Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
जबलपुर में महिला आरक्षक से पहचान छिपाकर दुष्कर्म और धर्मांतरण का दबाव, एसपी दफ्तर पहुंची पीड़िता नेपाल में कांवड़ यात्रा से पहले झंडे को लेकर भड़की हिंसा: भारत सीमा से लगे 5 जिलों में कर्फ्यू, सरका... अर्ली मेनोपॉज और हाई ब्लड प्रेशर का क्या है कनेक्शन? एक्सपर्ट से जानें एस्ट्रोजन हार्मोन का असर और ब... IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, जानें किन पुख्ता सबूतों पर कोर्ट ने सु... पूर्णिया में बदल रही गांवों की तस्वीर: PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से 281 परिवारों का बिजली बिल हु... हरिद्वार कांवड़ यात्रा में बड़ा हादसा: जटवाड़ा पुल के पास गंगनहर में डूबने से चंडीगढ़ के 4 कांवड़ियो... संत रविदास के 650वें जयंती वर्ष पर भदोही बना 'संत रविदास नगर', सीएम योगी ने की सांस्कृतिक पुनर्स्थाप... बिहार विधान परिषद में बड़ा उलटफेर: बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार ने दिया इस्तीफा, मंत्री दीपक प्रकाश के ... असम के शिलचर में बड़ा हादसा: पानी की टंकी की सफाई के दौरान दम घुटने से 4 लोगों की मौत; इलाके में शोक कटनी में 11 साल पुरानी जर्जर सड़क का केक काटकर मनाया जन्मदिन! कांग्रेस का प्रशासन के खिलाफ अनोखा विर...

मुखाग्नि देने चला था बेटा, तभी फोन पर गूंजी मां की आवाज: श्मशान की दहलीज से लौट आई खुशियां

24

भारत के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश से कुदरत के करिश्मे और मानवीय संवेदनाओं की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं. जिस मां को मरा हुआ मानकर बेटा उसके अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था, वो ढाई साल बाद अचानक ‘जिंदा’ लौट आई. यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लग सकती है, लेकिन प्रकाशम जिले में यह हकीकत बनकर सामने आई है.

प्रकाशम जिले के एल. कोटा गांव की रहने वाली वेंकटालक्ष्मी मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं. करीब ढाई साल पहले, जब परिजन उन्हें इलाज के लिए गुंटूर के एक अस्पताल ले गए, तो वह वहां से अचानक लापता हो गईं. परिजनों ने उन्हें हर जगह तलाशा, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला. दुखद बात ये रही कि पत्नी के वियोग में तीन दिन बाद ही उनके पति का भी निधन हो गया. समय बीतता गया और परिवार की उम्मीदें धुंधली पड़ती गईं.

अंतिम संस्कार की तैयारी और वो फोन कॉल

ढाई साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद, जब वेंकटालक्ष्मी का कोई पता नहीं चला, तो परिवार ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें मृत मान लिया. घर में उनके अंतिम संस्कार (पिंडदान/श्राद्ध) की तैयारियां चल रही थीं. तभी अचानक खम्मम के अन्नम सेवा आश्रम से एक फोन आया. फोन पर मिली खबर ने पूरे परिवार के होश उड़ा दिए. सामने से बताया गया- आपकी मां जीवित हैं और हमारे पास सुरक्षित हैं.

वेंकटालक्ष्मी सड़कों पर भटकती हुई मिली थीं

खम्मम पुलिस को जुलाई 2023 में वेंकटालक्ष्मी सड़कों पर भटकती हुई मिली थीं, जिसके बाद उन्हें सेवा आश्रम में भर्ती कराया गया. आश्रम के संचालक अन्नम श्रीनिवास राव ने बताया कि लंबे इलाज और देखभाल के बाद उनकी मानसिक स्थिति में सुधार हुआ. ठीक होते ही उन्होंने अपने गांव और बेटे गुरवैया के बारे में जानकारी दी.

जब बेटा गुरवैया आश्रम पहुंचा, तो अपनी मां को जीवित देख वह फफक-फफक कर रो पड़ा. ढाई साल का दर्द और बिछड़ने का गम आंसुओं के जरिए बह निकला. आश्रम के आयोजकों ने परिवार को सम्मानित कर वेंकटालक्ष्मी को उनके बेटे को सौंप दिया.

यह घटना हमें सिखाती है कि सेवा और समर्पण कभी व्यर्थ नहीं जाता. अन्नम सेवा आश्रम जैसे संस्थानों की वजह से ही आज एक बेटा अपनी मां से मिल सका और एक घर की खुशियां वापस लौट आईं. जो घर कल तक शोक की तैयारी कर रहा था, वहां आज उत्सव का माहौल है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.