पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह का आखिरी प्रदोष व्रत आज यानी 3 नवंबर को किया जा रहा है. इस दिन भक्त महादेव संग मां पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. साथ ही, व्रत का पालन कर अन्न और धन का दान करते हैं. ऐसा माना जाता है कि सोम प्रदोष व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और शिवजी की विशेष कृपा परिवार पर बनी रहती है. प्रदोष व्रत की पूजा के दौरान महादेव की आरती जरूर करनी चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि पूजा में आरती न करने से व्यक्ति को पूजन का फल नहीं मिलता है. ऐसे में आइए पढ़ते हैं शिवजी की आरती.
महादेव की आरती (Mahadev ki Aarti)
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥
ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥
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