Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
जबलपुर में महिला आरक्षक से पहचान छिपाकर दुष्कर्म और धर्मांतरण का दबाव, एसपी दफ्तर पहुंची पीड़िता नेपाल में कांवड़ यात्रा से पहले झंडे को लेकर भड़की हिंसा: भारत सीमा से लगे 5 जिलों में कर्फ्यू, सरका... अर्ली मेनोपॉज और हाई ब्लड प्रेशर का क्या है कनेक्शन? एक्सपर्ट से जानें एस्ट्रोजन हार्मोन का असर और ब... IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, जानें किन पुख्ता सबूतों पर कोर्ट ने सु... पूर्णिया में बदल रही गांवों की तस्वीर: PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से 281 परिवारों का बिजली बिल हु... हरिद्वार कांवड़ यात्रा में बड़ा हादसा: जटवाड़ा पुल के पास गंगनहर में डूबने से चंडीगढ़ के 4 कांवड़ियो... संत रविदास के 650वें जयंती वर्ष पर भदोही बना 'संत रविदास नगर', सीएम योगी ने की सांस्कृतिक पुनर्स्थाप... बिहार विधान परिषद में बड़ा उलटफेर: बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार ने दिया इस्तीफा, मंत्री दीपक प्रकाश के ... असम के शिलचर में बड़ा हादसा: पानी की टंकी की सफाई के दौरान दम घुटने से 4 लोगों की मौत; इलाके में शोक कटनी में 11 साल पुरानी जर्जर सड़क का केक काटकर मनाया जन्मदिन! कांग्रेस का प्रशासन के खिलाफ अनोखा विर...

नेपाल में कांवड़ यात्रा से पहले झंडे को लेकर भड़की हिंसा: भारत सीमा से लगे 5 जिलों में कर्फ्यू, सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान

1

काठमांडू/जनकपुर (नेपाल): नेपाल के मधेश प्रांत के 5 प्रमुख जिले इस समय गंभीर सांप्रदायिक दंगे की आग में जल रहे हैं।

इन सीमावर्ती जिलों में एक बार फिर से हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच भारी हिंसक झड़पें शुरू हो गई हैं। स्थिति को अनियंत्रित होता देख नेपाल सरकार ने दंगा प्रभावित सभी 5 जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है। कर्फ्यू लागू होने के कारण स्थानीय परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं तथा सुरक्षा कारणों से ट्रेनों और लंबी दूरी की बसों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस हिंसा का सबसे भीषण असर भारत की सीमा से सटे इलाकों में देखने को मिल रहा है।

ई-कांतिपुर की रिपोर्ट के अनुसार, सुनसरी, सरलाही, जनकपुर और धनुषा जिलों में हिंसा और तनाव का सबसे व्यापक असर पड़ा है। शुरुआत में प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार इस दंगे को वक्त रहते नियंत्रित करने में विफल साबित हुई। अब बिगड़े हालात को संभालने के लिए सरकार ने गृह मंत्री सुदान गुरुंग को खुद मौके पर भेजने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही शुक्रवार को प्रधानमंत्री बालेन शाह ने स्थिति पर विचार-विमर्श के लिए आपातकालीन सर्वदलीय बैठक बुलाई।

🚩 कांवड़ यात्रा से पहले झंडा हटाने और डीजे बजाने को लेकर भड़की हिंसा, पुलिस फायरिंग में 3 की मौत

स्थानीय मीडिया ‘नेपाल न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिंसक झड़प की शुरुआत सुनसरी जिले के संवेदनशील कप्तानगंज इलाके से हुई।

आगामी कांवड़ यात्रा से पहले कप्तानगंज में कुछ युवकों ने बिजली के खंभे (पोल) पर पहले से लगाए गए मुस्लिम समुदाय के धार्मिक झंडे को उतारकर वहां भगवा झंडा लगा दिया। इसके बाद स्थानीय मंदिर के बाहर तेज आवाज में डीजे बजाया जाने लगा।

जिला पुलिस कार्यालय के अनुसार, इस घटनाक्रम पर कुछ मुस्लिम युवकों ने कड़ा विरोध जताया, जो देखते ही देखते तीखी कहासुनी और फिर हिंसक पथराव में तब्दील हो गई। गृह मंत्री सुदान गुरुंग के बयान के मुताबिक, उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मजबूरी में गोलियां चलानी पड़ीं, जिसमें 2 हिंदू युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं एक अन्य घटनाक्रम में पुलिस की गोली लगने से गणेश यादव नामक युवक की जान चली गई। स्थिति को शांत करने के उद्देश्य से सरकार ने मृतक युवकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है।

📉 8 वर्षों में 17 बार सुलगा नेपाल, जानिए बार-बार सांप्रदायिक दंगे होने के मुख्य कारण

नेपाल में पिछले 8 वर्षों के भीतर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच 17 बार छोटे-बड़े हिंसक दंगे दर्ज किए जा चुके हैं।

इसी वर्ष जनवरी के महीने में भारत सीमा से सटे वीरगंज इलाके में भीषण हिंसक झड़पें देखने को मिली थीं, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में एक हफ्ते तक कर्फ्यू लागू रखना पड़ा था। वहीं, हाल के वर्षों में नेपाल में सबसे बड़ी सांप्रदायिक हिंसा 2017 में कपिलवस्तु इलाके में हुई थी, जहां दंगे के डर से 100 से अधिक परिवारों को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा था।

यूएन मानवाधिकार काउंसिल (UNHRC) की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में हालिया वर्षों में मुस्लिम विरोधी और सांप्रदायिक हिंसक घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। इसका मुख्य कारण बहुसंख्यक हिंदू आबादी के बीच बढ़ा सांस्कृतिक जनजागरण है। गौरतलब है कि नेपाल की कुल आबादी में 82 प्रतिशत हिंदू हैं, जबकि मुसलमानों की आबादी लगभग 9 प्रतिशत के आसपास है।

अमेरिका स्थित गेटिसबर्ग कॉलेज की प्रोफेसर मेगन एडमसन सिजापति के अनुसार, वर्ष 2008 से पहले तक नेपाल एक आधिकारिक ‘हिंदू राष्ट्र’ था। लेकिन नया संविधान लागू होने के बाद इसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित कर दिया गया। 2008 से पहले जो अल्पसंख्यक समुदाय सार्वजनिक रूप से संगठित होने से बचते थे, वे संवैधानिक बदलाव के बाद अपनी धार्मिक आजादी और अधिकारों की मुखर मांग करने लगे। इसी सामाजिक-राजनीतिक बदलाव के कारण पारंपरिक तालमेल प्रभावित हुआ, जो समय-समय पर हिंसक टकराओं में बदल जाता है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.