करते हुए बताया कि चित्रकुल पूरी तरह से शांत और पहाड़ों की आगोश में बसा है, और ऐसा माना जाता है कि यहां की आबोहवा पूरे देश में सबसे शुद्ध और साफ है। उन्होंने यहाँ के प्रसिद्ध ‘हिंदुस्तान का आखिरी ढाबा’ का भी विशेष रूप से उल्लेख किया है।

देवदार के जंगलों और सेब के बागों से गुजरता है सफर, सांगला से मात्र 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह अनूठा पर्वतीय गांव

चित्रकुल तक पहुंचने का पूरा सफर अपने आप में एक रोमांचक अनुभव प्रदान करता है। अधिकांश पर्यटक सांगला से होकर इस मार्ग से गुजरते हैं। बास्पा घाटी के रास्तों से यात्रा करते समय पर्यटकों को घने देवदार के जंगल, लहलहाते सेब के बाग, विशाल चट्टानें और छोटे-छोटे पारंपरिक गांव देखने को मिलते हैं, जो पहाड़ों की असली और कच्ची सुंदरता को दर्शाते हैं। सांगला से चित्रकुल की कुल दूरी लगभग 25 किलोमीटर है। इस रास्ते पर आगे बढ़ते हुए खूबसूरत रच्छम गांव भी रास्ते में पड़ता है। सफर के दौरान बदलते प्राकृतिक नजारे इस यात्रा को और भी ज्यादा यादगार बना देते हैं, जहाँ कभी आप घने जंगलों के बीच से गुजरते हैं, तो कभी अचानक घाटी खुलकर सामने विशाल पहाड़ों और नीचे बहती नदी का विहंगम दृश्य प्रस्तुत करती है।

समृद्ध किन्नौरी संस्कृति और वास्तुकला की अनोखी झलक, करीब 500 साल पुराना ऐतिहासिक माथी देवी मंदिर है यहाँ की मुख्य पहचान

चित्रकुल केवल एक सामान्य पहाड़ी पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि यहाँ की संस्कृति प्राचीन किन्नौरी परंपराओं और तिब्बत के साथ उसके ऐतिहासिक जुड़ाव की गाथा कहती है। इस गांव में कई ऐसे प्राचीन मंदिर स्थित हैं, जिनका स्थानीय लोगों के धार्मिक जीवन में बहुत बड़ा स्थान है। इनमें सबसे प्रमुख और विशेष रूप से पूजनीय ‘माथी देवी मंदिर’ है, जो स्थानीय आराध्य देवी माथी को समर्पित है। यह पूरा मंदिर परिसर अपनी उत्कृष्ट पारंपरिक काष्ठ कला और शिल्पकारी के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, जहाँ लकड़ी पर की गई बेहद बारीक नक्काशी इस पूरे क्षेत्र की समृद्ध वास्तुकला को बयां करती है। किन्नौर जिला प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार, यह मुख्य मंदिर लगभग 500 वर्ष पुराना माना जाता है।

पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद और समृद्ध वन्यजीव अभयारण्य, रानीकांडा घास के मैदान और लामखागा पास ट्रेकर्स के लिए हैं किसी जन्नत से कम

पहाड़ों की ठंडी और शुद्ध हवा में साधारण भोजन भी पर्यटकों के लिए एक अनोखा अनुभव बन जाता है। किन्नौर के पारंपरिक पकवान यहाँ के विशेष मौसम, स्थानीय फसलों और सांस्कृतिक प्रभावों को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। यहाँ आने वाले पर्यटकों को भाप में पकी गेहूं की रोटी जिस पर घी लगाकर परोसा जाता है यानी ‘सिद्दू’ और दही आधारित छोले की स्वादिष्ट डिश ‘चना मदरा’ का लुत्फ जरूर उठाना चाहिए। इसके अलावा, पहाड़ों पर शाम ढलते वक्त गर्म चाय की एक चुस्की अलग ही प्रकार का आंतरिक सुकून देती है। गांव के पास ही ‘रच्छम चित्रकुल वन्यजीव अभयारण्य’ भी है, जो यहाँ के घने जंगलों और पहाड़ी ढलानों की पारिस्थितिकी को संरक्षित रखता है। इस क्षेत्र में हिमालयी कस्तूरी मृग, नीली भेड़ और बेहद दुर्लभ हिम तेंदुआ (स्नो लेपर्ड) जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं। इसके अलावा अनुभवी ट्रेकर्स के लिए रानीकांडा के खूबसूरत घास के मैदान और चुनौतीपूर्ण ‘लामखागा पास’ जैसे ऊंचे पहाड़ी रास्ते रोमांच का अलग स्तर प्रदान करते हैं।

चित्रकुल पहुंचने का सबसे सही समय और मार्ग, शिमला और चंडीगढ़ से सड़क मार्ग के जरिए आसानी से तय किया जा सकता है सफर

चित्रकुल की यात्रा करने के लिए सबसे अनुकूल समय आमतौर पर अप्रैल से अक्टूबर के महीनों के बीच का माना जाता है, हालांकि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है। सड़क मार्ग द्वारा चित्रकुल सांगला से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शिमला से यहाँ तक की दूरी तय करने में काफी समय लगता है, इसलिए रास्ते में किसी स्थान पर विश्राम करते हुए अपनी यात्रा की रूपरेखा तैयार करना ज्यादा बेहतर रहता है। पर्यटक शिमला, रामपुर और करछम से होते हुए सड़क मार्ग के जरिए आसानी से इस गांव तक पहुंच सकते हैं। यहाँ पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट शिमला में ही स्थित है, जबकि चंडीगढ़ भी हवाई मार्ग के विकल्प के रूप में एक अच्छा माध्यम है।

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