कवर्धा में अवैध धर्मांतरण के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, 18 गांवों के प्रमुखों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
कवर्धा: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले में अवैध रूप से संचालित किए जा रहे धर्मांतरण के मामलों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। क्षेत्र में चोरी-छिपे और प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराए जाने की कथित शिकायतों से नाराज बड़ी संख्या में ग्रामीण और विभिन्न गांवों के प्रमुख आज सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय जा पहुंचे। समाज के प्रमुखों ने अपनी मांगों के समर्थन में जिला कलेक्टर के नाम एक कड़ा ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि वनांचल और ग्रामीण इलाकों में अवैध धर्म परिवर्तन की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिन पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए और इस गैरकानूनी कृत्य में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।
वनांचल क्षेत्रों के भोले-भाले आदिवासियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को लालच देकर धर्म बदलने का लगाया जा रहा है आरोप
कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराने वाले शिष्टमंडल में करीब 18 गांवों के समाज व ग्राम प्रमुख शामिल रहे। इन प्रमुखों ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रशासन को अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि जिले के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले सीधे-साधे आदिवासियों और आर्थिक तंगी से जूझ रहे कमजोर परिवारों को पैसों, मुफ्त शिक्षा तथा अन्य लुभावने वादों का प्रलोभन देकर जबरन या बहला-फुसलाकर उनके धर्म परिवर्तन के प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकारी सेवा में पदस्थ और आर्थिक रूप से मजबूत लोगों के इस गतिविधि में शामिल होने का दावा, नेताओं और सरपंचों ने रखी अपनी बात
गांव के प्रमुखों का कहना है कि कुछ विशेष स्थानों पर आर्थिक सहायता और बेहतर जीवनशैली का झांसा देकर लोगों की धार्मिक आस्थाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस प्रकार की संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त लोगों पर जल्द से जल्द शिकंजा कसने की मांग की है। हालांकि प्रशासन की ओर से इन विशिष्ट आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, और इन्हें फिलहाल शिकायतों के दायरे में रखा गया है। स्थानीय आदिवासी नेता इतवारी बैगा ने आरोप लगाया कि लोभ और लालच देकर धर्म बदलने का सिलसिला जारी है, जहां मुफ्त शिक्षा और बीमारियों के इलाज का झांसा दिया जा रहा है, इसलिए ऐसे अवैध प्रार्थना स्थलों को पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए। वहीं, ग्राम पंचायत बिरुलडिह के सरपंच बंदा पनागर ने कहा कि कुछ लोग जो सरकारी नौकरियों में पदस्थ हैं और आर्थिक रूप से काफी मजबूत हैं, वे परदे के पीछे रहकर इन गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं, जिन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
अवैध धर्मांतरण और प्रलोभन से जुड़े कानूनी प्रावधानों की रूपरेखा, जानिए नए नियमों के तहत क्या-क्या है दायरा
प्रशासनिक और कानूनी दृष्टिकोण से अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए बनाए गए नियमों के तहत कई कड़े प्रावधान तय किए गए हैं। इसके अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध धर्म बदलने के लिए मजबूर करना गंभीर अपराध माना जाता है। मनोवैज्ञानिक दबाव, शारीरिक बल, नकद उपहार, महंगे गिफ्ट, नौकरी का लालच, मुफ्त पढ़ाई या छात्रवृत्ति का प्रलोभन देना पूरी तरह कानूनन जुर्म की श्रेणी में आता है। इसके अलावा, एक धर्म के रीति-रिवाजों को गलत तरीके से पेश करना भी प्रतिबंधित है। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से अपने पैतृक धर्म या मूल आस्था में घर वापसी करता है, तो उसे इस दायरे में धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।
धर्म परिवर्तन के मामलों में कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान, दोषी पाए जाने पर लंबी जेल की है सजा
नए नियमों और कानूनों के तहत अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसके तहत बलपूर्वक या धोखे से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर पूरी तरह पाबंदी है। यदि कोई स्वेच्छा से भी धर्म बदलना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम अधिकारी को पहले से सूचना देनी होती है, जिसके बाद आपत्ति दर्ज कराने के लिए 30 दिनों का समय मिलता है। अवैध रूप से धर्मांतरण कराने वाले दोषियों के लिए 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। यदि पीड़ित कोई नाबालिग, महिला या आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) से संबंधित है, तो सजा बढ़ाकर 10 से 20 वर्ष की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना हो सकती है। इसके अलावा, सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और न्यूनतम 25 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान तय किया गया है।
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