रंगारंग समापन: लोक कला से लेकर बॉलीवुड तक का तड़का! कोरिया महोत्सव के आखिरी दिन कलाकारों ने बांधा समां
कोरिया: जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में आयोजित तीन दिवसीय ‘कोरिया महोत्सव’ का गुरुवार देर रात भव्य समापन समारोह हुआ. कला, संस्कृति और परंपराओं से सजे इस महोत्सव ने पूरे जिले को उत्सवमय बना दिया. लोक रंग, शास्त्रीय संगीत, सूफियाना अंदाज़ और आधुनिक प्रस्तुतियों के समागम से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए.
CM ने किया था शुभारंभ
महोत्सव का शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया था. अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कोरिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को प्रदेश की पहचान और परंपराओं के संरक्षण के लिए आवश्यक बताया था.
कर्मा नृत्य से लेकर सूफी संगीत तक
समापन दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला की शुरुआत स्थानीय लोक कला दल की ओर से कर्मा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से हुई. पारंपरिक वेशभूषा और ढोल-मांदर की थाप पर प्रस्तुत इस नृत्य ने पूरे वातावरण को लोक रंग में रंग दिया. इसके बाद सियाधेश म्यूजिक और बॉलीवुड मिक्स की धुनों पर युवा देर रात तक झूमते नजर आए.
बनारस से भी पहुंचे कलाकार
रायपुर से पहुंचीं ईशिका गिरी ने शास्त्रीय गायन और कत्थक नृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं. बिलासपुर की नृत्यधारा डांस एकेडमी ने नृत्य-नाटिका के माध्यम से सामाजिक संदेश प्रस्तुत किया. वहीं बनारस से आए डॉ. राकेश ने बांसुरी वादन से मधुर सुरों की छटा बिखेरी, जिससे माहौल सुरमय हो उठा.
कोरिया महोत्सव का उद्देश्य जिले की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को मंच प्रदान करना और स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करना है. तीन दिनों तक जिस तरह आमजन की सहभागिता रही, वह अत्यंत उत्साहजनक है. आगे भी ऐसे आयोजन निरंतर होते रहेंगे.- चंदन त्रिपाठी, कलेक्टर कोरिया
कोरिया की पहचान उसकी संस्कृति है. इस महोत्सव ने जिले को एक नई ऊर्जा दी है. आने वाले समय में इसे और व्यापक स्वरूप देने की योजना है.– मोहित पैकरा, अध्यक्ष जिला पंचायत कोरिया
यह महोत्सव प्रशासन और जनता के संयुक्त प्रयास का परिणाम है. हमने प्रयास किया कि लोक संस्कृति के साथ-साथ आधुनिक प्रस्तुतियों को भी स्थान मिले, ताकि सभी वर्ग के लोग जुड़ सकें.- डॉ. आसुतोष चतुर्वेदी, सीईओ जिला पंचायत कोरिया
बिलासपुर से आए बलविंदर सिंह ने सूफी गायन की श्रृंखला प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया. वहीं दुर्गा साहू एवं उनके दल ने छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायन की सशक्त प्रस्तुति देकर लोक परंपरा की जीवंत झलक दिखाई.
स्थानीय व्यंजन का भी स्वाद
महोत्सव स्थल पर ‘कोरिया मिलेट्स कैफे’, ‘जंगल कैफे’ और स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे. दर्शकों ने पारंपरिक और स्थानीय व्यंजनों का आनंद लिया. इस आयोजन में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और आमजन उपस्थित रहे.
कोरिया महोत्सव ने न केवल स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान किया, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने का सशक्त संदेश भी दिया.
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