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छत्तीसगढ़ की राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना की जीपीएस ट्रैकिंग

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बस्तर: छत्तीसगढ़ के बस्तर के कांगेर वेल्ली नेशनल पार्क में मौजूद घने साल की ऊंची डालियों में जब कोई मानवीय और मीठी आवाज में “क्या हाल है” कहे तो आप चौंक मत जाना. यह आवाज छत्तीसगढ़ की राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना की है. यह केवल बस्तर में पाई जाती है. अब इस पहाड़ी मैना के संरक्षण के लिए बड़ी तैयारी की जा रही है.

राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण की तैयारी: कांगेर वेली नेशनल पार्क प्रबंधन ने छत्तीसगढ़ की राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण के लिए GPS ट्रैकिंग की योजना बनाई है ताकि पहाड़ी मैना पर नजर रखी जा सके. कांगेर वेली नेशनल पार्क डीएफओ नवीन कुमार ने बताया कि विभाग राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण कार्य पर रणनीति बना रहा है.

डीएफओ नवीन कुमार ने बताया,”पहाड़ी मैना की GPS ट्रैकिंग की जाएगी ताकि पता लगाया जा सके कि मैना कहां जा रही है और उसके रहन सहन की पूरी जानकारी मिल सके. इस कार्य को सैटेलाइट टेलीमेट्री कहा जाता है. जिससे गतिविधियों और प्रवास मार्ग को सैटेलाइट की सहायता से मॉनिटर किया जा सकता है.”

सैटेलाइट टेलीमेट्री क्या है: सैटेलाइट टेलीमेट्री एक ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से किसी वस्तु, जीव या यंत्र से संबंधित आंकड़े को सैटलाइट के जरिए दूर स्थित नियंत्रण केंद्र तक भेजा जाता है. किसी जीव, वाहन, मशीन या उपकरण पर ट्रांसमीटर डिवाइस लगाया जाता है. यह डिवाइस लगातार तापमान, स्थिति, चाल या अन्य आंकड़े मापता रहता है. ये आंकड़े रेडियो सिग्नल के रूप में सैटेलाइट को भेजे जाते हैं. सैटेलाइट उन सिग्नलों को पृथ्वी पर स्थित ग्राउंड स्टेशन या डेटा सेंटर को भेज देता है. वहां से वैज्ञानिक या अधिकारी उस डेटा का विश्लेषण करते हैं.

पहाड़ी मैना की खासियत

  • यह हूबहू मानव आवाज की नकल कर सकती है.
  • अपने बोलने की क्षमता और चमकीले काले पंखों के कारण यह पक्षी काफी मशहूर है.
  • स्थानीय बस्तरवासी इसे प्यार से बोलती चिड़िया ( रामी) या कोसरा रामी कहते हैं.
  • वैज्ञानिक नाम ( Gracula Religiosa) है.

घोसला भी खास: पहाड़ी मैना साल के सूखे पेड़ों में निवास करती है. अपना घोसला पुराने पेड़ों की खोखली टहनियों और पेड़ों की दरारों में बनाती है ताकि शिकारी पक्षियों व अन्य जीवों से बचा जा सके.

पहाड़ी मैना क्या खाती है: पहाड़ी मैना सर्वाहारी है. फल,कीड़े, टिड्डे, बीज, कीट-पतंगे, छोटे छोटे मेंढक और छिपकली भी खा लेती है.

कांगेर वेली नेशनल पार्क ने ”मैना मित्र” को नियुक्त: पहाड़ी मैना के संरक्षण के लिए इससे पहले कांगेर वेली नेशनल पार्क ने ”मैना मित्र” को नियुक्त किया था ताकि गतिविधियों पर नजर रखी जा सके. इसके लिए उन्हें दूरबीन भी उपलब्ध कराई गई थी. वह अब भी सक्रिय रूप से अपना काम कर रहे हैं.

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