भोपाल : नए साल के जश्न मे जहां आम और खास बद-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, जश्न मानते हैं. वहीं भोपाल के शाहजहांनाबाद के ‘आसरा’ वृद्धाश्रम में भी उम्मीदें खिलती हैं. यहां 82 बुज़ुर्ग उस आख़िरी किनारे की मदद ढूंढ़ते हैं, जिन्हें जिंदगी के सफ़र में वह साथ न मिला, जो उन्हें चाहिए था. इनमें से कई ऐसे हैं, जिन्हें परिजनों या रिश्तेदारों को छोड़कर चले जाने का दर्द अब तक महसूस है.
वृद्धाश्रम में कुछ ऐसे बुजुर्ग भी हैं, जिन्हें पहचानने वाला कोई नहीं, फिर भी आश्रम की व्यवस्थाएं उन्हें अपनाने में पीछे नहीं रहतीं. आश्रम में सभी त्यौहार बड़ी धूमघाम से मनाए जाते हैं. नववर्ष को भी वृद्ध आश्रम मे जश्न के साथ मनाने की परम्परा चली आ रही है. इस साल भी नए साल का जश्न धूमधाम से मनाया जाएगा.
समाजसेवी संस्थाएं करती हैं मदद
यहां अपने से दूर बुजुर्ग आज भी अपनों से मिलने की आस लगाए टकटकी निगाहों से वर्षों से इंतजार कर रहे हैं. हर साल नये साल पर भी इन वृद्धजनों की आंखें अपनों को ढूंढ रही हैं. आसरा वृद्ध आश्रम मे नववर्ष को लेकर काफ़ी उत्साह देखने को मिल रहा है. कई समाजसेवी संस्थाएं, जनभागीदारी समितियों के लोग दिनभर इन बुजुर्गों के बीच नया साल मनाने आते हैं और इनके गम को दूर करने का प्रयास करते हैं.
किसी का बेटा छोड़ गया तो किसी की बेटी
यहां रहने वाले बुजर्गों का कहना है “अब तो यही उनका घर है. किसी का बेटा उनको छोड़कर चला गया तो किसी की बेटी, अब आश्रम में रहने वाले लोग ही उनके परिवार के सदस्य हैं.” इसी को मोहब्बत कहते हैं कि सेवा का फल ही यहां उन्हें मजबूरन बांधे रखता है. वृद्धाश्रम मे नए साल पर गीत-संगीत संस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं. केक कटिंग भी सब के साथ मिलकर होती मिठाई और फलः वितरण भी किया जाता है. कार्यक्रम के अंत में सभी बुजुर्गों को मिठाई और फल वितरित किए जाते हैं.वृद्धाश्रम की मैनेजर शबाना मसी कहती हैं “यहां ऐसे बुजुर्ग हैं, जिनका कोई नहीं है. ये हमारा परिवार है. हम इन लोगों के साथ सारे त्यौहार मनाते हैं. नया साल भी हम लोग मनाते हैं.” डॉ. अनीता मिश्रा ने कहा “वृद्धजनों को हम ठंड से निपटने के लिए कंबल दे रहे हैं, ताकि हम उनकी कुछ सेवा कर सकें.” वद्धाश्रम में स्कूल-कॉलेज के छात्र आकर सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश कर बुजुर्गों का मनोरंजन करते हैं. इससे बुजुर्गों के चेहरे पर खुशी आती है.
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