Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Jabalpur-Bhopal NH-45 Toll News: जबलपुर-भोपाल हाईवे पर शाहपुरा टोल टैक्स वसूली पर रोक; नितिन गडकरी न... Nitin Gadkari Bhopal Visit: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का सख्त रुख; RTO में भ्रष्टाचार पर बोले— 'गा... Mandla CMO Bribe Trap: मंडला में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई; 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़... Rajasthan Mayor Election Results: राजस्थान के नगर निगमों में बीजेपी का ऐतिहासिक परचम; जयपुर, जोधपुर ... UP Assembly Election Prep: टिकट के लिए अब दिल्ली-लखनऊ में लॉबिंग नहीं चलेगी, जिलों से तैयार होगी उम्... UP International Trade Show Greater Noida: 85 देशों के खरीदार होंगे शामिल, जानिए यूपी इंटरनेशनल ट्रे... SIR Process Controversy India: चुनाव आयोग पर उठे सवालों के बाद सड़कों पर उतरी कांग्रेस, CEC ज्ञानेश ... Babulal Marandi on SIR Process: एसआईआर देश हित में; नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का विपक्ष पर तंज, ... Pakur Police Action: पाकुड़ के नयाग्राम में 13 साल के दीनानाथ की निर्मम हत्या; एसडीपीओ कुमार गौरव ने... Jharkhand Voter List SIR Dispute: झारखंड में SIR प्रक्रिया को लेकर घमासान; सीजेपी चलाएगी देशव्यापी आ...

छत्तीसगढ़ में विदेशी पौधे ‘कोनोकार्पस’ पर बैन! स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा; दुर्ग-भिलाई में लगे 10 हजार पेड़

10

दुर्ग (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ शासन ने पर्यावरण संरक्षण तथा जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक खतरनाक विदेशी प्रजाति के पौधे ‘कोनोकार्पस’ (Conocarpus) के रोपण, प्रचार-प्रसार और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

राज्य सरकार के इस निर्णय का व्यापक असर दुर्ग जिले में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जहां नगर निगमों तथा अन्य स्थानीय निकायों द्वारा पूर्व में लगभग 10 हजार कोनोकार्पस के पौधे रोपे गए हैं।

⚠️ जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा है कोनोकार्पस, पक्षी भी नहीं बनाते घोंसला

पर्यावरण विशेषज्ञ एन. के. जैन ने बताया कि कोनोकार्पस अत्यंत तीव्र गति से फैलने वाली एक विदेशी प्रजाति है, जो स्थानीय जैव विविधता के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर रही है।

इस वृक्ष की शाखाओं एवं पत्तियों पर पक्षी न तो घोंसला बनाते हैं और न ही बैठना पसंद करते हैं, जिससे स्थानीय प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

💧 भू-जल स्तर को सोखता है यह पौधा, स्थानीय देशी वनस्पतियों का विकास रोकता है

पर्यावरणविदों के अनुसार, यह पौधा भूमिगत जल को अत्यधिक मात्रा में सोखता है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर तेजी से गिरने की आशंका बढ़ जाती है।

इसके अतिरिक्त, यह आसपास उगने वाली अन्य स्थानीय देशी प्रजातियों के पौधों और वनस्पतियों के प्राकृतिक विकास (Growth) पर भी विपरीत असर डालता है।

😷 इंसानी स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव: एलर्जी, अस्थमा और श्वसन संबंधी बीमारियों का जोखिम

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि कोनोकार्पस के परागकण (Pollen Grains) और जैविक प्रभाव मनुष्यों में एलर्जी, अस्थमा, दमा और अन्य गंभीर श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ा देते हैं।

इसी कारण सरकार ने इसे मानव स्वास्थ्य तथा पर्यावरण दोनों दृष्टिकोणों से अत्यधिक हानिकारक मानते हुए यह सख्त कदम उठाया है।

🛑 आम जन से लेकर सरकारी विभागों पर लागू होगा नियम, अब नहीं लगेगा एक भी नया पौधा

शासन द्वारा जारी यह प्रतिबंध केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहेगा, अपितु समस्त शासकीय विभागों, स्थानीय निकायों, स्वायत्त संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों और निजी संस्थाओं पर भी समान रूप से लागू होगा।

अब संपूर्ण छत्तीसगढ़ प्रदेश में कहीं भी नया कोनोकार्पस पौधा नहीं लगाया जा सकेगा।

🌳 दुर्ग और भिलाई में लगे साढ़े 6 हजार पौधों की जगह अब रोपे जाएंगे स्थानीय छायादार वृक्ष

दुर्ग और भिलाई नगर निगम क्षेत्रों में इस पौधे की संख्या सर्वाधिक है, जहां सड़कों व नेशनल हाईवे के डिवाइडर, नंदिनी रोड, नेहरू नगर केपीएस रोड, गौरव पथ, टाउनशिप के सेक्टर-5 तथा प्रमुख पार्कों में लगभग साढ़े छह हजार पौधे लगे हुए हैं।

प्रशासन अब इन पौधों की जगह स्थानीय एवं पर्यावरण के अनुकूल फलदार व छायादार देशी प्रजातियों के पौधे लगाने की कार्ययोजना तैयार कर रहा है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.