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कोर्ट के आदेश के बाद भी इंदौर में नलों पर नहीं लगाए मीटर कलेक्टर-निगमायुक्त को नोटिस

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इंदौर। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कलेक्टर इलैया राजा टी और निगमायुक्त हर्षिका सिंह को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न आपके खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने यह नोटिस उस अवमानना याचिका में जारी किया है जिसमें कहा है कि 8 दिसंबर 2016 को हाई कोर्ट ने नगर निगम को शहर में सभी जल कनेक्शन पर मीटर लगाने और अवैध नल कनेक्शन व बोरिंग के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था। सात वर्ष बाद भी कुछ नहीं हुआ। कलेक्टर और निगमायुक्त को चार सप्ताह में जवाब देना है।

अवमानना याचिका पूर्व पार्षद महेश गर्ग ने एडवोकेट मनीष यादव के माध्यम से दायर की है। यादव ने बताया कि वर्ष 2015 में गर्ग ने पेयजल समस्या को लेकर एक जनहित याचिका दायर की थी। निगम ने इस याचिका में कोर्ट के समक्ष आश्वासन दिया था कि जल्द ही शहर की जनता को 24 घंटे साफ नर्मदा जल मिलेगा। अवैध बोरिंग के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अमृत योजना 2019 तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद जनता को रोजाना जल वितरण किया जाएगा।

निगम ने कोर्ट में जैसा कहा, वैसा किया नहीं

नगर निगम के आश्वासन के आधार पर न्यायालय ने याचिका निराकृत कर दी थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस पर अवमानना याचिका दायर की गई। इसमें हमने कोर्ट को बताया कि आदेश के सात वर्ष बाद भी शहर में पेयजल व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। आज भी कई जगह टैंकरों से जल वितरण हो रहा है। शहर में कहीं भी 24 घंटे पानी नहीं मिल रहा। गंदे पानी की समस्या से पूरा शहर परेशान है। नल एक दिन छोड़कर एक दिन आते हैं और जलकर पूरे माह का वसूला जाता है। तर्कों से सहमत होते हुए कोर्ट ने कलेक्टर और निगमायुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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