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पर्यावरण मंत्रालय व किसानों की आपत्ति के बीच अटक गया अटल प्रोग्रेस-वे CM ने नए अलाइनमेंट सर्वे के दिए आदेश

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मुरैना। चंबल अंचल के लिए मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अटल प्रोग्रेस-वे (अटल प्रगति पथ) परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई है। इस एक्सप्रेस-वे को बीहड़ों में पर्यावरण मंत्रालय नहीं बनने दे रहा और निजी क्षेत्र पर निर्माण के लिए किसान अपनी जमीन देने तैयार नहीं। किसानों के तीव्र विरोध के कारण मार्च महीने में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अटल प्रोग्रेस वे के सर्वे को निरस्त कर दिया और दुबारा सर्वे के आदेश दिए। चार महीने से अटल प्रोग्रेस-वे के नए अलाइनमेंट का काम ठप है।

साल 2017 में सरकार ने बीहड़ों में एक्सप्रेस-वे बनाने की घोषणा सरकार ने की थी। उस समय इसका नाम चंबल एक्सप्रेस-वे रखा गया, जिसका नाम पांच बार बदला और अंत में अटल प्रोग्रेस-वे हुआ। साल 2021 तक इसके अलाइनमेंट का सर्वे हुआ और भारत सरकार ने इसे भारत माला परियोजना में भी शामिल कर लिया, लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बीहड़ों में एक्सप्रेस-वे बनाने पर यह कहकर रोक लगा दी कि इससे चंबल नदी के जलीयजीवों व बीहड़ के पर्यावरण को खतरा होगा।

सरकार ने बीहड़ से दूर इस एक्सप्रेस-वे को बनाने की योजना बनाई। पहले अलाइनमेंट में 162 गांवों से होकर गुजरने वाला यह एक्सप्रेस-वे नए अलाइनमेंट में चंबल संभाग (मुरैना, भिंड श्योपुर) के 214 गांवों से गुजरता, इसके लिए मुरैना के 110, श्योपुर के 63 और भिंड के 41 गांवों यानी कुल 214 गांवों में किसानों की जमीन अधिग्रहण के लिए सर्वे भी हो गया। इसी बीच किसानों का जोरदार विरोध के होने लगा और इसका असर यह हुआ कि चार महीने पहले मुख्यमंत्री ने सर्वे को निरस्त कर फिर से नया सर्वे करने के आदेश दिए।

इसके बाद समस्या यह हो गई कि अब एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन कहां से लाएं। बीहड़ों में पर्यावरण मंत्रालय बनाने की अनुमति नहीं दे रहा है और निजी क्षेत्र की जमीन को लोग देने तैयार नहीं? फिलहाल इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है, इसलिए एक्सप्रेस-वे अटका हुआ है। आगामी चुनाव से पहले कोई रास्ता नहीं निकला तो विपक्ष के लिए यह चंबल में बड़ा मुद्दा बनेगा, यह भी तय है।

सीएम ने कलेक्टरों को दिया था जिम्मा

28 मार्च को हुई वीडियो कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि चंबल संभाग के विकास के लिए अटल प्रोग्रेस-वे बनाया जा रहा है, जो श्योपुर, मुरैना, भिण्ड जिले से निकाला जा रहा है। इस पर 8000 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन मुझे जानकारी मिली है कि अटल एक्सप्रेस-वे का जो सर्वे हुआ है, उसमें किसानों की बेशकीमती जमीन जा रही है। हम किसानों को भूमिहीन नहीं होने देंगे, इसलिए अटल प्रोग्रेस-वे के लिए नया सर्वे करवाया जाएगा।

सीएम ने संभाग आयुक्त सहित संभाग के तीनों जिला कलेक्टराें काे निर्देश दिए कि कि दुबारा जमीन चिन्हांकन करें। अटल प्रोग्रेस-वे में सरकारी जमीन मिले, किसानों की कीमती जमीन को न लिया जाए। ऐसा सर्वे किया जाए कि शासकीय जमीन का अधिक उपयोग हो। मुख्यमंत्री के इस मौखिक आदेश के बाद पुराना सर्वे तो निरस्त हो गया, लेकिन नए सर्वे के लिए कोई आदेश सरकार ने जारी नहीं किए। मुरैना कलेक्टर इसे लेकर दो बार एनएचआइ को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन एनएचएआइ ने कलेक्टर के पत्र पर कोई जवाब नहीं दिया।

विरोध में उतरे थे किसान

अटल प्रोग्रेस वे के दूसरे सर्वे में सरकारी से कहीं ज्यादा किसानों की जमीन आ रही थी। मुरैना, भिंड और श्योपुर जिले में सरकारी क्षेत्र की 140.36 हेक्टेयर जमीन आ रही थी, जबकि निजी क्षेत्र की 1778.299 हेक्टेयर जमीन आ रही थी। 3000 से ज्यादा किसान प्रभावित हो रहे थे और कई किसान भूमिहीन होने की कगार पर पहुंच गए थे। मुरैना, श्योपुर और भिंड जिले में क्षत्रिय महासभा, किसान महासभा, माकपा आदि संगठनों के साथ किसानों ने जमकर विरोध किया था।

शासन स्तर के निर्दश के बाद लिया जाएगा निर्णय

मार्च महीने पहले पुराना सर्वे निरस्त हो चुका है। उसके बाद नए सर्वे के लिए कोई आदेश नहीं आए। मैं एनएचआइ को पत्र लिख चुका हूं, लेकिन उनकी ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई कि नए अलाइनमेंट का सर्वे कब होना है? इस मामले में शासन स्तर से जो निर्देश मिलेंगे, उस हिसाब से निर्णय लिया जाएगा।

अंकित अस्थाना, कलेक्टर, मुरैना

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