Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
CGSSB Lecturer Vacancy 2026: 8 विषयों में होगी शिक्षकों की भर्ती; 29 नवंबर को संभावित परीक्षा, व्याप... Durg Crime News: कॉलेज की फीस भरने के लिए बने चैन स्नेचर; दुर्ग में इंजीनियरिंग के दो छात्र-छात्रा ग... Korba News: छोटे भाई को बचाने भालू से भिड़ा बड़ा भाई! छातीबहार के जंगल में हादसा, एनजीओ की लापरवाही ... Janjgir Gambling Raid: बनारी में सूने मकान में चल रहा था हाई-प्रोफाइल जुआ; पुलिस ने निकाला कारोबारिय... Durg Cylinder Theft Case: 36 भरे एलपीजी सिलेंडर चोरी करने वाला आरोपी चढ़ा पुलिस के हत्थे; खरीदने वाल... Lesliganj Robbery Attempt: ग्राहक सेवा केंद्र में घुसे दो हथियारबंद लुटेरे; मां-बेटे ने जमकर की धुना... Karma Puja 2026: मांदर की थाप पर थिरका झारखंड; करमा पर्व की पूर्व संध्या पर रांची में सांस्कृतिक कार... State Level Nehru Hockey Tournament: रांची में सिमडेगा का दबदबा; अंडर-17 में सिमडेगा और अंडर-15 में ... Ranchi News: त्योहारों पर जरूरी सामानों की न हो किल्लत; रांची चैंबर ने एसएसपी से मांगी नो-एंट्री समय... Jhasa vs Yogendra Sau: हजारीबाग सीओ से बदसलूकी मामले में भड़का प्रशासनिक सेवा संघ; डीसी से की कार्रव...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश: FSL की 20% DNA रिपोर्ट्स की होगी रैंडम जांच, कट-पेस्ट की सफाई खारिज

9

जबलपुर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) द्वारा तैयार की जाने वाली डीएनए (DNA) रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाते हुए एक ऐतिहासिक एवं सख्त दिशा-निर्देश जारी किया है।

अदालत में विगत 5 वर्षों में प्रस्तुत की गई विभिन्न फॉरेंसिक रिपोर्टों में भारी अनिमितताओं व गड़बड़ियों की आशंका को देखते हुए, अब तक पेश की गईं कुल रिपोर्ट्स में से 20 प्रतिशत रिपोर्ट्स की रैंडम (Random) निष्पक्ष जांच कराने के कड़े आदेश दिए गए हैं। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) को निर्देशित किया है कि इसके लिए तीन सदस्यीय वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारियों (Senior Scientific Officers) की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, जिसमें अन्य राज्यों के विशेषज्ञ सदस्यों को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जाए।

⚖️ इटारसी दुष्कर्म केस में उजागर हुई FSL की लापरवाही, पीड़िता व आरोपी के सैंपल में मिला तीसरे व्यक्ति का नाम

दरअस्ल, नर्मदापुरम जिले के इटारसी निवासी पंकज कुमार ने पोक्सो एक्ट (POCSO Act) एवं दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा के विरुद्ध हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, भोपाल में डीएनए परीक्षण हेतु पीड़िता एवं आरोपी के जो सैंपल भेजे गए थे, FSL द्वारा पेश की गई अंतिम रिपोर्ट में किसी तीसरे ही अज्ञात व्यक्ति के सैंपल का उल्लेख कर दिया गया, जिसे ‘M’ के रूप में दर्शाया गया। इतना ही नहीं, घटना रिपोर्ट के अनुसार वारदात 14 नवंबर 2022 से 3 जनवरी 2023 के मध्य हुई थी, जबकि एफआईआर 3 मई 2023 को दर्ज की गई। घटना के चार माह बाद सील किए गए सैंपलों की शुद्धता और वैधता पर भी अदालत ने कड़े सवाल खड़े किए।

🔬 सैंपलिंग प्रक्रिया पर उठा सवाल: ब्लड के स्थान पर लिया सीमेन सैंपल, कोर्ट ने जताई गंभीर आपत्ति

अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी रेखांकित किया कि डीएनए जांच परीक्षण के लिए आरोपी का सीमेन सैंपल लिया गया, जबकि यह परीक्षण केवल ब्लड सैंपल (रक्त नमूने) से भी वैज्ञानिक रूप से संभव था।

इससे फॉरेंसिक सैंपलिंग प्रक्रिया की प्रभावशीलता, शुद्धता और सटीकता पर शुरुआती स्तर पर ही गंभीर संदेह उत्पन्न होता है। अदालत ने माना कि मानव जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े आपराधिक मामलों में ऐसी बुनियादी खामियां किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकतीं।

👨‍⚖️ FSL डायरेक्टर की ‘कट-एंड-पेस्ट’ की सफाई खारिज, हाईकोर्ट बोले- “यह किसी के जीवन-मरण का सवाल है”

युगलपीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डायरेक्टर FSL भोपाल एवं एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) को व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान FSL डायरेक्टर की ओर से पेश किए गए हलफनामे पर युगलपीठ ने घोर असंतोष व्यक्त किया। जब FSL की ओर से तर्क दिया गया कि यह त्रुटि ‘कट-एंड-पेस्ट’ या टाइपिंग की गलती के कारण हो सकती है, तो हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा— “यह जानते हुए भी कि यह किसी व्यक्ति के जीवन और मरण का प्रश्न है, ‘टाइपिंग की गलती’ का बहाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि इस तर्क को मान लिया जाए, तो क्या डीएनए क्रोमोसोम के मिलान से जुड़े आंकड़ों में भी कट-एंड-पेस्ट की गलती नहीं हुई होगी?”

💬 “मध्य प्रदेश FSL की डीएनए रिपोर्ट्स भरोसेमंद नहीं मानी जा सकतीं”: हाईकोर्ट युगलपीठ

“उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि इस प्रकार की लापरवाही से यह सिद्ध होता है कि मध्य प्रदेश राज्य की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी द्वारा तैयार की जाने वाली डीएनए रिपोर्ट्स पूर्णतः भरोसेमंद नहीं हैं। यदि वैज्ञानिक ने कोई गंभीर त्रुटि की है, तो उसे उचित दंडात्मक सजा मिलनी चाहिए, न कि मामले को दबाने का प्रयास किया जाना चाहिए। इसी आधार पर विगत 5 वर्षों की रिपोर्ट्स की निष्पक्ष बाहरी कमेटी से जांच कराने का आदेश पारित किया गया है।”

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.