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Bhadohi News: कालीन नगरी भदोही की राजनीतिक पहचान में फिर बदलाव, समाजवादी पार्टी और बीजेपी आमने-सामने

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दुनियाभर में अपने हस्तनिर्मित कालीनों (Carpets) और बेहतरीन उत्पादों के लिए प्रसिद्ध भदोही की पहचान सिर्फ उसके व्यापार तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह जिला अपने नाम को लेकर हुई राजनीतिक उठापटक का भी गवाह रहा है।

30 जून 1994 को एक अलग जनपद के रूप में अस्तित्व में आने के बाद से इस जिले के नाम में कई बार बदलाव किए जा चुके हैं। कभी इसे भदोही, कभी संत रविदास नगर और एक दौर में ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से पुकारा गया।

अब हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर भदोही का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर’ किए जाने की आधिकारिक घोषणा कर दी है, जिससे राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है।

📜 भदोही के नाम बदलने का राजनीतिक और ऐतिहासिक सफर (1994 से 2026 तक)

तीन दशकों में जिले के नाम में हुए प्रमुख बदलावों का क्रम:

  • मुलायम सरकार में बना अलग जिला (1994): भदोही पहले वाराणसी जिले का हिस्सा हुआ करता था। लंबे संघर्ष के बाद 30 जून 1994 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार में इसे नया और अलग जनपद बनाया गया, जिसका नाम ‘भदोही’ रखा गया।

  • मायावती सरकार का फैसला (1997): प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद 4 दिसंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार ने इसका नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर’ कर दिया, जिससे इसकी प्रशासनिक पहचान संत रविदास से जुड़ गई।

  • मिश्रित नाम (1999): कालीन निर्यातकों और स्थानीय कारोबारियों की मांग को ध्यान में रखते हुए 12 नवंबर 1999 को रामप्रकाश गुप्ता की सरकार ने इसका नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर भदोही’ कर दिया।

  • अखिलेश सरकार की वापसी (2014): सपा सरकार के दौरान 6 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिश पर इसका नाम दोबारा संक्षिप्त करके सिर्फ ‘भदोही’ कर दिया गया।

  • योगी आदित्यनाथ की हालिया घोषणा (2026): अब लगभग 12 साल बाद यह मुद्दा फिर गरमाया है। 29 जुलाई 2026 को वाराणसी में संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर सीएम योगी ने भदोही का नाम फिर से ‘संत रविदास नगर’ करने का ऐलान किया है।

🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगामी चुनाव पर असर

इस घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है:

  • सपा का रुख: मुख्यमंत्री की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नाम बदलने का यह राजनीतिक सिलसिला अब खत्म होना चाहिए और जनता वर्ष 2027 के चुनाव में सरकार बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • जुबानी जंग: जहां एक ओर बीजेपी सरकार इस कदम को संत रविदास के सम्मान और उनकी स्मृति से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे सियासी एजेंडा बता रहा है। जानकारों का मानना है कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक दलों के बीच बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है।

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