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संघ प्रमुख मोहन भागवत आज जाएंगे मणिपुर! 3 दिन के दौरे में क्या-क्या करेंगे, क्या शांति की राह निकलेगी? पूरा शेड्यूल

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत दो साल पहले भड़की जातीय हिंसा के बाद 20 नवंबर को पहली बार मणिपुर आयेंगे. संगठन के एक पदाधिकारी की ओर से बुधवार को यह जानकारी दी गई. संघ के मणिपुर के सह-सरकार्यवाह तरुण कुमार शर्मा ने न्यूज एजेंसी को बताया कि तीन दिनों के प्रवास के दौरान मोहन भागवत नागरिकों, उद्यमियों और आदिवासी समुदाय के अलग-अलग प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे.

उन्होंने कहा कि हमारे सरसंघचालक का राज्य का दौरा संघ के शताब्दी समारोह के सिलसिले में है. वह 20 नवंबर को गुवाहाटी से यहां आ रहे हैं और 22 नवंबर को उनकी वापसी होगी. संघ के एक दूसरे पदाधिकारी ने बताया कि दो साल पहले हिंसा भड़कने के बाद से मोहन भागवत का ये पहला दौरा होगा. तरुण कुमार शर्मा ने बताया कि उनकी यात्रा के कार्यक्रम के तहत प्रमुख नागरिकों, जनजाति समुदाय के प्रतिनिधियों और युवा नेताओं के साथ अलग-अलग संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाएंगे.

इंफाल भी जाएंगे मोहन भागवत

तरुण कुमार शर्मा ने कहा कि अपने आगमन के दिन वह इंफाल के कोंजेंग लेइकाई में एक कार्यक्रम में उद्यमियों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों से मिलेंगे. 21 नवंबर को भागवत मणिपुर के पहाड़ी इलाकों के आदिवासी नेताओं से मिलेंगे और बातचीत करेंगे. यह पूछे जाने पर कि क्या संघ प्रमुख राहत शिविरों का दौरा करेंगे, जहां आंतरिक रूप से विस्थापित लोग पिछले दो सालों से रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह अभी कार्यक्रम में नहीं है. यह दौरा मुख्य रूप से संगठन का आंतरिक हिस्सा है.

मई 2023 में हुई थी हिंसा

मई 2023 से मैतेई और कुकी-ज़ो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 260 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं. मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफ़े के बाद केंद्र ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था. राज्य विधानसभा, जिसका कार्यकाल 2027 तक है, इसको निलंबित कर दिया गया है.

मोहन भागवत का जातीय हिंसा के बाद राज्य का यह पहला दौरा है. 10 जून, 2024 को, लोकसभा चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद उन्होंने संघर्षग्रस्त राज्य में शांति का आह्वान किया था. उन्होंने कहा था कि राज्य 10 सालों से शांतिपूर्ण था. ऐसा लग रहा था कि बंदूक संस्कृति खत्म हो गई है. लेकिन, अब भड़की आग को बुझाने के बारे में कौन सोच रहा है? शांति को प्राथमिकता के आधार पर विचार करना होगा.

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