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जस्टिस संदीप मेहता के आरोपों पर CJI ने लिया संज्ञान; बोले- ‘महज आरोप अंतिम फैसला नहीं, दोनों पक्षों की होगी सुनवाई’

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नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर लगाए गए गंभीर आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया दी है।

सीजेआई ने स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत ने इस विषय में उठाई गई सभी चिंताओं को संज्ञान में लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी सेवारत न्यायाधीश के विरुद्ध लगे आरोपों का निपटारा स्थापित संस्थागत और न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से पूरी निष्पक्षता व सख्ती से किया जाएगा, न कि मीडिया ट्रायल या सार्वजनिक बहसों के आधार पर।

📜 जस्टिस संदीप मेहता के 3 पत्रों में गंभीर प्रशासनिक आरोप

मामले की पृष्ठभूमि और आरोप:

  • तीन अलग-अलग पत्र: जस्टिस संदीप मेहता ने CJI को तीन अलग-अलग पत्र भेजकर राजस्थान हाईकोर्ट के ACJ संजीव प्रकाश शर्मा के कार्यकाल में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं का आरोप लगाया है।

  • केस लिस्टिंग में हेरफेर: पत्रों में आरोप लगाया गया है कि साधन संपन्न और रसूखदार वादकारियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से मुकदमों की लिस्टिंग (Case Listing) में प्रक्रियागत हेरफेर किया गया।

  • शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप: जस्टिस मेहता ने कई मामलों के उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि सेवानिवृत्ति से पूर्व प्रशासनिक अधिकारों का दुरुपयोग किया जा रहा है और राजस्थान हाईकोर्ट में अन्य राज्य से नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की मांग की।

🏛️ ‘महज आरोप लगा देना अंतिम निर्णय नहीं’: दोनों पक्षों को मिलेगा उचित अवसर

मुख्य न्यायाधीश का आधिकारिक बयान:

  • जर्मनी यात्रा के दौरान बयान: जर्मनी और इंग्लैंड के चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर गए CJI सूर्य कांत ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि किसी भी जज पर लगे आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

  • सुनवाई का अधिकार: प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संबंधित न्यायाधीश को भी अपना पक्ष और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का पूरा व न्यायसंगत अवसर दिया जाएगा।

  • तथ्यों की समीक्षा: जांच की इस प्रक्रिया में जस्टिस मेहता द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचनाओं और जस्टिस शर्मा के औपचारिक उत्तर—दोनों का सूक्ष्मता से मूल्यांकन किया जाएगा।

🤝 कॉलेजियम स्तर पर विचार: मीडिया के दावों से नहीं होगा न्यायिक निर्णय

प्रशासनिक प्रक्रिया और आगे की रूपरेखा:

  • सक्षम प्राधिकरण का क्षेत्राधिकार: CJI ने कहा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को पद पर बनाए रखने, स्थानांतरित (Transfer) करने अथवा अन्य प्रशासनिक कदम उठाने का निर्णय सक्षम संस्थागत प्राधिकरण द्वारा समग्र तथ्यों की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।

  • कॉलेजियम की सक्रियता: मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि कॉलेजियम के अन्य सदस्य विभिन्न उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियमित नियुक्तियों की प्रक्रिया पर पहले से कार्य कर रहे हैं।

  • संस्था की गरिमा: सुप्रीम कोर्ट जजों से जुड़ी व्यक्तिगत शिकायतों और दावों का निपटारा मीडिया में बयानबाजी के बजाय केवल संस्थागत मर्यादा और स्थापित कानूनी नियमों के दायरे में ही किया जाएगा।

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