Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Namo Bharat Train: अब दिल्ली से मेरठ सिर्फ 55 मिनट में, सराय काले खां से मोदीपुरम तक दौड़ने को तैयार... Anant Bhaskar Murder Case: आंध्र प्रदेश के पूर्व MLC अनंत भास्कर पर हत्या का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने... सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: बंगाल में न्यायिक नियुक्तियों पर जारी खींचतान पर SC का बड़ा फैसला, अधिकारिय... बड़ी खबर: क्या बाबरी के नाम पर बन सकती है नई मस्जिद? सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिया झटका, सुनव... Greater Noida News: रयान इंटरनेशनल स्कूल में एक घंटे तक बाथरूम में बंद रही मासूम छात्रा, परिजनों ने ... भगवान को लिखा 'जॉब लेटर': छात्र ने मांगी 20 लाख के पैकेज वाली नौकरी, बदले में भगवान को दिया ये अनोखा... चुगली की तो कटेगी जेब! अब इधर-उधर की बातें की तो देना होगा भारी जुर्माना, जानें इस अनोखे फैसले के पी... Bihar Assembly News: 'ब्राह्मण' शब्द पर बिहार विधानसभा में हंगामा, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा बोले- "मै... Rahul Gandhi Sultanpur Visit: सुल्तानपुर में फिर मोची रामचेत की दुकान पर रुके राहुल गांधी, बेटी के इ... AAP Attacks Opponents: महिलाओं को 2500 रुपये, प्रदूषण और युवा; आप ने 15 सवालों के जरिए सरकार को घेरा

अमेरिका का बाहुबली बम भी बेअसर, ईरान के इस ठिकाने पर कुछ नहीं बिगाड़ पाया

15

ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को ध्वस्त करने के लिए अमेरिका ने हाल ही में बड़ी सैन्य कार्रवाई की. उसके फोर्डो, नतांज और इस्फहान जैसे हाई-प्रोफाइल परमाणु ठिकानों को टारगेट किया गया. लेकिन हैरानी की बात ये रही कि ईरान का सबसे अहम और संवेदनशील न्यूक्लियर बेस जिसे इस्फहान कहा जाता है, इस हमले में लगभग सुरक्षित बच निकला.जबकि यही वो जगह मानी जाती है, जहां ईरान का सबसे बड़ा यूरेनियम भंडार छिपा हुआ है. सवाल ये है कि जब अमेरिका के पास दुनिया के सबसे ताकतवर बम हैं, तो फिर इस ठिकाने पर असर क्यों नहीं पड़ा?

जबकि यही वो जगह मानी जाती है, जहां ईरान का सबसे बड़ा यूरेनियम भंडार छिपा हुआ है. सवाल ये है कि जब अमेरिका के पास दुनिया के सबसे ताकतवर बम हैं, तो फिर इस ठिकाने पर असर क्यों नहीं पड़ा?

इस्फहान पर बंकर-बस्टर क्यों नहीं चला?

पेंटागन के मुताबिक, इस्फहान का न्यूक्लियर ठिकाना जमीन के इतने अंदर है कि अमेरिका के सबसे ताकतवर बंकर-बस्टर बम भी वहां तक नहीं पहुंच सकते थे. यही वजह है कि अमेरिका ने इस जगह पर हवाई बमबारी की बजाय सिर्फ टॉमहॉक मिसाइलों से हमला किया. लेकिन जानकारों का मानना है कि ये स्ट्राइक सिर्फ सतह पर असर डाल पाई, अंदर मौजूद असली न्यूक्लियर सामग्री तक नहीं पहुंच सकी.

इस्फहान में है ईरान का असली खजाना?

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, इस्फहान के अंदर ही ईरान का लगभग 60% एनरिच्ड यूरेनियम स्टॉकपाइल छिपा हुआ है. यही वो संवर्धित यूरेनियम है, जो किसी भी देश को परमाणु हथियार बनाने की क्षमता देता है. मतलब ये कि इस जगह पर हमला नाकाम रहने का मतलब है कि ईरान की न्यूक्लियर ताकत पूरी तरह खत्म नहीं हुई.

यूरेनियम गया कहां? अमेरिका को भी नहीं पता

एक बड़ी बात ये सामने आ रही है कि ईरान ने हमले से पहले शायद कुछ यूरेनियम को इन ठिकानों से कहीं और शिफ्ट कर दिया था. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि कुछ भी नहीं हटाया गया, लेकिन ब्रिफिंग में शामिल सांसदों ने साफ किया कि कितना यूरेनियम कहां है, इसकी पक्की जानकारी किसी के पास नहीं है. जानकारों का कहना है कि हमलों से ईरान की जमीनी ताकत पर असर जरूर पड़ा है लेकिन खतरा अभी टला नहीं है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.